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राशन गेहूं की कालाबाजारी: एक IAS और RAS समेत 5 अफसर और सस्पेंड

जयपुर.राशन के गेहूं की कालाबाजारी के खिलाफ भास्कर के खुलासे के बाद एसीबी के छापे और अफसरों के खिलाफ बुधवार को दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रही। बुधवार देर रात जोधपुर में एक आईएएस और उदयपुर में एक आरएएस अफसर सहित पांच अफसरों को सस्पैंड कर दिया गया। जोधपुर डीएसओ और आईएएस अफसर निर्मला मीणा व उदयपुर डीएसओ व आरएएस अफसर जगमोहन सिंह के निलंबन आदेश कार्मिक विभाग से जारी हुए।
- जोधपुर ग्रामीण के डीएसओ सुरेशदत्त को भी सस्पैंड किया गया है। खाद्य विभाग ने खाद्य आपूर्ति निगम नागौर की प्रबंधक अल्पी व उदयपुर में इसी निगम के प्रबंधक लोकेश तलेसरा को भी निलंबित किया गया। इससे एक दिन पहले सरकार ने 4 डीएसओ, दस प्रवर्तन अधिकारी और प्रवर्तन अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके अलावा 12 राशन डीलरों के लाइसेंस रद्‌द किए थे। बुधवार को एसीबी की छापामार कार्रवाई भी जारी रही।
भास्कर ने बताया था गरीबों के गेहूं में लगा है भ्रष्टाचार का घुन
दैनिक भास्कर ने 10 अक्टूबर के अंक में खुलासा किया था कि गरीबों का गेहूं बाजार में बिक रहा है। भास्कर ने 29 बोरी खरीदी, फिर खाद्य मंत्री के घर ले जाकर राशन घोटाले का सच दिखाया था। इसके बाद खाद्य विभाग चेता। पहले ही दिन 14 अफसर निलंबित किए गए, 60 मिलों पर छापे पड़े। 12 राशन डीलरों के लाइसेंस रद्द हुए। कार्रवाई जारी है।
आईएएस निर्मला छह बार जोधपुर में डीएसओ बन चुकीं, आरएएस 15 साल से उदयपुर में जमे हैं
- जोधपुर डीएसओ निर्मला मीणा हाल ही आरएएस से पदोन्नत होकर आईएएस बनी हैं। वे छह बार जोधपुर में डीएसओ रह चुकी हैं। इनके साथ निलंबित उदयपुर डीएसओ जगमोहन सिंह 1 जून 2002 से उदयपुर में ही पोस्टेड हैं। - दोनों अफसरों को निलंबन अवधि के दौरान सचिवालय स्थित कार्मिक विभाग में उपस्थिति देने के निर्देश दिए गए हैं। कार्मिक विभाग से जारी आदेश के अनुसार दोनों अफसरों पर कई तरीकों की शिकायतें मिली हैं। इनकी जांच जारी है।
राशन डीलर और हाेलसेलर्स का रिकॉर्ड जब्त
- एसीबी ने बुधवार को पाली और राजसमंद जिले में 30 से ज्यादा जगहों पर उचित मूल्य की दुकानों पर आकस्मिक छापेमारी कर रिकॉर्ड जब्त किया। इसमें वह गांव भी शामिल है जहां राशन डीलर अपना मोबाइल नंबर पूरे गांव के ओटीपी नंबर के लिए इस्तेमाल कर रहा था।
चित्तौड़गढ़ व प्रतापगढ़ की राशन की दुकानों पर भी छापा मारा। यहां दुकानों पर काफी अनियमितता मिली और दस्तावेज जब्त किए गए। इसके अलावा एफसीआई गोदाम, राशन दुकान व होलसेलरों का रिकॉर्ड भी जब्त किया गया।
जोधपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन की दुकानों का गेहूं शहर की आटा मिलों में पहुंचने के संदेह में एसीबी की दो टीमें जब्त दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। एसीबी ने बोरानाडा क्षेत्र में दो आटा मिलों पर कार्रवाई की।

   

