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US नेवी का जंगी जहाज सिंगापुर के पास दूसरे शिप से टकराया, 10 लोग लापता

सिंगापुर. अमेरिका का एक वॉरशिप सोमवार को ईस्ट सिंगापुर के पास एक मालवाहक जहाज से टकरा गया। इस हादसे में 5 क्रू मेंबर घायल हो गए, 10 लापता हैं। अमेरिकी नेवी की ओर से यह जानकारी दी गई है। अमेरिकी वॉरशिप के हादसे का शिकार होने का यह दो महीने में दूसरा मामला है। इससे पहले 17 जून को भी अमेरिकन नेवी का जहाज यूएस फिट्जगेराल्ड जापान के पास एक मालवाहक जहाज से टकरा गया था। इस हादसे में सात सैनिकों की मौत हो गई थी। पिछले हिस्से को पहुंचा नुकसान...
- अमेरिकी नेवी ने बताया कि स्ट्रैट्स ऑफ मलक्का में गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS जॉन की यह टक्कर एल्निक एमसी टैंकर से हुई।
- शुरुआती जांच में पता चला है कि जॉन एस. मैककेन के पिछले हिस्से को नुकसान पहुंचा है। नेवी के मुताबिक, हादसे के बाद राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया गया है।
- बयान में कहा गया है, "नुकसान और मेंबर्स के घायल होने का पता लगाया जा रहा है। हादसे की जांच की जा रही है।"
बोट्स, हेलिकॉप्टर और जहाज को रेस्क्यु में लगाया
- नेवी के मुताबिक, शिप सिंगापुर पोर्ट की अपनी रुटीन ट्रिप पर था। अमेरिकी सीनेटर जॉन मैककेन ने ट्वीट किया कि वे और उनकी पत्नी शिप पर मौजूद लोगों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। उन्होंने रेस्क्यु ऑपरेशन की भी तारीफ की है।
- रेस्क्यु ऑपरेशन में टग बोट्स, हेलिकॉप्टर, पुलिस कोस्टगार्ड के जहाज और अमेरिकी एयरक्राफ्ट को लगाया गया है।
- अमेरिकी नेवी के बयान में बताया गया कि हादसा स्थानीय समय से तड़के 5:24 बजे (भारतीय समय से तड़के 3 बजे) हुआ।
इस इलाके में 4 साल में 30 जहाज टकराए
- अमेरिकी जहाज जिस एलनिक एमसी टैंकर से टकराया उस पर लाइबेरिया का झंडा लगा हुआ था। यह टैंकर 600 फुट लंबा और 30 हजार टन वजनी है
- इंडस्ट्री वेबसाइट मरीन ट्रैफिक के मुताबिक, इस टैंकर से तेल और केमिकल्स ले जाए जा रहे थे, जिनका वजन 30 हजार टन से ज्यादा था।
- जापान कोस्टगार्ड के मुताबिक, 2013 से लेकर अब तक इस इलाके में 30 जहाजों की टक्कर हो चुकी है। इनमें छह जापानी क्रू मेंबर की मौत हुई है।
जून में भी टकराया था US वॉरशिप
- बता दें कि इससे पहले 16 जून को अमेरिकन नेवी का वॉरशिप यूएस फिट्जगेराल्ड जापान में योकोसुका के साउथ-वेस्ट में फिलीपींस के एक कार्गो से टकरा गया। इस हादसे में सात सैनिकों की मौत हो गई थी, चार घायल हुए थे। उस वक्त यह हादसा जहाज के तूफान में फंसने की वजह से हुआ था।

   

