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इराक के ताल अफार प्रांत से हुआ ISIS का सफाया, PM ने किया ऐलान

बगदाद.इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने इराक के ताल अफार सहित पूरे उत्तरी निनवेह प्रांत में इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादी पर विजयी पाने की कल घोषणा की। अमेरिका के समर्थन वाले जिहादी समूह ने मोसुल पर कब्जा करने के बाद ताल अफार को अपना अगला लक्ष्य बनाया था जहां वर्ष 2014 में आईएस ने इराक तथा सीरिया के कुछ हिस्सों को मिलाकर अपना खलीफा घोषित किया था। अबादी ने अपने बयान में कहा, ''ताल अफार आजाद हो गया है। हम आईएस के आतंकवादियों से कहना चाहते हैं तुम जहां भी हो हम तुम्हारे लिए आ रहे हैं। तुम्हारे पास आत्मसमर्पण करने या मरने के लिए सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं है।''

   

मालदीव में सेना ने संसद को घेरा, विपक्षी सासंदों को जबरदस्ती बाहर निकाला

माले. मालदीव में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। यहां मंगलवार को सेना ने संसद को अपने कब्जे में ले लिया और विपक्षी संसदों को घुसने का मौका तक नहीं दिया। विपक्षी दल स्पीकर के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में थे। इतना ही नहीं, मिलिट्री के जवानों ने विपक्ष के मेंबर्स को जोर जबरदस्ती कर संसद से बाहर तक निकाल दिया। विपक्षी पार्टी एमडीपी के लीडर इम्तियाज फहमी ने इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है।पांच मिनट की कार्यवाही के बाद ही बंद कर दी संसद...
- इम्तियाज ने बताया कि सादे कपड़ों में सिक्युरिटी फोर्सेज ने हमारा रास्ता रोका और चैम्बर तक में घुसने नहीं दिया।
- एमडीपी के अन्य सांसद इवा अब्दुल्लाह ने कहा, आखिरकार जब सांसदों को अंदर जाने की परमिशन मिली, तब स्पीकर अब्दुल्ला मसीह जवानों से घिरे थे।
- इवा ने बताया कि प्रेसिडेंट अब्दुल्लाह यामीन और मसीह ने सेशन शुरू किया, लेकिन पांच मिनट बाद वोटिंग से पहले ही इसे बंद कर दिया।
- उन्होंने बताया कि सांसदों ने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सरकार की जांच के संसदीय अनुरोध से इनकार कर दिया।
- बता दें कि स्पीकर मसीह को प्रेसिडेंट यामीन का करीबी माना जाता है। विपक्ष यामीन पर देश में लोकतांत्रिक विकास को रोकने का आरोप लगाता आ रहा है।
पिछले महीने भी हुई थी ऐसी कोशिश
24 जुलाई को भी आर्मी ने संसद का गेट बंद कर दिया था और सांसदों को बाहर निकाल दिया था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि प्रेसिडेंट यामीन के आदेश के बाद सांसदों को बाहर निकाला गया और संसद के गेट को बंद कर दिया था, ताकि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव न लाया जा सके।

   

