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आरुषि मर्डर केस: तलवार दंपती की पिटीशन पर HC आज सुना सकता है फैसला

इलाहाबाद/गाजियाबाद.इलाहाबाद हाईकोर्ट नौ साल पुराने नोएडा के आरुषि-हेमराज मर्डर केस में गुरुवार को अहम फैसला सुना सकती है। इस मामले में सीबीआई कोर्ट ने आरुषि के पैरेंट्स राजेश और नूपुर तलवार को 2013 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी।
क्या है आरुषि-हेमराज मर्डर केस, Q&A में समझें
1) क्या है ये मामला ?
- 16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का मर्डर कर दिया गया था। आरुषि की हत्या गला रेत कर की गई थी। करीब साढ़े पांच साल चली जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने उसके माता-पिता नूपुर और राजेश तलवार को दोषी करार दिया।
- यह मामला लंबे वक्त तक सुर्खियों में छाया रहा था। लोग आरुषि के कातिलों को सजा दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। उस वक्त उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।
2) कितने लोगों का मर्डर हुआ था?
- दो लोगों का मर्डर हुआ था। आरुषि और हेमराज का। हेमराज (45) की बॉडी आरुषि के मर्डर के एक दिन बाद तलवार दंपती की छत पर एक कूलर में मिली थी। बता दें कि हेमराज तलवार दंपती के घर पर काम करता था।
4) कितने लोग इस केस में सस्पेक्ट माने गए?
-इस केस में शुरुआती जांच में 3 नौकर और तलवार दंपति समेत कुल पांच लोगों को सस्पेक्ट माना गया। तीनों नौकर सबूत न मिलने की वजह रिहा कर दिए।
1) कृष्णा थंडाराज:राजेश तलवार के नोएडा के क्लिनिक में काम करता था। वह हेमराज का दोस्त था। जलवायु विहार के आसपास ही रहता था।
2) राजकुमार:यह नेपाल से है। घर का काम देखता था। तलवार दंपती के दोस्त दुर्रानी के घर का काम भी संभालता था।
3) विजय मंडल: यह तलवार दंपती के पड़ोसी के घर में काम करता था।
4) खुद तलवार दंपती डॉ. राजेश और नूपुर तलवार। बाद में इन्हें दोषी माना गया।
5 ) अभी कहां सजा काट रहे हैं तलवार दंपती
- नूपुर और राजेश तलवार गाजियाबाद की डासना जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
6) इलाहाबादहाईकोर्ट में आखिरी सुनवाई कब हुई?
- तलवार दंपती ने सीबीआई स्पेशल कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा ने इस साल 7 सितंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
7) कौन हैं तलवार दंपती?
- तलवार दंपती दिल्ली-एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे हैं। डॉ. राजेश पंजाबी और नूपुर महाराष्ट्रियन परिवार से हैं। नुपुर एयरफोर्स के अफसर की बेटी हैं और डॉ. राजेश के पिता हार्ट स्पेशलिस्ट रहे हैं। आरुषि का जन्म 1994 में हुआ था।
8) इस केस की कितनी टीम ने जांच की?
- इस मामले की जांच सबसे पहले यूपी पुलिस ने शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने तलवार दंपती को शक के घेरे में लिया था। बाद में यह जांच सीबीआई को सौंपी गई। 31 मई 2008 को इस केस की जांच उस वक्त के सीबीआई ज्वाइंट डायरेक्टर अरुण कुमार के हाथ में आई। उन्होंने तलवार दंपती को क्लीन चिट दी और तीन नौकरों को सस्पेक्ट माना।
- नोएडा पुलिस दावा किया था कि आरुषि-हेमराज का कातिल कोई और नहीं बल्कि उसके पिता डॉक्टर राजेश तलवार हैं। इस थ्योरी के पीछे पुलिस ने ऑनर किलिंग की दलील रखी। 23 मई, 2008 को पुलिस ने बेटी की हत्या के आरोप में राजेश तलवार को अरेस्ट कर लिया था।
- इसके बाद, सितंबर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपती को प्राइम सस्पेक्ट माना।
9) कब क्या हुआ ?
- 16 मई, 2008 :आरुषि तलवार की डेड बॉडी घर में मिली।
- 17 मई, 2008 : नेपाल के रहने वाले नौकर हेमराज की लाश छत पर मिली, उसी पर आरुषि की हत्या का आरोप राजेश तलवार ने लगाया था।
- 18 मई 2008: जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस ने कहा कि दोनों मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही, पुलिस ने माना कि मर्डर में परिवार से जुड़े किसी शख्स का हाथ है।
- 19 मई, 2008:तलवार परिवार के पूर्व घरेलू नौकर विष्णु शर्मा पर भी पुलिस ने शक जाहिर किया।
- 21 मई, 2008: यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी जांच में शामिल हुई।
- 22 मई, 2008: आरुषि की हत्या के ऑनर किलिंग होने का शक पुलिस ने जाहिर किया। इस पहलू से भी जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरुषि के लगातार संपर्क में रहे एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। इस दोस्त से आरुषि ने 45 दिनों में 688 बार फोन पर बात की थी।
- 23 मई, 2008 : पुलिस ने डॉ. राजेश तलवार को मर्डर के आरोप में अरेस्ट किया।
- 29 मई, 2008: जांच सीबीआई के हवाले।
- 01 जून, 2008 : सीबीआई ने जांच शुरू की।
- 03 जून, 2008: कम्पाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए सीबीआई ने हिरासत में लिया।
- 27 जून, 2008 : नौकर राजकुमार को अरेस्ट किया गया।
- 12 जुलाई, 2008 : नौकर विजय मंडल अरेस्ट डॉ. तलवार को जमानत मिली।
- 29 दिसंबर, 2010:सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी, लेकिन पेरेंट्स के रोल पर सवाल उठाए।
- 09 फरवरी, 2011:मामले में तलवार दंपती बने आरोपी।
- 21 फरवरी, 2011: दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट को इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए।
- 19 मार्च, 2011: सुप्रीम कोर्ट गए। वहां भी राहत नहीं मिली।
- 11 जून, 2012:सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की।
- 26 नवंबर, 2013 : नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।