UP रेल हादसा: DRM-GM छुट्टी पर भेजे गए, 4 अफसर सस्पेंड, 1 का ट्रांसफर

नई दिल्ली.मुजफ्फरनगर रेल हादसे पर रविवार रात रेलवे मिनिस्ट्री ने सख्त कार्रवाई की। DRM दिल्ली, GM नॉर्दन रेलवे और इंजीनियरिंग विंग के सीनियर अफसर को छुट्टी पर भेज दिया गया। इसके अलावा चार अफसरों को सस्पेंड किया गया है। चीफ ट्रैक इंजीनियर का ट्रांसफर कर दिया गया है। शुरुआती जांच के बाद रेलवे ने लापरवाही बरते जाने के संकेत दिए थे। रेलवे बोर्ड के सीनियर मेंबर ने कहा कि इस बात की भी जांच की जाएगी कि मेंटेनेंस वर्क के लिए परमिशन ली गई थी या नहीं। दूसरी ओर, रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड चेयरमैन को कहा था कि रविवार को हर हाल में ये बताएं कि हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है? बता दें कि शनिवार शाम को पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस यूपी के खतौली में पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में 23 पैसेंजर्स की मौत हो गई, वहीं 150 से ज्यादा जख्मी हुए। मौके से मेंटेनेंस करने वाले औजार मिले...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, रेलवे बोर्ड के मेंबर (ट्रैफिक) मोहम्मद जमशेद ने कहा, ''शुरुआती जांच में सामने आया है कि खतौली में ट्रैक पर मरम्मत का काम हो रहा था। जांच पूरी होने पर ही हादसे की असली वजह सामने आ सकेगी। अगर कोई मेंटेनेंस हो रहा था तो नियमों के मुताबिक इसकी जानकारी देनी होती है। पता लगा रहे हैं कि हादसे के लिए कोई टेक्नीकल फॉल्ट या मैनुअल सिस्टम जिम्मेदार है।''
- जमशेद ने ट्रैक का दौरा करने के बाद बताया, ''हादसे से जुड़े एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हो रही है, इसकी भी जांच कराई जा रही है। हादसे वाली जगह ट्रैक पर मेंटेनेंस में इस्तेमाल किए जाने वाले औजार मिले हैं। अगर कभी भी ट्रैक का मेंटेनेंस करना होता है तो इसकी जानकारी स्टेशन को देनी होती है और लिखित में परमिशन ली जाती है।''
100Kmph से ज्यादा थी ट्रेन की स्पीड
- बताया जा रहा है कि हादसे वाली जगह पर करीब 200 मीटर ट्रैक लंबे समय से खराब है। यहां दो दिन से काम चल रहा था। ट्रेन के ड्राइवर को कॉशन कॉल नहीं मिला। ढीली कपलिंग वाले ट्रैक से ट्रेन 105Kmph की रफ्तार से गुजरी और पटरी से उतर गई। अमूमन ऐसी जगह रफ्तार 15-20Kmph रखी जाती है।
- दिल्ली डिवीजन के डीआरएम आरएन सिंह ने बताया कि उत्कल एक्सप्रेस के कुल 23 में से 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। 6 कोच में ज्यादा नुकसान हुआ। हादसे के वक्त ट्रेन की स्पीड 100 Kmph से ज्यादा थी।
- इसके अलावा रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने भी बोर्ड को शाम तक हादसे के लिए जिम्मेदारी तय करने का ऑर्डर दिया है। प्रभु बारीकी से हादसे की जांच और राहत ऑपरेशन पर नजर रख रहे हैं। रेलवे के कर्मचारी पटरी से उतरे डिब्बों को हटाकर ट्रैक ठीक करने में जुटे हुए हैं। इसके लिए 140 टक क्षमता वाली क्रेनों की मदद ली जा रही है।
आबादी वाले इलाके में घुस गईं बोगियां
- यूपी सरकार ने स्टेटमेंट जारी किया, "उत्कल एक्सप्रेस उड़ीसा से हरिद्वार जा रही थी। खतौली रेलवे स्टेशन आउटर के पास जोरदार झटका लगने से तिलकराम इंटर कॉलेज के पास अनियंत्रित होकर डिरेल हो गई। बीच की करीब 12 बोगी पटरी से उतर गईं। इनमें कुछ बोगियां आबादी में घुस गई, जहां कुछ मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। एक बोगी कॉलेज और एक बोगी घर में घुस गई।
यूपी और ओडिशा सरकार, रेलवे ने किया मुआवजे का एलान