निजी गोदाम में खाली हो रहा था पोषाहार का चावल, 124 कट्टे जब्त, गोदाम सील

डूंगरपुर.सरकारी स्कूलों में बनाए जाने वाले पोषाहार के चावल की कालाबाजारी का मामला डूंगरपुर में सामने आया है। चावल क्रय विक्रय सहकारी समिति के गोदाम से स्कूली छुट्टियां होने के बाद भी बाहर आया और फिर वहां से पुराना बस स्टैंड के पीछे एक गोदाम में खाली कराया गया। मामले की भनक मिलने पर भास्कर टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई। मौके पर ट्रक खड़ा हुआ था ड्राइवर ...
घटना बुधवार दोपहर करीब सवा 12 बजे की है। सूचना मिली कि पुराना बस स्टैंड के पीछे स्कूल के गेट नंबर 2 के पास एक गोदाम में सरकारी राशन ट्रक से उतारकर भरा जा रहा है। मौके पर ट्रक खड़ा हुआ था और उसमें हरियाणा सरकार से जारी चावल के बैग भरे थे। भास्कर टीम ने जैसे ही ट्रक की पड़ताल शुरू की, गोदाम के मालिक बताए जा रहे युवक ने श्रमिकों को बाहर निकाला और ताला लगाकर भाग निकला। ड्राइवर भी ट्रक को भगाकर ले जाने लगा तो उसे बाइक बीच में लगाकर उसे किसी तरह रोका गया।
सरकारी राशन का चावल होने की पुष्टि पर जानकारी सीधे कलेक्टर राजेंद्र भट्ट को फोन पर दी गई। उन्होंने बताया कि वे डीएसओ और एडीएम को मौके पर भेज रहे हैं। काफी देर तक प्रशासन की तरफ से जब कोई नहीं आया तो कलेक्टर को फिर बताया गया कि स्थिति नियंत्रण से बाहर है और कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। इस पर उन्होंने कहा कि वे एसपी से बात कर रहे हैं। कुछ ही पल में शहर सीआई गजेंद्रसिंह मौके पर पहुंच गए।
बुधवार को ही हुआ था बड़ा खुलासा, 14 डीएसओ निलंबित, देर शाम मामला दर्ज
दैनिक भास्कर ने बुधवार को ही बच्चों के पोषाहार और गरीबों के गेहूं को लेकर बड़ा खुलासा किया। इसके बाद एसीबी और विभाग की टीम ने कई जगहों पर छापे मारे और मंगलवार शाम तक सरकार ने 14 डीएसओ को निलंबित किया गया। दूसरे दिन ही बचे हुए कट्टों को बचाने की जुगाड़ में यह कृत्य पकड़ा गया। इधर, देर शाम डीईओ की ओर से अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी अशोक जैन ने कोतवाली थाने में सप्लायर धनपाल जैन, गोदाम मालिका नयनेश जैन और ट्रक चालक नाथू उर्फ मगन के खिलाफ मामला दर्ज कराया।
स्टॉक रजिस्टर भी नदारद, सादी नोटबुक में लिखा था हिसाब
पुलिस, डीएसओ और जिला शिक्षा अधिकारी मणिलाल छगण विभागीय टीम के साथ पहुंचे। वहां 475 बैग में 237 क्विंटल चावल और 721 बैग में 360 क्विंटल गेहूं भरा हुआ था। केवीएसएस और पोषाहार रखे राशन के गोदाम के बीच एक दरवाजा है। इस दरवाजे से आना-जाना कर सकते हैं। सीआई ने इस पर गहरी आपत्ति जताई। 27 बैग ट्रक में पाए गए और 133 बैग गोदाम में भरे मिले।
अनधिकृत स्थान पर सरकारी सप्लाई का चावल बरामद हुआ। केवीएसएस का स्टॉक जांचा है। निजी गोदाम और ट्रक से बरामद चावल राजस संघ को हैंडओवर किया है। मामले में आज ही एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। निजी गोदाम मालिक और उससे जुड़े सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
कलीम अहमद, डीएसओ
कलेक्टर के निर्देश पर जांच के लिए पहुंचे थे। कार्रवाई का मौका पर्चा बना दिया है। आगे निदेर्शों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
- मणिलाल छगण, डीईओ