   

नपुंंसक बनाने का केस: CBI के बाबा से 30 सवाल, जवाब एक - मुझे कुछ नहीं पता

रोहतक. सीबीआई ने यहां सुनारिया जेल में बंद बाबा गुरमीत राम रहीम से डेरे के अनुयायियों को नपुंंसक बनाने के मामले में पूछताछ की। उससे 30 सवाल पूछे गए, लेकिन किसी भी सवाल का जवाब नहीं मिला। गुरमीत ने सीबीआई के हर सवाल पर कहा कि उसे कुछ नहीं पता। सूत्रों के अनुसार, गुरमीत सीबीआई टीम से ही उलटे सवाल करने लगा। कहा कि उसे कानून की पूरी समझ है। पहले सीबीआई टीम उससे पूछताछ करने की इजाजत के कागजात दिखाए। हालांकि, बाद में वह बात करने को राजी हो गया। क्या है नपुंसक बनाने का मामला...
- बाबा पर अपने ही 400 समर्थकों और अनुयायियों को नपुंसक बनाने का केस भी चल रहा है। इनकी जांच सीबीआई कर रही है। 28 अगस्त को पंचकूला में दंगा भड़काने के आरोप में कई डेरा समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इनमें से चार समर्थक मेडिकल रिपोर्ट में नपुंसक पाए गए हैं।
सीबीआई ने क्या पूछा?
- सीबीआई ने पूछा- आखिर डेरामुखी का ऐसा क्या असर था कि समर्थक नपुंसक बनने को तैयार हो गए?
- सीबीआई के सूत्रों ने DainikBhaskar.com को बताया- "सीबीआई ने मंगलवार को जेल जाकर डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से पहला सवाल किया कि कितने लोगों को नपुंसक बनाया। डेरामुखी ने जवाब नहीं दिया। फिर पूछा - जिन लोगों को नपुंसक बनाया, उन्हें इसके लिए कैसे मजबूर किया? किस तरह के प्रभाव में साधक नपुंसक बनने को राजी हुए? कितने लोग हैं, जिन्हें नपुंसक बनाया गया? डेरे के और किन लोगों ने साधकों को ऐसा करने के लिए मनाया? इन सवालों पर डेरामुखी ने सीबीआई टीम से सिर्फ इतना कहा कि उसे कुछ नहीं पता।
बाबा डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के सेवादार ने बताया था: मैं गुफा के पास होता था, इसलिए नपुंसक बनाया
- कुछ दिन पहले डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के बेहद करीबी रहे अनुयायी ने कबूला था कि डेरामुखी ने ही उसे नपुंसक बनाया। ऐसा सिर्फ इसलिए किया क्योंकि वह सिरसा डेरे में गुफा के आसपास ही रहता था। गुफा में ही सारे अनैतिक और गलत काम होते थे।
बाबा गुरमीत राम रहीम को किस रेप केस में हुई सजा, क्या है पूरा मामला?
- 2002 में एक साध्वी ने गुमनाम चिट्ठी लिखी। इसमें बताया गया था कि कैसे डेरा सच्चा सौदा के अंदर लड़कियों का सेक्शुअल हैरेसमेंट होता था। यह चिट्ठी पंजाब और हरियाणा कोर्ट को भी भेजी गई थी। इसके बाद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के खिलाफ यौन शोषण का केस शुरू हुआ। सीबीआई ने जांच शुरू की। 15 साल बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी करार दिया।
- माना जाता है कि ये चिट्ठी राम रहीम के 20 साल ड्राइवर रहे रणजीत सिंह की बहन ने लिखी थी। बाद में रणजीत का मर्डर हो गया था। इसका शक भी बाबा समर्थकों पर जताया गया। यह केस भी पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है।
- दो साध्वियों के रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को CBI की स्पेशल कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई। यानी डेरा चीफ को कुल 20 साल जेल में गुजारने होंगे। सजा के खिलाफ डेरा सच्चा सौदा ने हाईकोर्ट में अपील की। यह रेप केस 15 साल चला था।

   