- यूपी सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए मुआवजा देने का एलान किया। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा, " मृतकों के परिजनों को 3.5 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार और अन्य घायलों को 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा।'
- ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए देने का एलान किया।
- नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं और मैं घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।
राहत के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं- प्रभु
- सुरेश प्रभु ने ट्वीट किया, "मैंने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, ट्रैफिक मेंबर्स और दूसरे अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए, ताकि राहत और बचाव के काम पर नजर रखी जा सके। घायलों को इलाज पहुंचाने और मदद के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। मेडिकल वैन्स रवाना की गई हैं।"
- "मनोज सिन्हा घटना स्थल की ओर रवाना हो गए हैं। हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, वजहों का पता लगाया जाएगा। कोई खामी पाई गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
हेल्पलाइन नंबर
डीएम, मुजफ्फरनगर- 9454417574
एसएसपी, मुजफ्फरनगर- 9454400314
सीएमओ, मुजफ्फरनगर- 9412333612, 9634092001
एसपी सिटी, मुजफ्फरनगर- 9454401127
एसडीएम खतौली- 9454417008
सीओ खतौली- 9454401611
एसओ जीआरपी, मुजफ्फरनगर- 9454404449
रेलवे कंट्रोल रूम- 0131-2645238
आरपीएफ- 0131-2437160
ये ट्रेनें रोकी गईं
- हादसे के बाद देहरादून-सहारनपुर-दिल्ली रूट पर दर्जनों ट्रेनों को जहां-तहां रोक दिया गया है। देहरादून-बांद्रा एक्सप्रेस, सहारनपुर-इलाहाबाद नौचंदी एक्सप्रेस, अंबाला-दिल्ली पैसेंजर, शालीमार एक्सप्रेस, दिल्ली-देहरादून जन शताब्दी को रोक दिया गया है। स्टेशन अधीक्षक जवाहर सिंह ने बताया कि अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है कि ट्रेनों को किस रास्ते दिल्ली निकाला जाए।
40% रेलवे ट्रैक आउट डेटेड
-  वहीं, आउट डेटेड मैटेरियल से काम चलाया जा रहा है, जिस वजह से ये हादसे हो रहे हैं।
- रिटायर्ड अधिकारी और नॉर्दन रेलवे मेन्स यूनियन (एनआरएमयू) के प्रेसिडेंट एसके त्यागी ने बताया कि, ''रेल होदसों का सबसे बड़ा कारण ये है कि हमारे 40 प्रतिशत ट्रैक आउट डेटेड हैं। इसके अलावा कई रूट ऐसे हैं जिनके ट्रैक अक्सर खराब रहते हैं। इन ट्रैक्स को मेंटेन कराकर चलाया जा रहा है। इतना ही नहीं ट्रैक को सुबह और शाम जांच का नियम है। लेकिन मैन पावर की कमी की वजह से ये जांच भी नहीं हो पा रही। ऐसे में हादसे तो होंगे ही।''
- ''ये बातें सारे अधिकारी जानते हैं, फिर चाहे वो मैनेजमेंट हो या निचले स्तर पर काम कर रहे डीआरएम या अन्य कर्मी। कोई पॉलिसी भी बनती है तो वो फाइल इतनी जगह से घूमती है कि दोबारा मिलती ही नहीं। बस कागजों पर सारी चीजें दी जा रही हैं।''
UP में डेढ़ साल में हुए बड़े रेल हादसे
1) 20 फरवरी 2017: कालिन्दी एक्सप्रेस के टुंडला में 12 डिब्बे पटरी से उतरे। 23 की मौत
2) 20 नवंबर 2016: कानपुर के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसा। 121 लोगों की मौत।
3) 20 मार्च 2015:रायबरेली के बछरावां के पास देहरादून-वाराणसी एक्सप्रेस हादसा। 32 की मौत।
4) 1 अक्टूबर 2014: गोरखपुर में क्रासिंग पर दो ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर। 14 की मौत।

