You are here:

कश्मीर समस्या और आतंकवाद का हल 2022 तक निकाल लिया जाएगा: राजनाथ

लखनऊ.राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि 2022 तक कश्मीर, आतंकवाद, नक्सलवाद और नॉर्थ-ईस्ट में जारी विद्रोह का खात्मा हो जाएगा। इस अवसर पर राजनाथ ने सभी को भारत को स्वच्छ, गरीबी, भ्रष्टाचा, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद से मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाई। बीजेपी सरकार बनाने की राजनीति नहीं करती...
- राजनाथ ने "संकल्प से सिद्धि-न्यू इंडिया मूवमेंट: 2017-2022 नए भारत का निर्माण" कार्यक्रम में बोल रहे थे।
- उन्होंने कहा, "भारत में कई समस्याएं हैं, जैसे- आतंकवाद, नक्सलवाद और कश्मीर। मैं यह भरोसा दिलाता हूं कि 2022 तक इन सभी का समाधान हो जाएगा और हम 'न्यू इंडिया' के मंत्र के साथ आगे बढ़ेंगे। हम अपने देशवासियों को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं।"
- राजनाथ ने कहा कि अगर लोग 1947 में आजादी पाने के लिए जब 1942 (भारत छोड़ो आंदोलन) में संकल्प लिया जा सकता है तो आज 70 साल की आजादी के बाद भी हम आत्मनिर्भर क्यों नहीं हो पाए, जो बहुत पहले हो जाना चाहिए था।
मोदी ने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाया
- शाह ने कहा, "मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देना चाहता हूं, जिन्होंने 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले 'न्यू इंडिया' को साकार करने का वादा किया है।"
- इस मौके पर उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वच्छता के महत्व पहचाना और इसे एक अभियान का रूप दिया था, लेकिन नरेंद्र मोदी ने इसे एक जन आंदोलन बनाया है।
संकल्प से सब मुमकिन
- राजनाथ ने कहा, "1857 में आजादी की पहली लड़ाई से अब तक 85 साल में भारत ने देश की ताकत को पहचाना और इसे एकजुट रखा।"
- "1942 में जब महात्मा गांधी ने कहा- करो या मरो, पूरा देश उनके साथ एकजुट होकर खड़ा था...यह संकल्प का ही नतीजा था, जिसकी वजह से पांच साल बात इसका नतीजा मिला। अगर भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किए जाने के पांच साल बाद देश आजाद हो सकता है तो 2017 में न्यू इंडिया का संकल्प लेकर इसे 2022 तक पूरा क्यों नहीं किया जा सकता?
- राजनाथ ने कहा कि पांडवों ने भी उनके संकल्प और दृढ़ता की वजह से ही महाभारत में जीत हासिल की थी।
न्यू इंडिया में न गरीबी होगी न निरक्षरता
- राजनाथ ने कहा, "यह (न्यू इंडिया) ऐसा भारत होगा, जहां न गरीबी होगी और न निरक्षरता। हर शख्स के पास अपना घर होगा, दवा न मिलने की वजह से किसी की मौत नहीं होगी। दुनिया में भारत एक बड़ी ताकत बनकर उभरेगा।"
- राजनाथ ने यह भी कहा कि बीजेपी सरकार बनाने की राजनीति नहीं करती, बल्कि राष्ट्र निर्माण और विकास की सियासत करती है।

   