गुजरात-हिमाचल विधानसभा चुनावों की तारीखों का आज हो सकता है एलान

नई दिल्ली. इलेक्शन कमीशन (ईसी) गुरुवार शाम हिमाचल प्रदेश और गुजरात में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावाें की तारीखों का एलान कर सकता है। ईसी ने शाम 4 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। कहा जा रहा है कि हिमाचल में नवंबर में एक फेज में, जबकि गुजरात में दिसंबर में दो फेज में वोटिंग कराई जा सकती है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल नवंबर में और गुजरात का दिसंबर में पूरा होगा। गुजरात की राजनीति में 2002 के बाद, यानी 15 साल बाद बीजेपी के लिए यह पहला विधानसभा चुनाव है, जिसमें नरेंद्र मोदी सीएम कैंडिडेट नहीं है। उन्हें 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार केशूभाई पटेल की जगह गुजरात का सीएम बनाया गया था। बीजेपी ने 2002 में अगला चुनाव मोदी की अगुआई में ही लड़ा था। वे 22 मई 2014 तक गुजरात के सीएम रहे। तारीखों के एलान में पहले ही हो चुकी देरी...
- ईसी की ओर से ऐसे संकेत मिले हैं कि हिमाचल में एक ही फेज में नवंबर के दूसरे हफ्ते तक चुनाव कराए जा सकते हैं, जबकि गुजरात में दिसंबर में 2 फेज में वोटिंग मुमकिन है।
- ईसी ने 2 दिन पहले ही गुजरात का दौरा पूरा किया है। इलेक्शन कमीशन के स्पोक्सपर्सन ने सोमवार या दिवाली के बाद चुनावी तारीखों के एलान की उम्मीद जताई थी, अब ईसी के अफसरों को कहना है कि चुनाव कार्यक्रम के एलान में पहले ही देरी हो चुकी है।
गुजरात के पिछले विधानसभा चुनाव पर एक नजर
पार्टी    2012 विधानसभा चुनाव    वोट शेयर    2014 लोकसभा चुनाव
बीजेपी    115    47.9%    26
कांग्रेस    61    38.9%    00
जीपीपी    2    3.6%    00
एनसीपी    2    3.6%    00
जेडीयू    1    5.8%    00
इंडिपेंडेंट    1    2.9%    00
* विधानसभा की 182 सीटें, लोकसभा की 26 सीटें हैं।
हिमाचल प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव पर एक नजर
पार्टी    2012 विधानसभा चुनाव    वोट शेयर    2014 लोकसभा चुनाव
कांग्रेस    36    42.8%    04
बीजेपी    26    38.5%    00
एचएलपी    1    1.9%    00
इंडिपेंडेंट्स    5    12.1%    00
* विधानसभा की 68 सीटें, लोकसभा की 4 सीटें हैं।
दोनों राज्यों में इलेक्शन के बड़े किरदार
गुजरात: नरेंद्र मोदी, अमित शाह, विजय रूपाणी, राहुल गांधी, हार्दिक पटेल, अरविंद केजरीवाल
हिमाचल प्रदेश: नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, राहुल गांधी, वीरभद्र सिंह
दोनों राज्यों में बड़े चुनावी मुद्दे
गुजरात:विकास, जीएसटी, नोटबंदी, पाटीदारों की आरक्षण की मांग।
हिमाचल प्रदेश: बेरोजगारी, करप्शन, विकास, जीएसटी, नोटबंदी।
इन चुनावों की देशभर में अहमियत है, क्योंकि
- इन 2 राज्यों में 4.55 करोड़ वोटर हैं, यानी देश के कुल वोटर का 5.6% है।
- देश की कुल 4033 विधानसभा सीटों में से 244 यानी 6.05% इन राज्यों में हैं।
- इन 244 सीटों में से अभी 57.78% बीजेपी के पास 39.75% कांग्रेस के पास हैं।
- कुल 545 लोकसभा सीटों में से 30 यानी 5.5% सीटें इन 2 राज्यों में हैं।
- इन राज्यों में सभी 30 लोकसभा सीटें बीजेपी के खाते में हैं।

   

गुजरात vs अमेठी की जंग को क्यों धार दे रही BJP? 5 प्वाइंट में जानें शाह की स्ट्रैटजी