   

रिटायरमेंट फॉर्मूले से यूटर्न: शाह के बयान से 15 राज्यों के 75+ के 25 नेताओं को उम्मीद

    नई दिल्ली. अमित शाह ने शनिवार को मध्यप्रदेश में यह कहकर सबको चौंका दिया कि 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाने का पार्टी में कोई नियम नहीं है। न ही ऐसी कोई परंपरा है। बीजेपी हाईकमान के रुख में इस लचीलेपन से पार्टी के 75+ के करीब 25 नेताओं में एक बार फिर सक्रिय राजनीति में लौटने की उम्मीद जग गई है। यह नेता खासकर, उन्हीं 15 राज्यों से हैं, जहां 2019 के आम चुनाव तक विधानसभा चुनाव होने हैं। 75 पार के नेताओं को मोदी ने कैबिनेट में जगह नहीं मिली थी...
    - दरअसल, 2014 में नरेंद्र मोदी ने 75 पार के नेताओं को कैबिनेट में नहीं रखा था। वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी तक को मार्गदर्शक मंडल तक सीमित कर दिया था।
    - उसी दौरान पार्टी में स्पष्ट कर दिया गया था कि चुनाव लड़ने की अधिकतम आयु सीमा 75 साल है। बीजेपी शासित राज्यों में भी यही फॉर्मूला अपनाया गया।
    - गुजरात में मुख्यमंत्री रहीं आनंदीबेन पटेल को 75 की उम्र पार होते ही कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने यह आयु सीमा पूरी होने से महीने पहले ही पद छोड़ दिया था।
    - फेसबुक पोस्ट में उम्र ही उन्होंने इस्तीफे की वजह बताई थी।
    - दरअसल, बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 360 से ज्यादा सीटें जीतने का टारगेट रखा है। इसकी रणनीति बनाते वक्त टॉप लीडरशिप समझ चुकी है कि मनचाहे नतीजे पाने के लिए बुजुर्ग और अनुभवी नेताओं को तरजीह देनी ही पड़ेगी। इसलिए शाह ने बेहद चतुराई से अघोषित सिद्धांत में लचीलेपन का संकेत दिया है।
    शाह की रणनीति: मिशन 2019 में अनुभवी नेताओं का सहयोग रहे, भितरघात का खतरा कम रहेगा
    - शाह का बयान गुजरात, हिमाचल, कर्नाटक के इस साल और मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में अगले साल होने वाले चुनाव को साधता है।
    - बीजेपी के एक रणनीतिकार बताते हैं कि इससे 75 पार के नेताओं का उत्साह बना रहेगा। चुनावी राज्यों में पहली पीढ़ी के नेताओं को सक्रिय रखने की रणनीति है, ताकि भितरघात से बचा जा सके।
    - कुछ दिन बाद होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में अनुभवी चेहरे लाने का संकेत भी है। बीजेपी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व को अहसास हुआ है कि अब तक जितने भी तरह के प्रयोग सत्ता-संगठन में नियुक्तियों को लेकर हुए उसका नतीजा संतोषजनक नहीं रहा।
    - कर्नाटक में बीजेपी 74 साल के बीएस येदियुरप्पा के भरोसे हैं। उन्हें सीएम कैंडिडेट बनाया है। चर्चा है बीजेपी सत्ता में आई तो येदियुरप्पा को 75 पार होते ही हटा दिया जाएगा। इससे अटकलों को विराम लगेगा।
    - दूसरी पार्टियों से आए 75 पार के नेताओं को भरोसे में लेने की कोशिश। इसमें पूर्व विदेश मंत्री रहे एसएम कृष्णा जैसे नाम हैं। गुजरात में कांग्रेस से अलग हुए शंकर सिंह वाघेला पार्टी में आ सकते हैं।