   

लड़की को भगाने की ऐसी सजा, कपड़े उतरवा युवकों को पीटा, गंजा कर सिर पर जूते रखे

खींवसर (नागौर)।खींवसर के एक गांव में नाबालिग को शादी की नियत से बहला फुसला कर भगा ले जाने पर ग्रामीणों ने दो युवकों को बुरी तरह पीट दिया। ग्रामीणों में इतना गुस्सा था कि उन्होंने युवकों के बाल काटे और उनके कपड़े उतार कर सिर पर जूते तक रखवा दिए। दो दिन पहले हुए इस मामले में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है। अब इस मामले का वीडियो वायरल हुआ है। जानिए क्या है मामला ....
दो घंटे तक तपती रेत में सुलाया, अचेत हुए युवक
- ग्रामीणों ने दोनों को पकड़ा और आचीणा ले आए। वहां उनकी धुनाई कर दी। अचेत हुए युवकाें के कुछ लोगों ने बाल काट दिए। ग्रामीणों ने उनके वस्त्र उतारे, करीब दो घंटे तक रेत में सुलाए रखा और सिर पर तगारी में जूते रख दिए । करीब डेढ़ घंटे तक युवकों के साथ मारपीट की गई। ग्रामीणों ने युवकों को चेतावनी दी कि वे फिर गांव में कदम नहीं रखें। इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
छह माह गांव में घुसने नहीं देंगे
- ग्रामीणों ने युवकों के परिजनों को बुलाया। परिजनों को भी पूरा मामला समझाया तो उन्होंने भी नाराजगी जताई। प्रकरण को लेकर अभी तक पुलिस को किसी भी पक्ष ने शिकायत दर्ज नहीं करवाई है। घटना का गांव के कुछ लोगों ने वीडियो बना लिया। वीडियों में ग्रामीण यह कहते हुए भी दिख रहे हैं कि युवकों का गांव में 6 माह तक प्रवेश वर्जित होगा।
वीडियो आने पर खुला मामला
- इस पूरे घटनाक्रम को लेकर वीडियो वायरल होने के बाद मामले का खुलासा हुआ है।
- जानकारी है कि इसके तीन से अधिक वीडियो वाट्सएप पर जारी हो चुके हैं।
- इस मामले में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। वहीं दोनों युवक भी गायब हैं।

   

