गुजरात vs अमेठी की जंग को क्यों धार दे रही BJP? 5 प्वाइंट में जानें शाह की स्ट्रैटजी

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लखनऊ. अमेठी लोकसभा क्षेत्र में बीजेपी ने "मोदी का विकास मॉडल Vs गांधी परिवार का विकास और कांग्रेस का विकास मॉडल" का मुद्दा ऐसे ही नहीं छेड़ा है। इसके जरिए बीजेपी ने डेवलपमेंट के गुजरात मॉडल की याद को ताजा करने की कोशिश की है। इसके साथ वह कांग्रेस सरकार के दौरान अधूरे पड़े आधा दर्जन प्रोजेक्टस को सामने लाकर गुजरात में चल रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के चुनाव अभियान की धार को कमजोर करना चाहती है। यही वजह है कि बीजेपी ने अपने अभियान के लिए अमेठी के उस कौहार गांव को चुना, जहां साईकिल फैक्ट्री के लिए 80 के दशक में जमीन अधिग्रहित (Acquire) गई थी, लेकिन उस पर अब तक फैक्ट्री नहीं लगी। जमीन अधिग्रहण को लेकर लोगों में गुस्सा है, बीजेपी इसी नाराजगी को हवा दे रही है। सीनियर पॉलिटिकल एक्सपर्ट नवीन जोशी, रतनमणि लाल और प्रदीप कपूर कहते हैं अगर अमेठी कांग्रेस की राजनीति का सिम्बल है, तो बीजेपी के लिए गुजरात की भी उतनी ही अहमियत है। ऐसे में वह राहुल गांधी को विकास के नाम पर फिसड्डी साबित कर यह बताना चाहती है कि गुजरात में लगाए जा रहे उनके आरोप में कोई सच्चाई नहीं हैं। राहुल पहले अमेठी का विकास कर लें...
1) गुजरात बनाम अमेठी क्यों कर रही है बीजेपी
- राहुल पर लगातार हमला बोलने के लिए स्मृति ईरानी को कमान सौंपी गयी है। 10 अक्टूबर को हुई रैली में स्मृति ने बखूबी इसे अंजाम देते हुए राहुल गांधी से सवाल भी पूछा था कि "गुजरात जाकर राहुल विकास का मजाक उड़ाते है, अरे पहले अमेठी का विकास कर लीजिए। आज तक जिला कलेक्टर के बैठने के लिए ऑफिस नहीं है। ये अनोखी अमेठी का विकास है."
- वहीं एक्सपर्ट ने बताया कि राहुल के 4 प्रोजेक्ट फिलहाल बंद हो गए हैं, जिसमें फूड पार्क, पेपर मिल, ट्रिपल आईटी और छह नेशनल हाईवे का काम शामिल है।
2) अमेठी में राहुल गांधी को बिजी रखना चाहती है बीजेपी
- एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीजेपी का पूरा फोकस अमेठी और रायबरेली पर होगा। यह दोनों सीटें गांधी परिवार का गढ़ है।
- ऐसे में अगर यह दोनों सीट कांग्रेस हार गई तो यह कांग्रेस के ताबूत में आखिरी कील जैसा होगा। यही वजह है कि बीजेपी ने 2019 चुनावों के लिए कांग्रेस मुक्त भारत का नारा अमेठी से दिया है।
- बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जानते हैं कि अमेठी में हमला होने से राहुल घबराएंगे और वह वापस आएंगे। इसका असर भी दिखा। राहुल ने अमित शाह के दौरे से पहले 4 से 6 अक्टूबर के बीच अमेठी का दौरा भी किया।
- दरअसल, 2014 लोकसभा चुनाव में जब अमेठी में वाेटिंग थी, तब राहुल ने पहली बार पूरे दिन कैम्प किया था, हालांकि राहुल जीत गए थे, लेकिन बीजेपी का वोट परसेंट 5 गुना बढ़ गया था।
- एक्सपर्ट बताते हैं कि बीजेपी का फोकस राहुल को हराने से ज्यादा राहुल गांधी को अमेठी में बिजी रखने पर ज्यादा है। गुजरात की जो अहमियत मोदी के लिए है, करीब-करीब वही अहमियत अमेठी की गांधी परिवार के लिए है।
- वहीं, कांग्रेस में नेशनल लेवल पर राहुल के अलावा कोई ऐसा फेस नहीं है, जो पूरे देश में घूम कर चुनाव प्रचार कर सके। मौजूदा वक्त में रायबरेली और अमेठी तक सिमटी प्रियंका गांधी को छोड़ दें , तो राहुल को अमेठी में बिजी कर बीजेपी के लिए गुजरात से 2019 का लोकसभा चुनाव आसान हो जाएगा।
3) राहुल-मोदी को बराबर मौका मिला
- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अमेठी पर दो मौकों को छोड़ दिया जाए, तो गांधी परिवार का ही कब्जा रहा है। पिछले 13 सालों से राहुल खुद अमेठी के सांसद हैं
- लेकिन वहां की जनता भले ही भावुकता में राहुल गांधी का समर्थन करती हो, लेकिन बेसिक सुविधाओं की अमेठी में आज भी कमी है। किसी गांव में सड़क नहीं है, तो कहीं अस्पताल नहीं है।
- कई योजनाएं राहुल के दो टेन्योर में शुरू तो हुई लेकिन जमीन पर नहीं उतर पायी। अब इसी को बीजेपी मुद्दा बना रही है।
- वहीं, नरेन्द्र मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के सीएम रहे और जब वह लोकसभा चुनावों में उतरे तब बीजेपी ने विकास के नाम पर गुजरात मॉडल को पेश किया और वह पीएम की कुर्सी तक पहुँच गए।
4) राहुल गांधी योजना लाये, शुरू बीजेपी ने किया
