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3 दिन लड़कियों के हॉस्टल में छुपी हनीप्रीत, राम रहीम के लिए खास है ये जगह

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श्रीगंगानगर. सिरसा के डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत को 38 दिन में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में जिन-जिन भी लोगों ने शरण दी, अब हरियाणा पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई में जुट गई है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वो गुरसरमोडिया में लड़कियों के हॉस्टल में भी रही। जानें कहां-कहां रही हनीप्रीत...
- पुलिस सूत्रों के अनुसार हनीप्रीत ने शुरुआती पूछताछ में कबूल लिया है कि वो 38 दिन फरारी में श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिलों में छिपी थी।
- पंचकूला में दंगे होने के बाद हनीप्रीत पहले सिरसा डेरे में गई थी। वहां पुलिस की धरपकड़ होने के बाद वह हनुमानगढ़ में अपने भाई के ससुराल पहुंच गई।
- वहां पुलिस पहुंची, इससे पहले हनीप्रीत किशनपुरा उत्तरादा स्थित अपने एक समर्थक में छिपी। फिर वहां से निकलकर गुरुसरमोडिया पहुंच गई। वहां हनीप्रीत तीन दिन तक लड़कियों के हॉस्टल में छिपी रही। फिर वह बीकानेर चली गई।
- पुलिस की जांच में यह भी पता लगा है कि हनीप्रीत जहां भी छिपती, लंबे समय तक नहीं रुकती थी और इस दौरान वहां उसके खास स्थानीय डेरा समर्थक भी संपर्क में रहते थे। उल्लेखनीय है कि 25 अगस्त को पंचकूला में भड़की हिंसा के दर्ज मुकदमे में वांटेड थी।
पुलिस पूछ रही, रेड की जानकारी कहां से मिलती थी
- इस मामले में पुलिस को अपने स्टाफ पर भी शक है। इसलिए पुलिस हनीप्रीत से बार-बार पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पुलिस रेड का आखिर हनीप्रीत को पता कहां से लगता था। कौन उसे पुलिस की सूचनाएं देता था। पुलिस ने हनीप्रीत को पकड़ने के लिए बाड़मेर, हनुमानगढ़, गुरुसर मोडिया, उदयपुर, यूपी, दिल्ली, गुरुग्राम में छापे मारे थे, लेकिन हर जगह हनीप्रीत पहले ही गायब हो जाती थी।
राम रहीम का गांव है गुरसरमोडिया
बता दें कि गुरसरमोडिया राम रहीम का पैतृक गांव है। यहीं राम रहीम का जन्म हुआ था। आज इस गांव में सुख सुविधा की हर चीज मौजूद है। राम रहीम ने यहां न केवल स्कूल खोले हैं बल्कि अस्पताल भी खोले हैं। फिलहाल ये सब अब सुनसान पड़े हैं।
राम रहीम का गांव है गुरसरमोडिया
- बता दें कि गुरसरमोडिया राम रहीम का पैतृक गांव है। यहीं राम रहीम का जन्म हुआ था। आज इस गांव में सुख सुविधा की हर चीज मौजूद है। राम रहीम ने यहां न केवल स्कूल खोले हैं बल्कि अस्पताल भी खोले हैं। फिलहाल ये सब अब सुनसान पड़े हैं।
- यहां 29 एमओडी में डेरा प्रमुख की 150 बीघा पैतृक जमीन है। यहां 50 बीघा जमीन इनकी खरीदी हुई है। 26 एमओडी में 30 बीघा जमीन है। 29 एमओडी में ही 50 बीघा जमीन अलग से है जो विवादित बताई जा रही है। इसके अलावा सूरांवाली बस स्टैंड के पास एक प्लॉट है। डेरे के सामने 25 एमओडी में भी दो भूखंड हैं। साथ ही गुरुसर मोडिया 30 एमओडी में 55 बीघा में स्टेडियम, 20 बीघा में स्कूल कॉलेज, 10 बीघा में डेयरी प्लांट और 10 बीघा में हॉस्पिटल है। 30 एमओडी में 25 बीघा जमीन हॉस्टल के लिए आरक्षित है। ढाई बीघा जमीन संगत के नाम आरक्षित है। कुल मिलाकर यहां 400 बीघा जमीन है जो मोटे अनुमान के अनुसार 28 करोड़ रुपए की है।

 

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