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महात्मा गांधी मर्डर केस में एमिकस क्यूरी अप्वाइंट, मामले की फिर से जांच की मांग

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दिल्ली. महात्मा गांधी मर्डर केस की फिर से जांच की मांग करने वाली पिटीशन पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) अप्वाइंट किया और कुछ सवाल भी उठाए। कोर्ट ने पिटीशनर से कहा, "इस मामले में आपके हिसाब से तीसरा शख्स भी शामिल था, क्या वह ट्रायल का सामना करने के लिए आज जिंदा है?" सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस मामले में किसी संगठन को दोषी नहीं ठहरा सकते, कोई जिंदा हो तो बताइए। पूर्व ASG को बनाया एमिकस क्यूरी...
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बेंच ने पिटीशन पर सुनवाई की। बेंच ने सीनियर एडवोकेट और पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) अमरेंद्र सरन को इस मामले में कोर्ट की मदद के लिए एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) अप्वाइंट किया।
इस मामले में कानूनन अब कुछ नहीं किया जा सकता
- सुप्रीम कोर्ट ने पिटीशन पर करीब 15 मिनट सुनवाई की और कहा कि इस मामले में कानूनन अब कुछ नहीं किया जा सकता, क्योंकि फैसला बहुत पहले दिया जा चुका है।
- बेंच ने सरन से कहा, "हमारा मानना है कि मामले का असेसमेंट करने के लिए उसका ऑब्जर्वेशन करना जरूरी नहीं है।" इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर कर दी।
अभिनव भारत के ट्रस्टी ने फाइल की है पिटीशन
- महात्मा गांधी मर्डर केस की फिर से जांच की मांग करने वाली पिटीशन मुंबई के डॉ. पंकज फड़नीस ने फाइल की है। फड़नीस एक रिसर्चर और अभिनव भारत के ट्रस्टी हैं।
- फड़नीस ने कई आधारों पर केस की फिर से जांच की मांग की है। इन्होंने दावा किया है कि यह केस इतिहास में सबसे ज्यादा गुप्त रखे गए मामलों में से एक है।
हमें इस केस को फिर से क्यों खोलना चाहिए: SC
- फड़नीस ने अपनी पिटीशन के सपोर्ट में कुछ अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कुछ वक्त मांगा। उसने कहा कि उसे मामले से जुड़े कुछ नए अहम दस्तावेज मिले हैं। इस पर कोर्ट ने कहा, "मामले में इस स्टेज पर अब हम क्या कर सकते हैं? हमें इस केस को फिर से क्यों खोलना चाहिए? हम आपको पहले ही काफी वक्त दे चुके हैं।"
- जब सुप्रीम कोर्ट ने पिटीशनर से कानून की सीमाओं का जिक्र किया तो उसने कहा कि वह इस बारे में जानता है।
गोडसे ने मारी थी गोली
- महात्मा गांधी को 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली में नाथूराम गोडसे ने प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी थी। गोडसे हिंदू राष्ट्रवाद की राइट विंग का समर्थक था।

 

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