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गर्ल स्टूडेंट से शराब के नशे में रेप, फिर आरोपी ने ही घर तक किया ड्रॉप

सीकर. काॅलेज छात्रा को शराब पिलाकर कार में दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। ज्यादती के बाद छात्रा बेहोश हो गई। आरोपी पीड़िता को कार में उसके घर लेकर गया आैर परिजनों को साथ लेकर एसके अस्पताल पहुंचा। परिजनों ने शक होने पर युवक की पिटाई की। परिजनों के सामूहिक दुष्कर्म के आरोप के बाद पुलिस ने आरोपी गोकुलपुरा निवासी अमित जाट के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
पीड़िता के पिता ने बताया कि वह शुक्रवार सुबह 8:15 बजे बेटी को कॉलेज छोड़कर आए। दोपहर 2:27 बजे अमित जाट ने पिता को फोन किया कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है। वह उसे लेकर घर आ रहा है। इसके थोड़ी देर बाद वह पीड़िता को कार में लेकर घर पहुंचा। पीड़िता के बेहोश होने परिजन कार में अमित के साथ पीड़िता को लेकर एसके अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म हुआ है।

   

ज्वैलर्स को दिवाली का तोहफा, ज्वैलरी कारोबार मनी लॉन्ड्रिंग कानून से बाहर

जयपुर. जीएसटी काउंसिल ने दीपावली का तोहफा देते हुए ज्वैलर्स को मनी लॉन्ड्रिंग कानून से बाहर कर दिया है। इसके साथ ही पचास हजार रुपए से अधिक की ज्वैलरी खरीदने के लिए अब पैन नंबर देने समेत केवाईसी की बाध्यता नहीं होगी। अब पहले की भांति दो लाख रुपए से अधिक की ज्वैलरी खरीदने पर भी ही पैन नंबर देना पड़ेगा।
काबिलेगौर है कि कालेधन पर अंकुश लगाने के मकसद से 23 अगस्त को जैम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (पीएमएलए) के दायरे में लाया गया था। इसके चलते ज्वैलर्स के लिए 50,000 रुपए से अधिक ज्वैलरी खरीदने वाले ग्राहकों की जानकारी वित्तीय एजेंसियों को देना जरूरी हो गया था। इस वजह से पिछले दिनों ज्वैलरी कारोबार में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई थी।
सर्राफा ट्रेडर्स कमेटी, जयपुर के अध्यक्ष कैलाश मित्तल का कहना है कि दिवाली सीजन के मद्देनजर उनको सरकार के इस कदम से बड़ी राहत मिली है। नोटबंदी के बाद से ही ज्वैलरी कारोबार पटरी से उतरा हुआ था। पीएमएलए के दायरे में लाने के बाद से ज्वैलरी कारोबार की कमर टूट गई थी। इस वजह से ज्वैलर्स ने जैम्स एंड ज्वैलरी सेक्टर को पीएमएलए से बाहर करने की मांग की थी।
इस वजह से थी परेशान
इनकम टैक्स एक्ट दो लाख तक की कैश सेल को बिना केवाईसी के करने की अनुमति देता है। पीएमएलए के प्रावधानों के तहत 50,000 से अधिक की किसी भी कैश बिक्री को पैन, आधार, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट कॉपी जैसे प्रूफ के बिना नहीं किया जा सकता है।
हमारी वजह से व्यापारियों को राहत : राजपाल
उद्योग मंत्री राजपाल सिंह ने कहा कि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने जो जीएसटी से जुड़ी मांगे केंद्र के समक्ष रखी थी, उन्हें काफी हद तक तव्वजो मिली है। इससे व्यापारियों और आमजन को फायदा मिलना तय है। कंपोजीशन लिमिट एक करोड़ करना और डेढ़ करोड़ रुपए से कम टर्न ओवर वालों का रिटर्न तीन महीने में दाखिल कराने जैसे कई मुद्दों पर उन्होंने प्रदेश की तरफ से व्यक्तिगत पैरवी की थी। पोलिश कोटा स्टोन की प्राइस घटने, टेक्सटाइल व विभिन्न क्षेत्रों में जीएसटी घटाने का पक्ष राजस्थान ने मजबूती से केंद्र के समक्ष रखा था।
सरकार के फैसले से उद्योगों को मिलेगा फायदा
लघु उद्योग भारती राजस्थान के महासचिव महेन्द्र कुमार खुराना ने जीएसटी कौंसिल द्वारा व्यापारियों व उद्योगों को दी गई राहत का स्वागत कर वित्त मंत्री अरूण जेटली का आभार व्यक्त किया है। वित्त मंत्री द्वारा लघु उद्याेग भारती की मांग पर छोटे व्यापारियों के लिये त्रैमासिक रिर्टन लागू करने, कम्पोजिशन स्कीम की सीमा बढ़ाने, ई-वे बिल को स्थगित करने का उन्होंने स्वागत किया है।