किशनगढ़ एयरपोर्ट का हुआ उद्घाटन, राजस्थान के 7 शहर अब हवाई सेवा से जुड़े

अजमेर/जयपुर. केंद्रीय सिविल एविएशन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार को किशनगढ़ एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। केंद्रीय सिविल एविएशन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बुधवार को किशनगढ़ एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। 23 अक्टूबर से यहां से दिल्ली के लिए विमान सेवा शुरू होगी। राजे ने कहा कि प्रदेश में जयपुर, जोधपुर, कोटा, बीकानेर, जैसलमेर, उदयपुर के बाद अब किशनगढ़ सातवां शहर बन गया है जो हवाई सेवाओं से जुड़ चुका है। 150 यात्रियों की क्षमता वाले इस एयरपोर्ट पर चैक इन के लिए छह काउंटर...
150 यात्रियों की क्षमता वाले इस एयरपोर्ट पर चैक इन के लिए छह काउंटर होंगे। 23 अक्टूबर से यहां से दिल्ली के लिए विमान सेवा शुरू होगी। हवाई पट्टी फिलहाल छह हजार फीट की है जिसमें मिड साइज जेट विमान उतारे जा सकते हैं। राजे ने कहा कि किशनगढ़ एयपोर्ट का उद्घाटन करने से प्रदेश का 57 साल का इंतजार खत्म हुआ है।
अलवर के लिए भी हो सकती है एयरपोर्ट की घोषणा
- अलवर संसदीय सीट पर होने वाले उपचुनावों को देखते हुए सरकार यहां भी नए एयरपोर्ट का ऐलान कर सकती है। सिविल एविएशन विभाग पहले ही कोटकासिम में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए एनओसी दे चुका है इसके बाद राज्य सरकार भी यहां एयरपोर्ट खोलने का प्रस्ताव दे चुकी है।
- जल्द ही सिरोही, नागौर, रणथंभौर, गंगानगर व भीलवाड़ा को भी सरकार इंट्रास्टेट कनेक्टिविटी देने की तैयारी में है। यानी आने वाले समय में प्रदेश के लगभग 12 शहर हवाई सेवाओं से सीधे जुड़ेंगे।
जानकारों का कहना है कि राजस्थान ही एक मात्र राज्य है जिसके छह शहर हवाई सेवाओं से जुड़े हैं। एमपी, यूपी, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक समेत दूसरे राज्यों में 3 से 4 शहर ही हवाई सेवाओं से जुड़े हैं।
छह देश और 11 राज्यों तक सीधी पहुंच
- नॉन शेड्यूल फ्लाइट्स में राजस्थान अहमदाबाद, दिल्ली से जुड़ चुका है। एविएशन इंडस्ट्रीज से जुड़े सुप्रीम एयरलाइंस के सीईओ अमित अग्रवाल का कहना है कि इंट्रास्टेट सर्विसेज में मध्यप्रदेश के शहरों व आगरा को भी राजस्थान से जल्द जोड़ा जाएगा। शेड्यूल फ्लाइट्स में जयपुर देश के लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है। इसमें जयपुर से शरजहां, अबूधाबी व दुबई आिद के लिए सीधी उड़ाने हैं।
40 लाख लोग हर साल कर रहे हैं हवाई सफर
प्रदेश में हवाई सफर करने वालों की तादाद सालाना करीब 50 लाख हो चुकी है। इसमें जयपुर एयरपोर्ट से करीब 35 लाख, उदयपुर से से 11 लाख व जोधपुर एयरपोर्ट से करीब 4 लाख यात्री हर साल हवाई सफर कर रहे हैं। हवाई यात्रियों की संख्या भी हर साल करीब साढ़े 17 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है।

   