दिल्ली वाले गोरखपुर को पिकनिक स्पॉट बना रहे हैं: राहुल के दौरे से पहले बोले योगी

गोरखपुर. कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी शनिवार को गोरखपुर पहुंचे। उन्होंने यहां उन बच्चों के घरवालों से मुलाकात की, जिनकी बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई थी। उनके साथ प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद और प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर भी मौजूद रहे। इससे पहले सीएम योगी भी शनिवार को गोरखपुर पहुंचे और यहां बीजेपी के 'स्वच्छ यूपी-स्वस्थ यूपी' अभि‍यान की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि दिल्ली वाले गोरखपुर को पिकनिक स्पॉट बना रहे हैं। बता दें, गोरखपुर के बीआरडी हॉस्पिटल में बीते दिनों 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। पीड़ितों के घर पहुंचे राहुल...
- गोरखपुर एयरपोर्ट से राहुल ग्राम बाघागाड़ा में पीड़ित ब्रह्मदेव यादव के घर पहुंचे। यहां से वे ग्राम मलाव में नितेश शुक्ला, बांसगांव के ग्राम बसौली खुर्द में रमाशंकर और खजनी के ग्राम खुटौना में जितेंद्र के घर जाकर संवेदनाएं प्रकट करेंगे।
- शाम 5 बजे वे मेडिकल कालेज भी जाएंगे, जहां डॉक्टरों से भी बात करने का उनका प्रोग्राम है।
कांग्रेस का डेलीगेशन पहुंचा था गोरखपुर
- इससे पहले भी कांग्रेस का एक डेलीगेशन दिल्ली से गोरखपुर गया था, जि‍समें पार्टी के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद, आरपीएन सिंह और राज बब्बर शामिल थे।
- इन नेताओं ने हॉस्प‍िटल में बच्चों की मौत के लिए सीधे तौर पर योगी सरकार पर सवाल उठाया था। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफा भी मांगा था।
- घटना के बाद यूपी कांग्रेस चीफ राज बब्बर ने बड़ी तादाद में कांग्रेस वर्कर्स के साथ लखनऊ में योगी सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था। राज बब्बर ने योगी सरकार को हत्यारी सरकार करार दिया था। वे दो बार पुलिस हिरासत में भी लिए गए थे। माना जा रहा है कि राहुल गांधी के गोरखपुर पहुंचने से मामला एक बार फिर तूल पकड़ सकता है।
दिल्ली के लोग गोरखपुर को पिकनिक स्पॉट बना रहे हैं
- राहुल के गोरखपुर विजिट के साथ ही सीएम योगी भी शनिवार को गोरखपुर पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के 'स्वच्छ यूपी-स्वस्थ यूपी' अभियान की शुरुआत की।
- सीएम ने यहां कहा- ''इंसेफलाइटिस से हम कई वर्षों से लड़ रहे हैं। इंसेफलाइटिस से बचाव के लिए स्वच्छता जरूरी है। हम इससे बचाव के लिए टीकाकरण अभियान भी चला रहे हैं।''
- ''जो भी शासन से जुड़ी संस्थाएं हैं वो स्वच्छता के लिए अभियान चलाएं। आम जन की सहभागिता जब तक नहीं होगी कोई भी कार्यक्रम सफल नहीं होगा।''
- ''दिल्ली वाले लोग स्वच्छता अभियान के बारे में नहीं जानेंगे। ये लोग गोरखपुर को पिकनिक स्पॉट बनाए हुए हैं। हम गोरखपुर को पिकनिक स्पॉट नहीं बनने देंगे। इन लोगों को गोरखपुर में महत्व नहीं मिलेगा।''
क्या है गोरखपुर ट्रेजडी?
- बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 12 अगस्त तक 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि ये मौतें हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से हुईं।
- कहा जा रहा है कि पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने पेमेंट बकाया होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी। कंपनी ने कहा कि हमने 14 रिमांडर भेजे, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई एक्शन नहीं लिया।
UP सरकार ने क्या कदम उठाया?
- बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को 12 अगस्त को सस्पेंड कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए सस्पेंशन से पहले ही इस्तीफा सौंप दिया था।
- इसके बाद 13 अगस्त को योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बंद कमरे में यहां के स्टाफ की क्लास लगाई। विजिट के बाद सीएम योगी ने कहा कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हर मुमकिन कदम उठाया जाएगा।
- इसी दिन हॉस्प‍िटल के सुपरिंटेंडेट और वाइस प्रिंसिपल डॉक्टर कफील खान को पद से हटा दिया गया। उनकी जगह डॉ. भूपेंद्र शर्मा को अप्वाइंट किया गया।

   