    - यूपी के फॉर्मूले के आधार पर कलराज मिश्र की कैबिनेट से छुट्टी की अटकलें हैं, लेकिन पूर्वांचल में ब्राह्मणों में पार्टी के प्रति रुख सकारात्मक नहीं दिख रहा। ऐसे में कलराज मंत्री बने रहेंगे।
    इन्हें हो चुका नुकसान : आडवाणी और जोशी जैसे नेता मार्गदर्शक तक सीमित
    - लालकृष्ण आडवाणी (89), मुरली मनोहर जोशी (83)। मंत्री और राष्ट्रपति पद से वंचित रहे। संगठन में मार्गदर्शक मंडल तक सीमित। जिसकी आजतक एक भी बैठक नहीं हुई।
    - आनंदीबेन पटेल (75) गुजरात की मुख्यमंत्री थीं, पद से उम्र के फार्मूले की वजह से हटना पड़ा।
    - नजमा हेपतुल्ला (77) मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थीं और केंद्र में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री। 75 की उम्र होने पर न चाहते हुए पद छोड़ना पड़ा। अब राज्यपाल।
    - यशवंत सिन्हा (84) झारखंड के हजारीबाग से जीतते रहे हैं। अटल सरकार में वित्त-विदेश मंत्री रहे। इस बार टिकट बेटे को मिला। जून 2015 में कहा- ‘बीजेपी में 75 पार के लोगों को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया है।’
    - उत्तराखंड के पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी (82) को मंत्री नहीं बनाया। जसवंत सिंह (79), अरुण शौरी (75), लालजी टंडन (82), कल्याण सिंह (85), केशरी नाथ त्रिपाठी (82) समेत कई नेता उम्र की वजह से सक्रिय राजनीति से दूर कर दिए गए।
    इन्हें फायदा : 73 के धूमल हो सकते हैं हिमाचल में सीएम पद के दावेदार
    - सुमित्रा महाजन (74): लोकसभा टिकट मिल सकता है।
    - शांता कुमार (82): हिमाचल के पूर्व सीएम रहे हैं। सांसद हैं। मंत्री या मुख्यमंत्री की दौड़ में खुद को देख सकते हैं।
    - प्रेम कुमार धूमल (73): हिमाचल के सीएम रहे हैं। इस बार जेपी नड्डा को मौका देने की बात है। दावेदारी पेश कर सकते हैं।
    - गुलाब चंद कटारिया (72), अमरा राम (74) राजस्थान में मंत्री हैं। अब आगे भी संभावना बरकरार है। प्रदेश में स्पीकर कैलाश मेघवाल को आगे मौका मिल सकता है।
    - ननकीराम कंवर (74): छत्तीसगढ़ की पिछली सरकार में गृह मंत्री थे। अभी विधायक नहीं। फिर सक्रिय हो सकते हैं।
    - भगत सिंह कोश्यारी (75) उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री। अब केंद्र में मंत्री या राज्य में बड़ी भूमिका मिल सकती है।
    - हुकुमदेव नारायण यादव (77) बिहार से सांसद। उपराष्ट्रपति के लिए नाम उछला, अब मंत्री पद पर निगाह लगा सकते हैं।
    - सी.पी. ठाकुर (85) बिहार से सांसद। अभी साइडलाइन हैं। अनुभव को तरजीह मिली तो फिर हो सकते हैं सक्रिय।
    2019 के लोकसभा चुनाव तक इन 15 राज्यों में होंगे चुनाव: गुजरात, हिमाचलप्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, राजस्थान, त्रिपुरा, सिक्किम, अरुणाचल, तेलंगाना, ओडिशा और आंध्र प्रदेश।
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मालेगांव ब्लास्ट: ले.कर्नल पुरोहित को 9 साल बाद बेल, सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

