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12 घंटे में 817 किमी जोधपुर के राइडर्स ने 8:45 घंटे में बिना रुके पूरा किया

जोधपुर.बाइक पर आबूरोड, पालनपुर होते हुए गुजरात में डीसा तक जाना, और फिर बिना रुके इसी रास्ते से जोधपुर वापस आना। 817 किमी की इस दूरी को हर हाल में 12 घंटे में पूरा करना। यूएस की लॉन्ग डिस्टेंस राइड की यह चुनौती पहली बार भारत में आई। इस सफर के दौरान केवल पेट्रोल भरवाने के लिए ही रुकने की शर्त। बीच में कोई गड़बड़ नहीं करे इसके लिए जीपीएस, गूगल मैप से रूट प्लान की ट्रेसिंग और पेट्रोल पंप के बिल से कंफर्मेशन। यूएस का यह चैलेंज जब भारत में आया तो जोधपुर किंग्स के 7 बाइक राइडर्स ने इसे स्वीकार किया। गुरुवार को सभी राइडर्स अपनी रॉयल इनफील्ड पर सुबह 6 बजे झालामंड से फर्राटे भरते रवाना हुए।
- यूएस की इस अत्यंत फेमस लॉन्ग डिस्टेंस राइड (एलडीआर) की चुनौती पूरी करने को रोहित चौधरी, महेश गहलोत, मदनसिंह दीवान, चंदरसिंह निर्वाण, संदीप सिकरवार, शैलेष शर्मा, मुकबेनसिंह लोटे ने हर टर्म-कंडीशन को पूरा किया।
- इतना ही नहीं निर्वाण एवं चौधरी ने तो यह चुनौती केवल 8:45 घंटे में ही पूरी कर ली। इस क्लब के हर सदस्य ने तय समय से काफी पहले यह दूरी तय की और शाम तक जोधपुर लौट भी आए। यह पहली बार हुआ कि एक साथ 7 राइडर्स ने यह चुनौती पूरी की।
- निर्वाण एवं चौधरी ने तकरीबन 93 किमी प्रतिघंटा की ऐवरेज स्पीड निकालकर यह चैलेंज पूरा किया। भारतीय सड़कों व ट्रैफिक में बाइक पर यह ऐवरेज स्पीड निकालना राइडर्स की कुशलता बताता है। करीब 9 घंटे तक यह स्पीड का ऐवरेज मेंटेन करना भी बहुत मुश्किल होता है।
रोड सेफ्टी का मैसेज भी दिया
इस राइड के दौरान सभी राइडर्स ने हेलमेट, नी-एल्बो गार्ड, राइडर जैकेट जैसे सेफ्टी मेजर्स से लेकर ट्रैफिक रूल तक हर चीज फॉलो की। सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना भी इस राइड का एक प्रमुख उद्देश्य था।

   

सुप्रीम कोर्ट : दहेज के मामलों में तत्काल गिरफ्तारी नहीं, 54 दिन बाद भी पुलिस अंजान