ब्लू व्हेल गेम: दिल्ली के बिजनेसमैन का इकलौता बेटा छत से कूदा, हालत नाजुक

नई दिल्ली. यहां एक बिजनेसमैन के इकलौते लड़के ने घर की छत से कूदकर खुदकुशी करने की कोशिश की। माना जा रहा है कि इसकी वजह ब्लू व्हेल गेम हो सकता है। मामला नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के अशोक विहार का है। लड़के को गंभीर हालत में गंगाराम हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। मौके से मिले लड़के का मोबाइल जब्त कर लिया है। पुलिस उसके डाटा से गेम के बारे में जानकारी जुटाने में जुटी है। बता दें कि हाल ही में मुंबई में एक स्टूडेंट ने इस गेम को खेलते हुए बिल्डिंग से कूदकर सुसाइड कर ली थी। केरल में भी एक लड़के ने फांसी लगा ली थी। उसकी मां का कहना है कि उनके बेटे ने भी ब्लू व्हेल गेम की वजह से ही जान दी है। कमरे से निकल कर छत पर जा पहुंचा...
- पुलिस के मुताबिक राजेश अग्रवाल अपने परिवार के साथ अशोक विहार फेस-1 इलाके में रहते हैं। उनका बेटा कुश मोंटफोर्ड स्कूल में ग्यारहवीं क्लास में पढ़ता है। बुधवार की दोपहर कुश अपनी मां के साथ घर में था, इसी दौरान वह अपने कमरे से निकल कर छत पर जा पहुंचा और वहां घर के पिछले हिस्से की ओर कूद गया।
- पुलिस ने आगे बताया कि गिरने की आवाज सुनकर पड़ोस में रहने वाली महिला ने कुश के परिवार वालों और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। वहां मौजूद चौकीदार ने परिवार वालों की मदद से कुश को नजदीकी हॉस्पिटल पहुंचाया। उसकी गंभीर हालत को देखते हुए फोर्टिस हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया।
छत से मिला मोबाइल
- पुलिस अफसरों के मुताबिक, जब उनकी टीम मौके पर पहुंची तो लड़के को हॉस्पिटल ले जाया जा चुका था, लेकिन घर की छत पर पहुंचने पर उसका मोबाइल, चश्मा और स्लीपर मिलीं।
- उनका कहना है कि हालत देखकर लग रहा था कि कुश खेल खेलते हुए ही छत पर गया था और वहां उसने चप्पल और चश्मा उतारा और फिर छत से कूद गया।
कुछ दिन से गुमसुम रहता था कुश
- पड़ोसियों के मुताबिक, कुश होनहार और खुशमिजाज लड़का है और वह रोज अपने दोस्तों के साथ कॉलोनी में खेलने आता था।
- उसके दोस्तों का कहना है कि कुश बीते कुछ दिनों से गुमसुम था, लेकिन उसने भी किसी से गेम के बारे में कोई बात नहीं की। वहीं, उसके घरवालों का कहना है कि वह अक्सर पढ़ाई के लिए अपने कमरे में रहता था, जिसके चलते वह कमरे में क्या कर रहा है इस पर कभी गौर नहीं किया गया।
बच्चों के ऑनलाइन गेम्स जांचें- के. संजय कुमार, IPS और साइबर क्राइम एक्सपर्ट
- बच्चे के शरीर पर किसी भी तरह के निशान देखने पर तुरंत पूछताछ करें।
- यह खेल लगभग 15 से 20 दिन चलता है, ऐसे में अगर वह अलग-थलग होता है तो तुरंत ध्यान दें
- रात को बच्चा अगर कमरे में अकेला है तो उसकी एक्टिविटी पर नजर रखें
- कोशिश करें नाबालिग बच्चे को स्मार्ट फोन न दिया जाए, बच्चा अगर बालिग है और उसके पास स्मार्टफोन है तो उसकी भी जांच करें
- बच्चा इंटरनेट पर रेग्युलर वक्त न गुजारे और उसके आॅनलाइन खेलों को भी जांचें।
इन हालात में सतर्क रहें
- बच्चा अगर सुबह 4 बजे से मोबाइल पर व्यस्त है।
- बच्चे की एक्टिविटी में अचानक बदलाव आए। जैसे- नफरत, हिंसा और डर दिखाई दें।
- शीट पेपर पर व्हेल का डिजाइन बनाकर किसी को मैसेज भेजे।
- बहार जाते वक्त पुल या ऊंची जगह पर खड़र हो जाए।
- तेज धार हथियार से अपने को नुकसान पहुंचाए।
देश में कितने मामले सामने आए
- बीते दिनों मुंबई में एक लड़के ने ब्लू व्हेल गेम पूरा करने की कोशिश में बिल्डिंग से कूदकर खुदकुशी कर ली थी। इसके बाद केरल में भी एक लड़के के फांसी लगाने का मामला सामने आया। उसकी मां का कहना है कि उसने ब्लू व्हेल गेम की वजह से ही खुदकुशी की है। इंदौर में भी एक लड़के ने छत से कूदकर जाने देने की कोशिश की थी, लेकिन वक्त रहते उसके दोस्तों ने उसे पकड़ लिया था। सोलापुर में एक लड़का घर छोड़कर चला गया था, जिसे परिवार वालों की शिकायत पर पुलिस ने तलाश लिया था।
- दुनियाभर में इस गेम की वजह से खुदकुशी करने के 150 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं।
क्या है 'ब्लू व्हेल चैलेंज'?
- 'द ब्लू व्हेल गेम' या 'द ब्लू व्हेल चैलेंज' रूस में बना एक इंटरनेट गेम है। इसमें प्लेयर को 50 दिन तक कुछ खास टास्क बताए जाते हैं। एक-एक कर सारे टास्क पूरे करते रहने पर आखिरी में सुसाइड के लिए उकसाया जाता है।
- हर टास्क पूरा होने पर प्लेयर को अपने हाथ पर एक कट लगाने के लिए कहा जाता है। आखिरी में जो इमेज उभरती है, वो व्हेल मछली की तरह होती है।
गेम मेकर हो चुका अरेस्ट
- रूस के फिलिप बुडेकिन ने 2013 में यह गेम बनाया। 'द ब्लू व्हेल चैलेंज' 130 लोगों की जान ले चुका है। 2015 में इसे खुलते हुए सुसाइड का पहला केस सामने आया था।
- इसके बाद फिलिप को अरेस्ट कर लिया और उस पर केस चलाया गया। सुनवाई के दौरान गेम मेकर ने बताया- ''गेम का मकसद समाज की सफाई करना है। फिलिप की नजर में सुसाइड करने वाले सभी लोग 'बायो वेस्ट' थे।