- लोकसभा चुनावों में बीजेपी कैंडिडेट स्मृति ईरानी भले ही हार गईं, लेकिन पिछले साढ़े 3 साल में उन्होंने अमेठी के 24 से ज्यादा दौरे किए हैं।
- इस दौरान उन्होंने कोई नई प्रोजेक्ट शुरू नहीं किया, बल्कि उनका फोकस उन प्रोजेक्ट्स पर रहा जिसे लाए तो राहुल थे, लेकिन काम नहीं हो सका था। इससे जनता के बीच उन्होंने मैसेज दिया कि अपनी 10 साल की सरकार में राहुल गांधी कुछ नहीं कर पाए और हारे हुए कैंडिडेट ने कैसे कर दिया।
- स्मृति ने 10 अक्टूबर को एक बयान में कहा था, राजीव ने ऊंचाहार से रेल लाइन का वादा तो किया, लेकिन उस प्रोजेक्ट के लिए सर्वे और 190 करोड़ रुपए का बजट जारी करने का काम मोदी के टेन्योर में पूरा हुआ है।
- अमेठी के तिलोई विधानसभा में 200 बेड के 90 करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल का कंस्ट्रक्शन भी बीजेपी सरकार में पूरा हुआ, हालांकि यह मंजूर पिछली सरकार में हुआ था।
- इसी तरह कांग्रेस रेडियो स्टेशन के नाम पर सिर्फ रिले सेंटर लेकर आई थी, वो भी एक्टिव नहीं हो सके। स्मृति की कोशिश के बाद इसको बेहतर ढंग से लाया गया। अब एफएम सेंटर खुल रहा है, जिसमें प्रोग्राम भी रिले होंगे।
5) सिर्फ अमेठी नहीं, ये 6 सीटें भी हैं बीजेपी के निशाने पर
- 2014 लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने 73 सीटें जीती थीं, लेकिन 7 पर देश के दो राजनैतिक घरानों का कब्जा बरकरार रहा।
- इनमें से अमेठी और रायबरेली राहुल गांधी और सोनिया के पास रहीं, जबकि आजमगढ़ सीट से मुलायम, मैनपुरी से तेजप्रताप यादव, कन्नौज से डिम्पल यादव, फिरोजाबाद से अक्षय यादव और बदायूं से धर्मेन्द्र यादव सांसद बने।
- अब इन 7 सीटों के लिए बीजेपी ने अमेठी जैसे ही प्रोग्राम बनाए हैं। दरअसल, सिर्फ आजमगढ़ छोड़ दें, तो 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के वोट परसेंट में हर सीट पर 5 गुना की बढोत्तरी हुई है। ऐसे में बीजेपी मानकर चल रही है कि जीतना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है।
- बीजेपी के प्लान के मुताबिक, बड़े नेता इन सीटों का दौरा करेंगे। अमित शाह और योगी आदित्यनाथ जैसे बड़े नेता यहां बड़ी रैलियां करेंगे।
4 से 6 अक्टूबर के बीच अमेठी में थे राहुल गांधी
- 4 से 6 अक्टूबर के बीच राहुल गांधी अमेठी दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा- "मोदी जी देश का समय बर्बाद करना बंद करें और रोजगार देना शुरू करें। 30 हजार लोग हर रोज रोजगार ढूंढने के लिए आते हैं, रोजगार सिर्फ 400 लोगों को मिलता है। मोदी जी ने 2 करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया था। आज हालात क्या हैं? आप देख सकते है कितने लोगों को रोजगार मिला? "
10 अक्टूबर को अमेठी में थी शाह की रैली
- वहीं, 10 अक्टूबर को अमित शाह एक दिन के दौरे पर अमेठी पहुंचे। यहां उन्होंने गांधी परिवार के साथ खासकर राहुल पर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि राहुल बताएं कि वे यहां क्यों नहींं आते। यहां विकास क्यों नहीं होता? यहांं अभी तक कलेक्टर ऑफिस क्यों नहीं बना था? यहांं एफएम क्यों नहींं खुला? उन्होंने कहा- "बताइए, 2014 लोकसभा में चुनाव जीते राहुल अमेठी क्यों नहीं आते? जबकि चुनाव हार गईं स्मृति यहां आती रहती हैं और विकास की बात करती हैं।"
अमेठी में 15 में से 13 लोकसभा चुनाव जीती कांग्रेस
- अमेठी 1967 में लोकसभा सीट बनी। इसके बाद यहां 15 बार लोकसभा चुनाव हुए। कांग्रेस इसमें से 13 बार जीती।
- 1977 में इस सीट से भारतीय लोकदल के स्थानीय कैंडिडेट रवींद्र प्रताप सिंह ने कांग्रेस के संजय गांधी को हराया।
- इसके बाद 1998 में यहां बीजेपी के संजय सिंह ने कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा को शिकस्त दी।
कांग्रेस की 13 जीत में 9 बार गांधी परिवार को कैंडिडेट
- अमेठी में कांग्रेस की 13 जीत में से 9 बार यहां गांधी परिवार से रहा है।
- यहां से संजय गांधी 1980 में चुनाव लड़े और जीते। उनकी मौत के बाद राजीव गांधी 1981, 1984 और 1989 में यहां से सांसद चुने गए।
- 1991 में भी राजीव यहां से जीते, लेकिन उसी साल उनका निधन हुआ। इसके बाद कांग्रेस ने इस सीट से कैप्टन सतीश शर्मा को उतारा। वे जीत गए।
- 1999 में सोनिया गांधी ने अमेठी से चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा।
- 2004 से अभी तक इस सीट पर राहुल गांधी की जीत का सिलसिला बरकरार है।