नई दिल्ली. मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत न देने के ऑर्डर को खारिज करता है। लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित नौ साल से जेल में बंद थे। बता दें कि 29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में बम धमाका हुआ था। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी, करीब 100 लोग जख्मी हुए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और पुरोहित सहित 12 लोग गिरफ्तार किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने शर्त के साथ दी जमानत...
- सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरके अग्रवाल और एएम सप्रे की बेंच ने कहा कि वे बॉम्बे हाईकोर्ट के उस ऑर्डर को खारिज करते हैं, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल को जमानत देने से इनकार किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को जमानत देने के लिए उन पर कुछ शर्तें लगा रहा है।
- बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत अर्जी खारिज होने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी।
ले.कर्नल पुरोहित ने क्या दी दलील?
- 17 अगस्त को पुरोहित ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उन्हें राजनीति के आपसी टकराव की वजह से पकड़ा गया और वे नौ साल से जेल में बंद हैं।
- पिटीशन में उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानत दे दी, लेकिन उनको जमानत देने से इनकार कर दिया। इसलिए उन्हें भी समानता के आधार पर जमानत दे दी जाए।
- पिटीशन में यह भी कहा है कि हाईकोर्ट ने सेना की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की रिपोर्ट पर गौर नहीं किया, जिसमें कहा गया है कि वे सेना के लिए इंटेलीजेंस का काम करते थे।
NIA ने किया था जमानत का विरोध
- सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने इस मामले में एनआईए से जवाब भी तलब किया था।
- इसके जवाब में एनआईए ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित की जमानत का विरोध किया था। बता दें कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने माना था कि कर्नल पुरोहित बम बनाने और सप्लाई करने में शामिल थे।
साध्वी प्रज्ञा समेत 7 को अप्रैल में मिली थी जमानत
- मालेगांव ब्लास्ट मामले में ही आरोपी प्रज्ञा ठाकुर और उनके छह सहयोगियों को इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। प्रज्ञा ठाकुर को 5 लाख के निजी मुचलके पर जमानत दी गई थी। उस वक्त कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया (prima facie) साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।
- कोर्ट ने यह भी कहा था कि साध्वी प्रज्ञा एक महिला हैं और 8 साल से ज्यादा समय से जेल में हैं। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है और वह काफी कमजोर हो गई हैं, बिना सहारे चलने में भी लाचार हैं।
कोर्ट ने कहा था- गलत तरीके से लगाया मकोका
- इससे पहले स्पेशल मकोका कोर्ट ने कहा था कि एटीएस साध्वी प्रज्ञा, पुरोहित और नौ अन्य लोगों पर गलत तरीके से यह कानून (मकोका) लगाया है।
- एटीएस ने 4000 पेज की चार्ज शीट में आरोप लगाया गया था कि मालेगांव को ब्लास्ट के लिए इसलिए चुना गया, क्योंकि यहां मुस्लिमों की बड़ी आबादी है।
- बता दें कि इस केस में साध्वी प्रज्ञा, पुरोहित और स्वामी दयानंद पांडे मुख्य आरोपी थे।
क्या है मामला?
- बता दें कि 29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में बम धमाका हुआ था। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी, करीब 100 लोग जख्मी हुए थे।
- ब्लास्ट उस वक्त किए गए थे, जब लोग रमजान के दौरान नमाज पढ़ने जा रहे थे। इन ब्लास्ट के पीछे हिंदू राइट विंग ग्रुप्स से जुड़े लोगों का हाथ होने की बात सामने आई थी।