225 किमी. जीरो प्वाइंट के बीच 2 हजार किसानों की जमीन, न मुआवजा मिला न जमीन

बाड़मेर.राजस्थान के सरहदी बाड़मेर जिले में भारत-पाक बॉर्डर पर 1992 में 225 किमी. तारबंदी की गई। इस दौरान बाड़मेर के 2 हजार किसानों की 11468 बीघा खातेदारी जमीन तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच चली गई। करीब 25 साल से किसान अपनी जमीन के हक के लिए तरस रहे हैं। किसानों को न तो जमीन का हक मिल रहा है और न ही मुआवजा। छह फीट चौड़ी तारबंदी के नीचे आई जमीन का मुआवजा वर्ष 2004 में किसानों को दिया था, लेकिन तारबंदी से लेकर जीरो पॉइंट के बीच आई करीब 100 मीटर लंबी 11464 बीघा जमीन का मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। 25 साल से जमीन का हक वापस पाने लड़ रहे किसान...
- भारत और पाक के बीच बॉर्डर निर्धारित होने के बाद प्रत्येक निर्धारित स्थान पर पिलर बनाए गए थे। इसके बाद सुरक्षा की दृष्टि से भारत सरकार ने 1992-93 में पीलर से भारतीय सीमा में 150 गज यानि लगभग 450 फीट दूर तारबंदी की। उस समय किसान इस जमीन पर खेती कर रहे थे। तारबंदी के समय केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय एवं राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जमीन का अधिग्रहण कर लिया।
- पिलर और तारबंदी के बीच जिन किसानों की जमीन आ रही थी उनमें जम्मू कश्मीर, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान में श्रीगंगानगर तक के किसानों को तारबंदी पर 3 से 4 किमी. पर गेट खुलवा लिए थे ताकि वे अपनी जमीन पर खेती कर सके।
- श्रीगंगानगर से आगे बीकानेर,जैसलमेर और बाड़मेर जिले के किसानों को अपनी पुश्तैनी जमीन का यह हक नहीं मिल पाया। लगातार 25 साल से तीन जिलों के किसान पुश्तैनी जमीन का हक वापस पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक अपनी जमीन पर खेती तो दूर वहां तक जाने का भी अधिकार सुरक्षा की दृष्टि से नहीं मिल पाया है।
हाईकोर्ट गए,सरकार ने नहीं किया निर्णय
20 साल बाद 10 किसानों ने इस मामले में हाइकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने 28 जनवरी 2013 को गृह मंत्रालय भारत सरकार, राजस्व विभाग राजस्थान सरकार, सीमा सुरक्षा बल को दो माह में किसानों की मांग पर विचार कर निर्णय लेने के लिए कहा गया। इस बात को भी 4 साल हो गए,लेकिन केंद्र व राज्य सरकार ने कोई निर्णय नहीं किया है।
3 जिले, 666 किमी. लंबा बार्डर, नहीं मिला हक
भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बसे बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों की 666 किमी. लंबे बॉर्डर पर जमीन का किसानों का हक नहीं मिला है। यह जमीन तारबंदी के बाद बीएसएफ के कब्जे में चली गई और फिलहाल बीएसएफ के कब्जे में ही है।
काश्त की अनुमति दें या फिर मुआवजा दे सरकार
किसानों की मांग है कि तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच आई राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर समेत तीन जिलों की जमीन पर प्रत्येक 3-4 किमी. पर गेट बनाकर खेती करने की अनुमति दी जाए या फिर उस जमीन के एवज में दूसरी जगह जमीन का आवंटन किया जाए। दोनों मांगे भी नहीं माने तो सरकार बाजार भाव से जमीन का मुआवजा दें।
55 गांवों की 11465 बीघा जमीन तारबंदी में गई
सेड़वा, रामसर, चौहटन, गडरारोड तहसील के 55 गांवों की 11,465 बीघा जमीन वर्ष 1992-93 में हुई तारबंदी और जीरो लाइन के बीच चली गई। प्रशासन की ओर से हाल में तैयार की गई रिपोर्ट में डीएलसी दर से 10 करोड़ रुपए का मुआवजा इन किसानों की जमीन का बनता है।
बॉर्डर की तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच 100 मीटर जमीन, हक मिला सिर्फ 6 फीट जमीन का
भारत-पाक बॉर्डर तारबंदी और जीरो पॉइंट के बीच 100 मीटर जमीन आई हुई है, लेकिन किसानों को सिर्फ 6 फीट का ही हक मिला है यानि तारबंदी के नीचे आई 225 किमी. जमीन का वर्ष 2004 में बाड़मेर कलेक्टर की ओर से किसानों को भुगतान कर दिया गया। कुल 22 लाख 31 हजार 440 रुपए मुआवजा मिला था। इनमें तहसील शिव की 76.81 किमी. 2,85,450 रुपए, रामसर की 34.15 किमी. 2,25,265 रुपए, चौहटन की 114.211 किमी. 17,22,725 रुपए मुआवजा दे दिया गया। यह मुआवजा 6 फीट तारबंदी के नीचे आई जमीन का ही दिया गया। जबकि तारबंदी से जीरो पॉइंट तक करीब 100 मीटर छोड़ी जमीन राजस्थान के चार जिलों की 666 किमी. आई हुई है।
बाड़मेर एमपी कर्नल सोनाराम चौधरी के मुताबिक,नियम 377 के तहत भारत-पाक बॉर्डर पर तारबंदी के जीरो पॉइंट के बीच गई 11 हजार बीघा जमीन का मुद्दा संसद में उठाया था। पंजाब की तर्ज पर 2-3 किमी. गेट बनाकर किसानों को जमीन पर काश्त करने दी जाए या फिर इन्हें इस जमीन के बदले दूसरी सरकारी जमीन आवंटित हो या फिर बाजार दर से मुआवजा दिया जाए। 25 साल से किसान अपनी जमीन के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसको लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी कलेक्टर की रिपोर्ट भेजी थी, उम्मीद है कि जल्द ही न्याय मिलेगा।

   
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