लखनऊ. अमेठी लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी ने "मोदी का विकास मॉडल Vs गांधी परिवार का विकास और कांग्रेस का विकास मॉडल" का मुद्दा ऐसे ही नहीं छेड़ा है। इसके जरिए बीजेपी ने डेवलपमेंट के गुजरात मॉडल की याद को ताजा करने की कोशिश की है। इसके साथ वह कांग्रेस सरकार के दौरान अधूरे पड़े आधा दर्जन प्रोजेक्टस को सामने लाकर गुजरात में चल रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव अभियान की धार को कमजोर करना चाहती है। यही वजह है कि बीजेपी ने अपने अभियान के लिए अमेठी के उस कौहार गांव को चुना, जहां साईकिल फैक्ट्री के लिए 80 के दशक में जमीन अधिग्रहित (Acquire) गई थी, लेकिन उस पर अब तक फैक्ट्री नहीं लगी। जमीन अधिग्रहण को लेकर लोगों में गुस्सा है, बीजेपी इसी नाराजगी को हवा दे रही है। सीनियर पॉलिटिकल एक्सपर्ट नवीन जोशी, रतनमणि लाल और प्रदीप कपूर कहते हैं अगर अमेठी कांग्रेस की राजनीति का सिम्बल है, तो बीजेपी के लिए गुजरात की भी उतनी ही अहमियत है। ऐसे में वह राहुल गांधी को विकास के नाम पर फिसड्डी साबित कर यह बताना चाहती है कि गुजरात में लगाए जा रहे उनके आरोप में कोई सच्चाई नहीं हैं। राहुल पहले अमेठी का विकास कर लें...
1) गुजरात बनाम अमेठी क्यों कर रही है बीजेपी
- राहुल पर लगातार हमला बोलने के लिए स्मृति ईरानी को कमान सौंपी गयी है। 10 अक्टूबर को हुई रैली में स्मृति ने बखूबी इसे अंजाम देते हुए राहुल गांधी से सवाल भी पूछा था कि "गुजरात जाकर राहुल विकास का मजाक उड़ाते है, अरे पहले अमेठी का विकास कर लीजिए। आज तक जिला कलेक्टर के बैठने के लिए ऑफिस नहीं है। ये अनोखी अमेठी का विकास है."
- वहीं एक्सपर्ट ने बताया कि राहुल के 4 प्रोजेक्ट फिलहाल बंद हो गए हैं, जिसमें फूड पार्क, पेपर मिल, ट्रिपल आईटी और छह नेशनल हाईवे का काम शामिल है।
2) अमेठी में राहुल गांधी को बिजी रखना चाहती है बीजेपी
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीजेपी का पूरा फोकस अमेठी और रायबरेली पर होगा। यह दोनों सीटें गांधी परिवार का गढ़ है।
- ऐसे में अगर यह दोनों सीट कांग्रेस हार गई तो यह कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील जैसा होगा। यही वजह है कि बीजेपी ने 2019 चुनावों के लिए कांग्रेस मुक्त भारत का नारा अमेठी से दिया है।
- बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जानते हैं कि अमेठी में हमला होने से राहुल घबराएंगे और वह वापस आएंगे। इसका असर भी दिखा। राहुल ने अमित शाह के दौरे से पहले 4 से 6 अक्टूबर के बीच अमेठी का दौरा भी किया।
- दरअसल, 2014 लोकसभा चुनाव में जब अमेठी में वाेटिंग थी, तब राहुल ने पहली बार पूरे दिन कैम्प किया था, हालांकि राहुल जीत गए थे, लेकिन बीजेपी का वोट परसेंट 5 गुना बढ़ गया था।