जयपुर. दहेज प्रताड़ना यानी आईपीसी की धारा 498-ए के तहत दर्ज मामलों में पति या ससुराल वालों की तत्काल गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को कहा था कि दहेज के मामलों को पहले जिला स्तर पर परिवार कल्याण कमेटियों के पास भेजा जाएगा। ये कमेटियां एक माह में रिपोर्ट देंगी, उसी आधार पर गिरफ्तारी होगी। आदेश के 54 दिन बाद भी पुलिस पुराने तरीके से ही काम कर रही है। थानों में पुलिस अफसरों को पता ही नहीं है कि करना क्या है। दरअसल, यह स्थिति पुलिस मुख्यालय की वजह से खड़ी हुई है। मुख्यालय से थानों को इन मामलों में कार्रवाई के नए दिशा-निर्देश अभी तक दिए ही नहीं गए हैं।
उधर, कोर्ट के आदेश पर राजस्थान स्टेट लीगल सर्विस ऑथोरिटी 35 ज्यूडिशियल जिलों में 103 कमेटियां गठित कर चुका है। इसकी जानकारी पुलिस को है। लेकिन, पुलिस मुख्यालय से यह आदेश पहुंचा नहीं है कि ऐसे मामलों में उन्हें करना क्या है।
राज्य पुलिस की अपराध शाखा के एडीजी पंकज कुमार सिंह का कहना है कि कमेटियों के गठन की जैसे ही सूचना आएगी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना में केसेज को वहां भेजना शुरू कर देंगे। उधर, गृह विभाग का कहना है कि एक-दो दिन में दिशा-निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।
498 ए : दहेज के 47% मामलों में एफआर
- दहेज के अधिकतर मामलों में 498 ए का गलत इस्तेमाल हो रहा है। 47% मामले एफआर के साथ बंद हो जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इसे देखते हुए 27 जुलाई को नए दिशा-निर्देश जारी किए।
- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर महिला जख्मी है या फिर प्रताड़ना की वजह से मृत्यु हो गई है तो फिर वह केस इस गाइडलाइन से बाहर होगा। गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं होगी।
कोई निर्देश नहीं मिले : थाना प्रभारी
भास्कर ने इस संबंध में जोधपुर में महिला थाना प्रभारी (पश्चिम) पाना चौधरी, महिला थाना प्रभारी (जोधपुर पूर्व) निशा भटनागर, उदयपुर महिला थाना प्रभारी चेतना भाटी एवं कोटा महिला थाना प्रभारी राम सिंह से बात की तो उन्होंने बताया कि मुख्यालय से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। हम ये केस कमेटियों को नहीं भेज रहे हैं। रालसा के सदस्य सचिव एस.के.जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एसएलपी (क्रिमिनल) नंबर-2013 ऑफ 2017 (राजेश शर्मा एवं अन्य बनाम स्टेट यूपी) में पारित आदेश की अनुपालना में प्रदेश के सभी जिलों में परिवार कल्याण कमेटियों का गठन किया गया है। 35 ज्यूडिशियल जिलों में 103 कमेटियों का गठन किया है। जयपुर में तीन कमेटियां बनाई गई हैं।

   

मंत्री ने मेयर से कहा- भरतपुर मेयर जैसे शहर साफ करवा दो, अपना चैंबर दे दूंगा

जयपुर.स्वच्छता मिशन को लेकर जयपुर की पांच सितारा होटल क्लार्क्स आमेर में सोमवार को आयोजित कार्यशाला के मंच पर यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी और जयपुर मेयर अशोक लाहोटी के बीच शब्दों के तीर भी चल गए। मंत्री कृपलानी ने कहा कि कुरता-पायजामा पहनने वाले भरतपुर के मेयर ने एक दिन में पूरा शहर साफ करवा दिया लेकिन पेंट-शर्ट पहनने वाले जयपुर के मेयर कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसके बाद कृपलानी ने जयपुर मेयर के चैंबर को लेकर भी ताना मारा। मंच पर ही उन्होंने एक पार्षद से पूछा, बताओ किसका चैंबर अच्छा है? इस पर तो पार्षद ने मेयर का नाम लिया। इसके बाद मेयर लाहोटी बोले- मेरा चैंबर अच्छा है तो आप इसमें बैठ जाओ और मुझे आपका चैंबर दे दो। जवाब में कृपलानी ने कहा कि मेरे चैंबर में बैठने के लिए मुझे 40 साल लग गए। तीन बार सांसद रह लिया। फिर भी आपको चैलेंज देता हूं कि स्वच्छता में जयपुर को पहले नंबर पर ले आओ तो मैं अपना चैंबर आपको दे दूंगा।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश के 500 शहरों (1 लाख और उससे अधिक आबादी वाले) में स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान प्रारम्भ होगा। प्रदेश के 29 शहर और 162 निकाय इसमें शामिल होंगे। स्वच्छता सर्वे में म्यूनिसिपल डाॅक्यूमेंटेशन के लिए 35 प्रतिशत, प्रत्यक्ष अवलोकन के लिए 30 प्रतिशत एवं नागरिक प्रतिक्रिया के लिए 35 प्रतिशत अंक दिए जाएंगे।