   

गोरखपुर में बच्चों की मौत पर DM ने सौंपी रिपोर्ट, 3 को ठहराया जिम्मेदार

गोरखपुर. गोरखपुर के बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुई बच्चों की मौत के मामले में गोरखपुर कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इसमें डीएम राजीव रौतेला ने ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही मेडिकल कॉलेज के सस्पेंड प्रिंसिपल आरके मिश्रा और एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के डॉक्टर सतीश को भी इस ट्रेजेडी की वजह बताया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में पिटीशन दायर...
- इसी बीच बुधवार को इस मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है।
- इस पिटीशन में ज्युडीशियल इंक्वायरी और मारे गए लोगों के परिवार वालों को मुआवजा देने की मांग की गई है।
- पिटीशन में डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर भी रोक लगाने की भी मांग की गई है। यह पिटीशन एडवोकेट सुनीता शर्मा और सोशल एक्टिविस्ट कमलेश सिंह ने दायर की है।
18 अगस्त को होगी सुनवाई
- इस पिटीशन पर 18 अगस्त को चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस एमके गुप्ता की बेंच सुनवाई कर सकती है।
- बता दें, 7 अगस्त को हुई मौतों के बाद से ही डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, हॉस्पिटल और राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग बयान आए हैं।
- सरकार का कहना है कि ये मौतें इंसेफलाइटिस से हुई हैं। साथ ही ऑक्सीजन की कमी के चलते मौतों की बात से इनकार कर रही है।
क्या होता है इंसेफलाइटिस?
- इंसेफलाइटिस को दिमागी बुखार भी कहा जाता है। हकीकत में यह वायरल इन्फेक्शन है। इसकी चपेट में ज्यादातर बच्चे आते हैं। इसमें तेज बुखार, दर्द के साथ शरीर पर चकते आ जाते हैं।''
क्या है गोरखपुर ट्रेजडी?
- बाबा राघव दास (BRD) मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 12 अगस्त तक 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी। आरोप है कि ये मौतें हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से हुईं। कहा जा रहा है कि पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने पेमेंट बकाया होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी। कंपनी ने कहा कि हमने 14 रिमांडर भेजे, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई एक्शन नहीं लिया।
UP सरकार ने क्या कदम उठाया?
- बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को 12 अगस्त को सस्पेंड कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जिम्मेदारी मानते हुए सस्पेंशन से पहले ही इस्तीफा सौंप दिया था।
- इसके बाद 13 अगस्त को योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बंद कमरे में यहां के स्टाफ की क्लास लगाई। विजिट के बाद सीएम योगी ने कहा कि बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ हर मुमकिन कदम उठाया जाएगा।
- इसी दिन हॉस्प‍िटल के सुपरिंटेंडेट और वाइस प्रिंसिपल डॉक्टर कफील खान को पद से हटा दिया गया। उनकी जगह डॉ. भूपेंद्र शर्मा को अप्वाइंट किया गया।
अमित शाह ने क्या कहा?
- वहीं, अमित शाह ने गोरखपुर ट्रेजडी पर कांग्रेस की उस मांग को ठुकरा दिया है, जिसमें सीएम आदित्यनाथ योगी के इस्तीफे की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं कांग्रेस की सत्ता वाले राज्यों में होती रही हैं। इस्तीफा मांगना कांग्रेस का काम है। इतने बड़े देश में बहुत सारे हादसे हुए, पहली बार ऐसा हादसा नहीं हुआ है।