   

बिहार में 9 नदियां उफान पर, 17 जिलों के 1.8 करोड़ लोग चपेट में, अब तक 153 मौतें

पटना/मुजफ्फरपुर.नेपाल में बारिश की रफ्तार के फिर जोर पकड़ने के चलते नॉर्थ बिहार की नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। नौ बड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ललबकिया शुक्रवार को खतरे के निशान से नीचे उतरी तो शाम होते-होते पुनपुन खतरे के निशान को पार कर गई। पुनपुन के अलावा बागमती, कमला बलान, अधवारा, खिरोई, महानंदा, घाघरा, बूढ़ी गंडक और कोसी नदी लगातार लाल निशान से ऊपर बह रही है। डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के मुताबिक बाढ़ में अब तक 153 लोग जान गंवा चुके हैं। कुल 17 जिलों के 1.8 करोड़ लोग इसकी चपेट में है।गंडक ने बनाया रिकॉर्ड...
- सोन नदी का वाटर लेवल कोईलवर और पटना के मनेर में बढ़ रहा है। उधर, गंडक गोपालगंज के डुमरियाघाट में अपने नए रिकॉर्ड के साथ बह रही है। 2014 में यहां रिकॉर्ड 63.60 मीटर वाटर लेवर था। शुक्रवार को गंडक का वाटर लेवल 63.76 मीटर पर पहुंच गया है। हालांकि गुरुवार को गंडक 64.10 मीटर पर थी।
कटिहार में बरंडी नदी का बांध कटा, कई गांवों में बाढ़ का पानी
- शुक्रवार देर शाम रहटा पंचायत के हसेली के पास बरंडी नदी का थॉमस बांध टूटने से कई गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से जान बचा कर इधर-उधर भागते दिखे।
- उधर, श्रीकामत स्थित नहर को भी अज्ञात लोगों ने दुबारा काट दिया। बांध टूटने और नहर काटे जाने से एक दर्जन से ज्यादा गांवों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है।
- इससे रहठा, हसेली, श्रीकामत, पिरमोकाम, सहित कई गांव में बाढ़ का पानी फैल जाएगा। लोग भाग कर ऊंची जगहों पर जा रहे हैं। दो साल पूर्व थॉमस बांध टूटा था। तब 600 घरों में पानी घुस गया था।
बागमती सीतामढ़ी में खतरे के निशान से 12 cm ऊपर
- बागमती सीतामढ़ी में खतरे के निशान से 12 सेमी, कमला बलान मधुबनी में 70 मीटर, अधवारा सीतामढ़ी में 1.75 मीटर, खिरोई दरभंगा में 1.38 मीटर, महानंदा पूर्णिया में 58 सेमी और कटिहार में 20 सेमी, बूढ़ी गंडक मोतिहारी में एक मीटर और कोसी सुपौल में खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर बह रही है।
- उधर, घाघरा सीवान और सारण में, गंडक मोतिहारी, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर व हाजीपुर में, बूढ़ी गंडक मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर व खगड़िया में, बागमती मुजफ्फरपुर, दरभंगा व सीतामढ़ी में और कोसी नदी खगड़िया और कटिहार में बढ़ रही है।
मुजफ्फरपुर के बाहरी इलाके डूबे, दरभंगा शहर के 24 मुहल्लों में घुसा बाढ़ का पानी
- नॉर्थ बिहार के 17 जिलों के 153 ब्लॉक की 1688 पंचायतों के 1.08 करोड़ लोग बाढ़ की चपेट में हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के मुताबिक अब तक 153 लोग जान गंवा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में 34 लोगों की मौत हुई है।
- 1289 राहत शिविरों में 3.92 लाख लोग रह रहे हैं। डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीम को रेस्क्यू वर्क में लगाया गया है। सीएम ने पूर्वी चंपारण के सुगौली व आसपास के क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से राहत सामग्री गिराने का निर्देश दिया है।
17 जिलों के 1.8 करोड़ लोग चपेट में, 153 मौतें
- अररिया में 30, वेस्ट चम्पारण में 23, सीतामढ़ी में 13 लोगों की मौत हुई है। किशनगंज, ईस्ट चम्पारण और सुपौल में 11-11 लोगों की जान गई है। मधेपुरा और पूर्णिया में 9-9, मधुबनी में 8, कटिहार में 7 लोगों की मौत हुई है। इसी तरह सहरसा, गोपालगंज और दरभंगा में 4-4, खगड़िया और शिवहर में 3-3, सारण में 2 और मुजफ्फरपुर में 1 शख्स की जान गई है।
21 को फिर होगा हालात का रिव्यू
- सीएम नीतीश कुमार 21 अगस्त को बाढ़ से नुकसान और राहत का फिर रिव्यू करेंगे। इसके आधार पर केंद्रीय मदद के लिए मेमोरेंडम भेजा जाएगा। उसके बाद केंद्रीय टीम नुकसान का जायजा लेने आएगी।
राहत और बचाव
- एनडीआरएफ :28 टीमें, 1110 जवान, 114 नावें।
- एसडीआरएफ : 16 टीमें, 446 जवान, 92 नावें।
- सेना :सात टुकड़ी, 630 जवान, 70 नावें।
- 4.64 लाख की आबादी सुरक्षित निकाली गई।
मुजफ्फरपुर :बूढ़ी गंडक के वाटर लेवल में बढ़ोतरी जारी। बाहरी इलाके डूबे। शनिवार को शहरी इलाके में प्रवेश की आशंका। मोतीपुर, मीनापुर, कांटी, मुशहरी, मुरौल व बंदरा के अलावा दोनों तटबंधों के आसपास अलर्ट जारी।
दरभंगा : बागमती का वाटर लेवल दो फीट बढ़ने से शहर के 24 मुहल्लों में घुसा पानी। 48 में से 11 वार्ड चपेट में।
भागलपुर : यूनिवर्सिटी एरिया से बरारी तक के निचले इलाके में पानी घुसा। रंगरा चौक के 7 स्कूल बंद। सुल्तानगंज के घोरघट में भी बाढ़ का पानी घुसा।
समस्तीपुर :बिथान और कल्याणपुर के बाद शाहपुर पटोरी व मोहनपुर भी डूबे।

   

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