   

आज से डॉक्टर रेगुलर करेंगे काम, गिरफ्तारी हुई तो जारी रहेगी हड़ताल

जयपुर. अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ के आह्वान पर सोमवार को रखी गई एक दिन की हड़ताल समाप्त कर दी गई है। संघ के आह्वान पर मंगलवार सुबह 8 बजे से सभी सेवारत चिकित्सक काम पर लौट आएंगे। संघ के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने बताया कि कई साल से 33 मांगें नहीं मानने और सरकार द्वारा गुमराह करने के कारण हड़ताल की गई। यदि सरकार रेस्मा की धमकी देगी और डॉक्टर्स की गिरफ्तारी हुई तो मंगलवार को भी हड़ताल जारी रहेगी।

   

हादसा: महिलाओं ने ट्रक में ली थी लिफ्ट, क्रेन और कटर से केबिन काट निकाला

उदयपुर.नेशनल हाइवे आठ पर सोमवार रात दो ट्रकों की भिड़ंत में एक ट्रक में सवार दो महिलाओं की मौत हो गईं। दोनों महिलाएं ट्रक के केबिन में बुरी तरह फंस गई थीं। इन्हें बाहर निकालने के लिए चार क्रेन और कटर की मदद लेनी पड़ी। हादसे में छह महीने की दूधमुंही बच्ची, पति-पत्नी समेत पांच लोग जख्मी हो गए। केबिन के पतरे काट फंसे लोगों को बाहर निकाला गया...
- पुलिस के मुताबिक, घटना शाम साढ़े सात से पौने आठ बजे के बीच दिवेर थाना इलाके के छापली घाटे में मालजी का छपरा में हुई।
- मरने वाली दोनों महिलाएं और जख्मी हुए लोग दिवेर से सरिया लेकर अजमेर जा रहे इंद्र सिंह की ट्रक में बैठे थे। ड्राइवर ने इन्हें दिवेर तक की लिफ्ट दी थी, लेकिन रास्ते में ही ट्रक से जोरदार टक्कर में दोनों ट्रक के केबिन बुरी तरह पिचक गए।
- एक ट्रक में दो गंभीर जख्मी भी फंसे हुए थे। धमाका सुनकर आसपास के लोग हाइवे से गुजर रही गाड़ियों के ड्राइवर मौके पर पहुंचे। उसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची।
- इससे पहले लोगों ने केबिन में फंसे लोगों को बाहर निकालने की मशक्कत शुरू कर दी थी। पास के टोल नाके से क्रेन मंगवाई गई, लेकिन केबिनों को अलग नहीं कर पाने पर चार क्रेनों को मंगवाना पड़ा।
- उसके बाद गैस कटर लाकर लोगों की मदद से पुलिस ने केबिन में फंसे लोगों को बाहर निकालने केबिन के पतरे काटे। महिलाओं को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।
जख्मियों को आधा घंटे में बाहर निकाला जा सका
- हादसे में केबिन में फंसने से मरने वाली महिलाओं की देर रात तक शिनाख्त नहीं हो पाई। हादसे में छह महीने की दूधमुंही बच्ची भी गंभीर तौर पर जख्मी हो गई, जिसके माता-पिता का पता नहीं चल पाया है।
- हादसे में दिवेर निवासी बाबू सिंह (50), उसकी पत्नी आशादेवी (45), ट्रक ड्राइवर दिवेर सिंह की हालत नाजुक बताई जा रही है।
- एक महिला की शिनाख्त काछबली निवासी डाली पत्नी गिरधारीसिंह (45) के तौर पर की गई।
- पुलिस का कहना है कि हादसे के बाद जख्मियों को आधा घंटे में बाहर निकाला जा सका। पांचों जख्मी और दोनों महिलाएं एक गाड़ी में थे।
- इस दौरान हाइवे पर दोनों तरफ गाड़ियों की दो-दो किमी लंबी कतार लग गई। रात करीब 10 बजे हाइवे को एक तरफा चालू कर दिया। दोनों तरफा हाइवे रात सवा 10 बजे बाद सुचारू किया जा सका।

   

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