- एक्सपर्ट बताते हैं कि बीजेपी का फोकस राहुल को हराने से ज्यादा राहुल गांधी को अमेठी में बिजी रखने पर ज्यादा है। गुजरात की जो अहमियत मोदी के लिए है, करीब-करीब वही अहमियत अमेठी की गांधी परिवार के लिए है।
- वहीं, कांग्रेस में नेशनल लेवल पर राहुल के अलावा कोई ऐसा फेस नहीं है, जो पूरे देश में घूम कर चुनाव प्रचार कर सके। मौजूदा वक्त में रायबरेली और अमेठी तक सिमटी प्रियंका गांधी को छोड़ दें , तो राहुल को अमेठी में बिजी कर बीजेपी के लिए गुजरात से 2019 का लोकसभा चुनाव आसान हो जाएगा।
3) राहुल-मोदी को बराबर मौका मिला
- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेठी पर दो मौकों को छोड़ दिया जाए, तो गांधी परिवार का ही कब्जा रहा है। पिछले 13 सालों से राहुल खुद अमेठी के सांसद हैं
- लेकिन वहां की जनता भले ही भावुकता में राहुल गांधी का समर्थन करती हो, लेकिन बेसिक सुविधाओं की अमेठी में आज भी कमी है। किसी गांव में सड़क नहीं है, तो कहीं अस्पताल नहीं है।
- कई योजनाएं राहुल के दो टेन्योर में शुरू तो हुई लेकिन जमीन पर नहीं उतर पायी। अब इसी को बीजेपी मुद्दा बना रही है।
- वहीं, नरेन्द्र मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के सीएम रहे और जब वह लोकसभा चुनावों में उतरे तब बीजेपी ने विकास के नाम पर गुजरात मॉडल को पेश किया और वह पीएम की कुर्सी तक पहुँच गए।
4) राहुल गांधी योजना लाये, शुरू बीजेपी ने किया
- लोकसभा चुनावों में बीजेपी कैंडिडेट स्मृति ईरानी भले ही हार गईं, लेकिन पिछले साढ़े 3 साल में उन्होंने अमेठी के 24 से ज्यादा दौरे किए हैं।
- इस दौरान उन्होंने कोई नई प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया, बल्कि उनका फोकस उन प्रोजेक्ट्स पर रहा जिसे लाए तो राहुल थे, लेकिन काम नहीं हो सका था। इससे जनता के बीच उन्होंने मैसेज दिया कि अपनी 10 साल की सरकार में राहुल गांधी कुछ नहीं कर पाए और हारे हुए कैंडिडेट ने कैसे कर दिया।
- स्मृति ने 10 अक्टूबर को एक बयान में कहा था, राजीव ने ऊंचाहार से रेल लाइन का वादा तो किया, लेकिन उस प्रोजेक्ट के लिए सर्वे और 190 करोड़ रुपए का बजट जारी करने का काम मोदी के टेन्योर में पूरा हुआ है।
- अमेठी के तिलोई विधानसभा में 200 बेड के 90 करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल का कंस्ट्रक्शन भी बीजेपी सरकार में पूरा हुआ, हालांकि यह मंजूर पिछली सरकार में हुआ था।
- इसी तरह कांग्रेस रेडियो स्टेशन के नाम पर सिर्फ रिले सेंटर लेकर आई थी, वो भी एक्टिव नहीं हो सके। स्मृति की कोशिश के बाद इसको बेहतर ढंग से लाया गया। अब एफएम सेंटर खुल रहा है, जिसमें प्रोग्राम भी रिले होंगे।
5) सिर्फ अमेठी नहीं, ये 6 सीटें भी हैं बीजेपी के निशाने पर
- 2014 लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 73 सीटें जीती थीं, लेकिन 7 पर देश के दो राजनैतिक घरानों का कब्जा बरकरार रहा।