डोकलाम हमारा गैरविवादित इलाका, सड़क के बहाने भारत ने घुसपैठ की: चीन

बीजिंग/नई दिल्ली. चीन ने कहा है, "डोकलाम हमारा एक गैरविवादित इलाका है, हमारे सड़क निर्माण के बहाने इस एरिया में हुई भारत की घुसपैठ का कोई कानूनी आधार नहीं है और उसके तर्क बेतुके हैं।" चीन के फॉरेन मिनिस्ट्री की स्पोक्सपर्सन हुआ चुनयिंग का यह कमेंट भारत के होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह के बयान के जवाब में आया है। बता दें कि सिक्किम सेक्टर के डोकलाम एरिया में भूटान ट्राइजंक्शन के पास चीन एक सड़क बनाना चाहता है। भारत और भूटान इसका विरोध कर रहे हैं। करीब 3 महीने से इस इलाके में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं।भारत तुरंत अपने सैनिकों को वापस बुलाए...
- न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक हुआ चुनयिंग ने मंगलवार को कहा, "डोकलाम विवाद को हल करने की पूर्व शर्त और आधार ये है कि भारत तुरंत और बिना शर्त रखे बॉर्डर से घुसपैठ करने वाले अपने सैनिकों को वापस बुलाए। साथ ही अपने इक्विपमेंट्स को भी हटाए।"
- उन्होंने कहा, "उम्मीद है कि भारत अपनी गलत हरकतों और लफ्जों को सुधारने के लिए प्रैक्टिकल और पॉजिटिव एक्शन लेगा।"
- हुआ ने कहा, "चीन एक शांतिप्रिय देश है और हम निश्चित तौर पर शांति बरकरार रखना चाहते हैं। हम अपनी सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की भी हर हाल में रक्षा करेंगे। चीन किसी भी देश को अपनी क्षेत्रीय सम्प्रभुता का उल्लंघन नहीं करने देगा।"
अगर हम भारतीय सीमा में घुसे तो कोहराम मच जाएगा
- हुआ ने कहा, "अगर भारत की ही तरह दलील देकर हमारे सैनिक पड़ोसी के यहां घुस जाएं तो 'भयंकर कोहराम' मच जाएगा। भारत का यह तर्क हास्यास्पद है कि डोकलाम में सीमा पर चीन द्वारा सड़क बनाने से भारत को खतरा है। इस तर्क को बर्दाश्त करने से अंतर्राष्ट्रीय मानदंड (इंटरनेशनल नॉर्म्स) कमजोर होंगे।"
- "भारतीय सैनिकों ने चीन द्वारा सड़क बनाने को बहाना बनाकर गैरकानूनी तरीके से सीमा पार की है। अगर हम भारत की इस दलील को मान लेते हैं तो कोई भी जिसे अपने पड़ोसी का काम पसंद न हो तो वह अपने पड़ोसी के घर में घुस जाएगा। भारत सीमा पर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा खड़ा कर रहा है जो चीन के लिए खतरा है। तो क्या चीन को भारतीय क्षेत्र में घुस जाना चाहिए? अगर ऐसा होगा तो कोहराम मच जाएगा।"
राजनाथ सिंह ने क्या कहा था?
- राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा था, "हालांकि भारत आक्रामक नहीं है और वह कभी पहले हमला भी नहीं करेगा, लेकिन वह अपनी सिक्युरिटी से समझौता भी नहीं करेगा।" सिंह ने ये भी कहा था कि भारत को उम्मीद है कि चीन डोकलाम गतिरोध पर जल्द ही बातचीत की पहल करेगा। उन्होंने ये उम्मीद भी जताई थी कि बीजिंग इस मामले में एक पॉजिटिव कदम उठाएगा।
- सिंह के मुताबिक भारत एक ऐसा देश है जिसने कभी भी किसी दूसरे देश पर नजर नहीं डाली, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि भारत उस विस्तारवादी रवैये के सामने झुक जाएगा, जो पड़ोसी देश के लिए एक धमकी है।
क्या है डोकलाम विवाद?
- ये विवाद 16 जून को तब शुरू हुआ था, जब इंडियन ट्रूप्स ने डोकलाम एरिया में चीन के सैनिकों को सड़क बनाने से रोक दिया था। हालांकि चीन का दावा है कि वह अपने इलाके में सड़क बना रहा है।
- इस एरिया का भारत में नाम डोका ला है जबकि भूटान में इसे डोकलाम कहा जाता है। चीन दावा करता है कि ये उसके डोंगलांग रीजन का हिस्सा है। भारत-चीन का जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 3488 km लंबा बॉर्डर है। इसका 220 km हिस्सा सिक्किम में आता है।
भारत की क्या है चिंता?
- नई दिल्ली ने चीन से कहा है कि चीन के सड़क बनाने से इलाके की मौजूदा स्थिति में अहम बदलाव आएगा, भारत की सिक्युरिटी के लिए ये गंभीर चिंता का विषय है। रोड लिंक से चीन को भारत पर एक बड़ी मिलिट्री एडवान्टेज हासिल होगी। इससे नॉर्थइस्टर्न स्टेट्स को भारत से जोड़ने वाला कॉरिडोर चीन की जद में आ जाएगा। लिहाजा भारत ने डोकलाम से अपनी सेनाएं बिना शर्त वापस बुलाने की चीन की मांग ठुकरा दी है।

   

आतंकवाद से जंग में PAK ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं: ट्रम्प की वॉर्निंग पर बोला चीन