   

बिहार में बाढ़ से 72 की मौत: 17 जिलों के 73 लाख लोग प्रभावित, कई गांव डूबे

पटना/मुजफ्फरपुर/भागलपुर.लगातार हो रही बारिश और नेपाल से आ रहे पानी की वजह से बिहार के 17 जिले में बाढ़ से हालात खराब हैं। इसका सीधा असर 73 लाख लोगों पर हुआ है। पिछले 24 घंटों में 16 और लोगों की मौत हो गई। इससे मौत की तादाद बढ़कर 72 हो गई है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमों में करीब पौने तीन लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। एयर फोर्स के दो हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में खाने का पैकेट गिराया जा रहा है। डिजास्टर डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रत्यय अमृत ने बताया कि एनडीआरएफ की एक-एक एडिशनल टीम को खगड़िया, गोपालगंज, पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चंपारण और सारण भेजा गया है। वहीं, एसडीआरएफ की एक टीम को बचाव कार्य के लिए सहरसा भेजा गया है। किशनगंज में सांसद को बनाया बंधक....
- किशनगंज में बुधवार को राहत सामग्री न मिलने से पीड़ितों ने नेशनल हाइवे जाम कर दिया। कांग्रेस सांसद असरारुल हक कासमी को करीब 3 घंटे तक बंधक बनाए रखा। उत्तर बिहार में बाढ़ के कारण 4.43 लाख हेक्टेयर में क्षेत्र में फसल को नुकसान हुआ है। इसमें 2.23 लाख हेक्टेयर धान की फसल है। बुधवार को एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट ने बाढ़ से प्रभावित 13 जिलों से रिपोर्ट ली।
- बता दें कि पिछले साल बाढ़ में राज्य के 86 लाख लोग प्रभावित हुए थे।
प्रभावित इलाकों का आज एरियल सर्वेकरेंगे सीएम
- खराब मौसम के चलते सीएम नीतीश कुमार बुधवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का एरियल सर्वे नहीं कर पाए थे। उन्होंने अपने ऑफिस से ही राहत और बचाव के काम की मॉनिटरिंग की थी। गुरुवार को वे गोपालगंज और पूर्वी-पश्चिमी चंपारण जिले का एरियल सर्वे करेंगे। उन्होंने मंगलवार को मोतिहारी, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी और दरभंगा का एरियल सर्वे किया था।
अभी 17 जिले प्रभावित
- 1) खगड़िया, 2) गोपालगंज, 3) पश्चिमी चंपारण, 4) पूर्वी चंपारण, 5) सारण, 6) किशनगंज, 7) कटिहार , 8) अररिया, 9) मुजफ्फरपुर, 10) दरभंगा, 11) सीतामढ़ी, 12) पूर्णिया, 13) भागलपुर, 14) मोतिहारी, 15) मधुबनी, 16) सहरसा और 17) शिवहर।
आमतौर पर इन 28 जिलों पर होता है असर
- अररिया, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, पूर्वी पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान, सुपौल, वैशाली।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं 10 नदियां
- इस साल दस प्रमुख नदियां लगातार खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। इनमें बागमती, कमला बलान, अधवारा, खिरोई, महानंदा, कोसी, घाघरा और गंडक शामिल हैं। गंगा भी लाल निशान के करीब पहुंच चुकी है। इन नदियों केआसपास के इलाकों में रहने वाले लोग हर साल बाढ़ से जूझते हैं और बड़ा नुकसान उठाते हैं। बिहार में सबसे लंबा तटबंध 780 किलोमीटर बूढ़ी गंडक पर है जबकि सबसे छोटातटबंध किउल हरोहर पर 14 किलोमीटर का है।

   

aaj ki khaber

Epaper

राष्ट्रीय संस्करण

हरियाणा प्लस

सिरसा संस्करण

 


YOU ARE VISITOR NO.1788808

Site Designed by Manmohit Grover