- इनमें से अमेठी और रायबरेली राहुल गांधी और सोनिया के पास रहीं, जबकि आजमगढ़ सीट से मुलायम, मैनपुरी से तेजप्रताप यादव, कन्नौज से डिम्पल यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव और बदायूं से धर्मेन्द्र यादव सांसद बने।
- अब इन 7 सीटों के लिए बीजेपी ने अमेठी जैसे ही प्रोग्राम बनाए हैं। दरअसल, सिर्फ आजमगढ़ छोड़ दें, तो 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वोट परसेंट में हर सीट पर 5 गुना की बढोत्तरी हुई है। ऐसे में बीजेपी मानकर चल रही है कि जीतना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है।
- बीजेपी के प्लान के मुताबिक, बड़े नेता इन सीटों का दौरा करेंगे। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े नेता यहां बड़ी रैलियां करेंगे।
4 से 6 अक्टूबर के बीच अमेठी में थे राहुल गांधी
- 4 से 6 अक्टूबर के बीच राहुल गांधी अमेठी दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा- "मोदी जी देश का समय बर्बाद करना बंद करें और रोजगार देना शुरू करें। 30 हजार लोग हर रोज रोजगार ढूंढने के लिए आते हैं, रोजगार सिर्फ 400 लोगों को मिलता है। मोदी जी ने 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था। आज हालात क्या हैं? आप देख सकते है कितने लोगों को रोजगार मिला? "
10 अक्टूबर को अमेठी में थी शाह की रैली
- वहीं, 10 अक्टूबर को अमित शाह एक दिन के दौरे पर अमेठी पहुंचे। यहां उन्होंने गांधी परिवार के साथ खासकर राहुल पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि राहुल बताएं कि वे यहां क्यों नहींं आते। यहां विकास क्यों नहीं होता? यहांं अभी तक कलेक्टर ऑफिस क्यों नहीं बना था? यहांं एफएम क्यों नहींं खुला? उन्होंने कहा- "बताइए, 2014 लोकसभा में चुनाव जीते राहुल अमेठी क्यों नहीं आते? जबकि चुनाव हार गईं स्मृति यहां आती रहती हैं और विकास की बात करती हैं।"
अमेठी में 15 में से 13 लोकसभा चुनाव जीती कांग्रेस
- अमेठी 1967 में लोकसभा सीट बनी। इसके बाद यहां 15 बार लोकसभा चुनाव हुए। कांग्रेस इसमें से 13 बार जीती।
- 1977 में इस सीट से भारतीय लोकदल के स्थानीय कैंडिडेट रवींद्र प्रताप सिंह ने कांग्रेस के संजय गांधी को हराया।
- इसके बाद 1998 में यहां बीजेपी के संजय सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को शिकस्त दी।
कांग्रेस की 13 जीत में 9 बार गांधी परिवार को कैंडिडेट
- अमेठी में कांग्रेस की 13 जीत में से 9 बार यहां गांधी परिवार से रहा है।
- यहां से संजय गांधी 1980 में चुनाव लड़े और जीते। उनकी मौत के बाद राजीव गांधी 1981, 1984 और 1989 में यहां से सांसद चुने गए।
- 1991 में भी राजीव यहां से जीते, लेकिन उसी साल उनका निधन हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने इस सीट से कैप्टन सतीश शर्मा को उतारा। वे जीत गए।
- 1999 में सोनिया गांधी ने अमेठी से चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा।
- 2004 से अभी तक इस सीट पर राहुल गांधी की जीत का सिलसिला बरकरार है।