    वॉशिंगटन/बीजिंग. आतंकी संगठनों को सपोर्ट करने पर डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान को वॉर्निंग दी, इस पर चीन अपने पुराने दोस्त (पाक) के बचाव में आगे आ गया। बीजिंग ने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ने वाले देशों में पाकिस्तान आगे है, उसने आतंकवाद से निपटने में बड़ी कुर्बानियां दी हैं। शांति और स्थिरता कायम करने में पाक का अहम योगदान है।" इससे पहले, देश के नाम अपनी स्पीच में ट्रम्प ने कहा, "पाकिस्तान में लोग आतंकवाद से पीड़ित हैं, लेकिन आज पाकिस्तान आतंकियों के लिए सेफ हैवन भी है। अगर पाकिस्तान आतंकी संगठनों का साथ देता रहा तो हम इस पर चुप नहीं बैठेंगे।" कमिटमेंट दिखाए पाकिस्तान...
    - न्यूज एजेंसी के मुताबिक चीन के विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन हुआ चुनयिंग ने मंगलवार को ट्रम्प के कमेंट पर पाकिस्तान का बचाव किया। हुआ ने कहा, "उम्मीद है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में अमेरिकी नीति मददगार होगी और इससे क्षेत्र की सुरक्षा, स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।"
    - बता दें कि अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रम्प ने सोमवार को ये भी कहा था, "अफगानिस्तान में हमारे प्रयासों से जुड़कर पाकिस्तान को बहुत फायदा हुआ है, लिहाजा आतंकियों को खत्म करने में वह हमारी मदद जारी रखे। अब वक्त आ गया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान अपना कमिटमेंट दिखाए।"
    - अर्लिंगटन के फोर्ट मेइर मिलिट्री बेस से देश को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने अमेरिकी लोगों को अफगानिस्तान और साउथ एशिया को लेकर यूएस की रणनीति की जानकारी दी।
    अफगानिस्तान में बड़ी भूमिका निभाए भारत
    - ट्रम्प ने कहा, "हम चाहते हैं कि भारत, अफगानिस्तान के डेवलपमेंट में बड़ी भूमिका निभाए। भारत, अमेरिका के साथ ट्रेड में अरबों डॉलर कमाता है, हम भारत के साथ एक गहरी रणनीतिक साझेदारी डेवलप करेंगे, लेकिन हम चाहते हैं कि वो अफगानिस्तान में हमारी ज्यादा मदद करे।"
    - यूएस प्रेसिडेंट ने ये भी कहा कि इराक में जो गलती हो गई, अमेरिका उसे अफगानिस्तान में नहीं दोहराना चाहता।
    ट्रम्प की भारत से उम्मीद PAK के लिए झटका
    - ट्रम्प ने कहा, "साउथ एशिया को लेकर अमेरिका की स्ट्रैटजी का एक पार्ट दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी और यूएस के प्रमुख सिक्युरिटी और इकोनॉमिक पार्टनर भारत के साथ आगे चलकर गहरी रणनीतिक साझेदारी डेवलप करना भी है। हम अफगानिस्तान में स्थिरता लाने में भारत के अहम योगदान की सराहना करते हैं।"
    - ट्रम्प की भारत से उम्मीद को पाकिस्तान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि पाक काबुल में नई दिल्ली की मौजूदगी का विरोध करता रहा है।
    अफगान छोड़ा तो ISIS एक्टिव हो जाएगा
    - ट्रम्प ने कहा, "अफगानिस्तान में जल्दबाजी में निकल जाने के बाद ISIS और अलकायदा वहां तुरंत एक्टिव हो सकते है, जैसा कि 11 सितंबर से पहले हुआ था। आतंकी कुछ भी नहीं हैं, लेकिन वे अपराधी और दरिंदे हैं, और ये बिलकुल सही है, लेकिन वे हारे हुए लोग हैं।"
    - ट्रम्प ने कहा, "डर इसलिए भी है कि पाकिस्तान और भारत दोनों के पास परमाणु हथियार हैं। इनके तनाव भरे संबंध जंग में भी बदल सकते हैं और ऐसा वास्तव में हो सकता है।" उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिकी लोग बिना जीत के ही जंग से थक चुके हैं।
    अफगान में 4000 अमेरिकी सैनिक भेजे जाने को मंजूरी
    - ट्रम्प ने एक प्रस्ताव पर साइन कर अफगानिस्तान में 4000 और अमेरिकी सैनिकों को भेजे जाने की मंजूरी दे दी है। फॉक्स न्यूज चैनल ने एक सीनियर यूएस ऑफिशियल के हवाले से मंगलवार को यह जानकारी दी। चैनल की रिपोर्ट ट्रम्प के देश को संबोधित करने से पहले आई। बता दें कि अफगानिस्तान में अमेरिकी ऑपरेशन ऑफिशियली 2014 में ही खत्म हो चुका है, लेकिन अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज अभी भी अफगान सेना की मदद कर रही हैं।
    - युद्ध ग्रस्त देश अफगानिस्तान के विकास को लेकर भारत 2011 से एक्टिव है। भारतीय वहां कई कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में लंबे वक्त से काम कर रहे हैं। अफगानिस्तान में तालिबान के खात्मे में भी भारत ने मदद दी है। 2010 के गैलप सर्वे के मुताबिक अफगानी लोग भारत के नेतृत्व को चीन और अमेरिकी नेतृत्व के मुकाबले ज्यादा पसंद करते हैं।
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