   

जीएसटीसी से अटके 60 करोड़ रुपए के काम अब शुरू होंगे

जीएसटीका झटका हर तबके पर लगा। इसके विरोध में उतरे ठेकेदारों के बहिष्कार से अकेले जिले में 60 करोड़ के टेंडर अटक गए थे। ठेकेदारों एसोसिएशनों और सरकार में वार्ता के बाद अब इनकी टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीदहै। इससे
एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद चिकित्सा विभाग, नगर परिषद, यूआईटी, पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी आदि के ठेकेदारों ने टेंडर का बहिष्कार शुरू कर दिया था। अधिकारी भी पहले के चल रहे कार्यों के अलावा नए काम की जिम्मेदारी नहीं होने से रिलेक्स मूड में चल चल रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव कारीगरों, मजदूरों के साथ-साथ सीमेंट, ईंट, बजरी, लोहा आदि के व्यापारियों पर पड़ा। जिला कांट्रेक्ट एसोसिएशन उपाध्यक्ष पूनम सिंह चौहान के अनुसार जिले में विविध विभागों में करीब 60 करोड़ के निर्माण टेंडर जारी नहीं हो पाए। हाल में ऑल राजस्थान कांट्रेक्टर एसोसिएशन के साथ सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक से सुलह का रास्ता निकल गया।
^कांट्रेक्टरएसोसिएशन प्रतिनिधियों एवं सरकारी अधिकारियों के बीच जीएसटी को लेकर बातचीत हुई। सरकार ने फाइल वित्त विभाग को भेजने पर सहमति दी है। ठेकेदारों ने संबंधित विभागों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने की मंशा बनाई है। पूनमसिंह चौहान, जिला उपाध्यक्ष कांट्रेक्टर एसोसिएशन
जीएसटीका झटका हर तबके पर लगा। इसके विरोध में उतरे ठेकेदारों के बहिष्कार से अकेले जिले में 60 करोड़ के टेंडर अटक गए थे। ठेकेदारों एसोसिएशनों और सरकार में वार्ता के बाद अब इनकी टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीदहै। इससे
एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद चिकित्सा विभाग, नगर परिषद, यूआईटी, पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी आदि के ठेकेदारों ने टेंडर का बहिष्कार शुरू कर दिया था। अधिकारी भी पहले के चल रहे कार्यों के अलावा नए काम की जिम्मेदारी नहीं होने से रिलेक्स मूड में चल चल रहे हैं। इसका दुष्प्रभाव कारीगरों, मजदूरों के साथ-साथ सीमेंट, ईंट, बजरी, लोहा आदि के व्यापारियों पर पड़ा। जिला कांट्रेक्ट एसोसिएशन उपाध्यक्ष पूनम सिंह चौहान के अनुसार जिले में विविध विभागों में करीब 60 करोड़ के निर्माण टेंडर जारी नहीं हो पाए। हाल में ऑल राजस्थान कांट्रेक्टर एसोसिएशन के साथ सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बैठक से सुलह का रास्ता निकल गया।
^कांट्रेक्टरएसोसिएशन प्रतिनिधियों एवं सरकारी अधिकारियों के बीच जीएसटी को लेकर बातचीत हुई। सरकार ने फाइल वित्त विभाग को भेजने पर सहमति दी है। ठेकेदारों ने संबंधित विभागों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने की मंशा बनाई है। पूनमसिंह चौहान, जिला उपाध्यक्ष कांट्रेक्टर एसोसिएशन
चार बिंदुओं पर विशेष आदेश जारी हुए, पालना के निर्देश ... 22सितंबर को पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अतिरिक्त सचिव ने नए आदेश दिए हंै।
{पहला| निविदाओंमें विभाग के नवीनतम आदेश क्रमांक उप सचिव (कार्य) पीडब्ल्यूडी तीन सितंबर 2008 के अनुसार समय सीमा नहीं दी जा रही है। आदेश की प्रति पुन: संलग्न कर भविष्य में सभी निविदाओं में इसके अनुसार समय सीमा देने के लिए निर्देशित किया।
{दूसरा| सभीराज्यों अर्थात राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत योजनाओं के कार्यों पर अनुबंध प्रपत्र के रूप में आरपीडब्ल्यू-100 को ही उपयोग में लिया जाए।
{तीसरा|अधिकतमरूप में एक तहसील के कार्यों का एक पैकेज बनाने तथा अधिकतम सात करोड़ की अनुमानित लागत के पैकेज बनाने के लिए दिए।
{चौथा|मासिकभुगतान के लिए संभाग कार्यालय एवं अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देश दिए।
^जीएसटी का प्रभाव निर्माण कार्यों पर पड़ा है। इस कारण नगर परिषद में विविध निर्माण के करीब 25 करोड़ के काम अटक गए थे। सुशीलशर्मा, सभापति, नगर परिषद