   

यूपी के बहराइच में नाव पलटने से 6 लोगों की मौत, 3 ने तैरकर जान बचाई

बहराइच.उत्तरप्रदेश के बहराइच जिले के लक्खा बौंडी गांव के पास घाघरा नदी में एक नाव पलटने से 6 लोगों की मौत हो गई। इसमें 9 लोग सवार थे। तीन लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई। ये सभी लोग नदी पार कर मटेरिया मेला देखने के लिए गए थे। जानकारी मिलते ही अफसर घटनास्थल पर पहुंच गए। मरने वालों में 2 बच्चे भी...
कब हुआ हादसा
- हादसा शनिवार सुबह करीब 5 बजे हुआ। ये सभी लोग घाघरा नदी के पार मटेरिया मेला घूमने के लिए गए थे। रात होने की वजह से सभी लोग वहीं रुक गए। शनिवार सुबह पांच बजे ये लोग नाव पर सवार होकर वापस अपने घर लौट रहे थे, उसी वक्त अचानक नदी मे इनकी नाव पलट गयी।
मरने वालों में 2 बच्चे भी शामिल
- लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने गोताखोरो की मदद से दो बच्चों समेत 6 लोगों की बॉडी बरामद कर ली है। वहीं, तीन लोगों ने तैरकर अपनी जान बचाई।
14 सितंबर को यमुना नदी में पलट गई थी नाव
- इससे पहले बागपत के काठा गांव के पास 14 सितंबर को यमुना नदी में नाव पलटने से 19 लोगों की मौत हो गई। इस घटना में 15 लोगों को बचा लिया गया। बताया गया कि नाव की कैपेसिटी 10 लोगों की थी, लेकिन इसमें 60 लोग सवार थे।
- इस घटना से गुस्साए लोगों ने बाद में दिल्ली-यमुनोत्री हाइवे पर प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में 15 सितंबर को नाव चलाने वाले के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया था। वहीं, बवाल के लिए 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी केस रजिस्टर किया गया था।

   
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