   

3 दिन लड़कियों के हॉस्टल में छुपी हनीप्रीत, राम रहीम के लिए खास है ये जगह

श्रीगंगानगर. सिरसा के डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत को 38 दिन में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में जिन-जिन भी लोगों ने शरण दी, अब हरियाणा पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई में जुट गई है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वो गुरसरमोडिया में लड़कियों के हॉस्टल में भी रही। जानें कहां-कहां रही हनीप्रीत...
- पुलिस सूत्रों के अनुसार हनीप्रीत ने शुरुआती पूछताछ में कबूल लिया है कि वो 38 दिन फरारी में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में छिपी थी।
- पंचकूला में दंगे होने के बाद हनीप्रीत पहले सिरसा डेरे में गई थी। वहां पुलिस की धरपकड़ होने के बाद वह हनुमानगढ़ में अपने भाई के ससुराल पहुंच गई।
- वहां पुलिस पहुंची, इससे पहले हनीप्रीत किशनपुरा उत्तरादा स्थित अपने एक समर्थक में छिपी। फिर वहां से निकलकर गुरुसरमोडिया पहुंच गई। वहां हनीप्रीत तीन दिन तक लड़कियों के हॉस्टल में छिपी रही। फिर वह बीकानेर चली गई।
- पुलिस की जांच में यह भी पता लगा है कि हनीप्रीत जहां भी छिपती, लंबे समय तक नहीं रुकती थी और इस दौरान वहां उसके खास स्थानीय डेरा समर्थक भी संपर्क में रहते थे। उल्लेखनीय है कि 25 अगस्त को पंचकूला में भड़की हिंसा के दर्ज मुकदमे में वांटेड थी।
पुलिस पूछ रही, रेड की जानकारी कहां से मिलती थी
- इस मामले में पुलिस को अपने स्टाफ पर भी शक है। इसलिए पुलिस हनीप्रीत से बार-बार पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पुलिस रेड का आखिर हनीप्रीत को पता कहां से लगता था। कौन उसे पुलिस की सूचनाएं देता था। पुलिस ने हनीप्रीत को पकड़ने के लिए बाड़मेर, हनुमानगढ़, गुरुसर मोडिया, उदयपुर, यूपी, दिल्ली, गुरुग्राम में छापे मारे थे, लेकिन हर जगह हनीप्रीत पहले ही गायब हो जाती थी।
राम रहीम का गांव है गुरसरमोडिया
बता दें कि गुरसरमोडिया राम रहीम का पैतृक गांव है। यहीं राम रहीम का जन्म हुआ था। आज इस गांव में सुख सुविधा की हर चीज मौजूद है। राम रहीम ने यहां न केवल स्कूल खोले हैं बल्कि अस्पताल भी खोले हैं। फिलहाल ये सब अब सुनसान पड़े हैं।
राम रहीम का गांव है गुरसरमोडिया
- बता दें कि गुरसरमोडिया राम रहीम का पैतृक गांव है। यहीं राम रहीम का जन्म हुआ था। आज इस गांव में सुख सुविधा की हर चीज मौजूद है। राम रहीम ने यहां न केवल स्कूल खोले हैं बल्कि अस्पताल भी खोले हैं। फिलहाल ये सब अब सुनसान पड़े हैं।
- यहां 29 एमओडी में डेरा प्रमुख की 150 बीघा पैतृक जमीन है। यहां 50 बीघा जमीन इनकी खरीदी हुई है। 26 एमओडी में 30 बीघा जमीन है। 29 एमओडी में ही 50 बीघा जमीन अलग से है जो विवादित बताई जा रही है। इसके अलावा सूरांवाली बस स्टैंड के पास एक प्लॉट है। डेरे के सामने 25 एमओडी में भी दो भूखंड हैं। साथ ही गुरुसर मोडिया 30 एमओडी में 55 बीघा में स्टेडियम, 20 बीघा में स्कूल कॉलेज, 10 बीघा में डेयरी प्लांट और 10 बीघा में हॉस्पिटल है। 30 एमओडी में 25 बीघा जमीन हॉस्टल के लिए आरक्षित है। ढाई बीघा जमीन संगत के नाम आरक्षित है। कुल मिलाकर यहां 400 बीघा जमीन है जो मोटे अनुमान के अनुसार 28 करोड़ रुपए की है।

   

चूल्हे के पास बैठकर पटाखे बना रही थी लड़कियां, एक चिंगारी ने कर दिया ये हाल

सीकर. जिले के खंडेला कस्बे में बुधवार को तीन बच्चियां घर पर चूल्हे के पास बारूद से गोलियां बना रही थी। तभी अचानक ब्लास्ट हो गया। जिसमें दो मासूम बहनों की मौत हो गई और एक पड़ोसी की बेटी जख्मी हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चियां पैसा कमाने के लिए बारूद से पटाखे बना रही थीं। कंधे से हाथ और अंगुली तक अलग हो गई....
- पुलिस के मुताबिक, वार्ड 14 के रहने वाले लियाकत अली के घर शाम करीब छह बजे यह हादसा हुआ। लियाकत की पत्नी खुर्शीदा बानो चूल्हे के पास बैठकर खाना बना रही थीं। चूल्हे के दूसरी तरफ बेटी खुशबू बानो, आलिया और पड़ोसी रफीक की बेटी मुस्कान बैठी थी। तीनों बच्चियां बारूद से गाेलियां बना रही थी। तभी चूल्हे की आग से पास में रखे बारूद तक चिंगारी पहुंच गई और विस्फोट हो गया।
हादसे में 14 साल की खुशबू बानो और 2 साल की आलिया की मौके पर ही मौत हो गई। विस्फोट इतना तेज था कि खुशबू का कंधे से हाथ और अंगुली अलग हो गई। पड़ोसी रफीक की बेटी 15 साल की बेटी मुस्कान भी जख्मी हो गई।
दीवार पर फेंककर फोड़ने वाले पटाखे की गोलियां बना रही थीं
- लियाकत अली ने बताया कि राकेश भड़बूजा पटाखा सप्लाई का काम करता है। राकेश ने उनकी बेटियों को बारूद से गोली के रूप में पटाखे बनाने के लिए दिया था। 100 गोलियां बनाने पर राकेश पांच रुपए देता था।
- राकेश बारूद के साथ कपड़ा भी देता था। राकेश बच्चियों को कागज में बारूद देता था, लेकिन कपड़े में लेता था। बच्चियां बारूद की ढाई हजार गोलियां बना रही थी। यह सभी गोलियां एक साथ ही फट गई। इस वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया। हादसे की खबर मिलने पर पुलिस के अाला अफसरों समेत टीम मौके पर पहुंची।
- लियाकत ने आरोप लगाया कि राकेश के परिजन रामबाबू, राधेश्याम, मामराज और सत्यनारायण भी बच्चों से पटाखे बनवाने का काम करते हैं। पुलिस ने राधेश्याम को हिरासत में ले लिया, लेकिन बाकी आरोपी फरार हो गए। बच्चियां बारूद की गोलियां बनाकर कपड़े में दबाती थी। फिर गोलियां बनाती थी। उस पर चमकीली पन्नी लगाकर पटाखे बनाएं जाते थे। इन पटाखों को दीवार पर जोर से फेंकने पर गोलियां फट जाती हैं।
प्राइवेट स्कूल में पढ़ती थी बच्चियां
लियाकत अली की बेटी खुशबू खंडेला में प्राईवेट स्कूल में चौथी में पढ़ती थी। दूसरी बेटी आलिया का अभी स्कूल में एडमिशन नहीं कराया था। वहीं, रफीक की बेटी मुस्कान अपने ननिहाल चंवर के एक प्राइवेट स्कूल में नौंवी में पढ़ती है, जो अपने मां-बाप के पास आई हुई है।
दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
पुलिस ने बारूद सप्लायर राकेश भड़भूजा के साथ ही लियाकत अली के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि राकेश और उसके परिवार वाले बारूद कई लोगों को सप्लाई करते हैं। आरोपी राकेश बच्चियों से ढाई हजार गोलियां बनवा रहा था। वहीं, लियाकत अली के खिलाफ इसलिए मामला दर्ज किया गया क्योंकि माना जा रहा है कि इतनी छोटी बच्चियां खुद बारूद नहीं खरीद सकती। मुमकिन है कि पैसा कमाने के लालच में बारूद लियाकत ने खरीदा होगा।

   

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