You are here:

सुप्रीम कोर्ट ने एसबीसी आरक्षण पर केंद्र और राज्य से मांगा जवाब

E-mail Print PDF

जयपुर. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण अधिनियम-2008 की वैधता, एसबीसी (विशेष पिछड़ा वर्ग) को पांच प्रतिशत आरक्षण देने सहित ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट और मीणा जाति को जनजाति से बाहर करने व एससी/एसटी को क्रीमिलेयर में लाने की गुहार करने के मामले में केन्द्र व राज्य सरकार से जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने केन्द्र सरकार के जनजाति मंत्रालय सचिव, राष्ट्रीय जनजाति आयोग, राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख सामाजिक न्याय व अधिकारिता सचिव व डीओपी सचिव सहित ओबीसी आयोग को नोटिस जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश शुक्रवार को कैप्टेन गुरविन्दर सिंह व अन्य की एसएलपी पर दिया। एसएलपी में राजस्थान हाईकोर्ट के मई 2017 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें प्रार्थियों की 4 फरवरी, 2016 के आदेश को वापस लेने संबंधी अर्जी को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने 4 फरवरी के आदेश से प्रार्थियों की याचिकाओं को सारहीन मानते हुए यह कहकर खारिज कर दिया था कि अधिनियम-2008 नए अधिनियम 2015 से रिपील हो गया है। सरकार नया कानून ले आई है, ऐसे में याचिकाएं सारहीन हो गई हैं और चलने योग्य नहीं हैं।
प्रार्थियों ने एसएलपी में कहा कि याचिकाओं में विकास अध्ययन संस्था की रिपोर्ट को रद्द करने और अोबीसी आयोग की जस्टिस इसरानी की रिपोर्ट को रद्द करने सहित अन्य मुद्दों को भी चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए अन्य मुद्दों को तय किए बिना ही उन्हें सारहीन मानकर खारिज कर दिया जो गलत है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में मुकेश सोलंकी ने 2008 के अधिनियम को चुनौती दी थी जबकि कैप्टन गुरविन्दर सिंह ने एक्ट की वैधता के अलावा मीणा जाति को आरक्षण से बाहर करने की गुहार की थी।
हाईकोर्ट ने पूछा, चेयरमैन बताएं कैसे करेंगे रेट का संचालन
हाईकोर्ट ने रेट की कार्यशैली को चुनौती देने के मामले में रेट चेयरमैन को शपथ पत्र के जरिए यह बताने के लिए कहा है कि वे रेट का संचालन किस तरह करेंगे। साथ ही कोर्ट ने उनसे मौजूदा समय में रेट किस तरह काम कर रहा है यह भी बताने के लिए कहा है। न्यायाधीश एसपी शर्मा ने यह अंतरिम आदेश शिक्षा विभाग से रिटायर हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी खुबा राम सैनी की याचिका पर शुक्रवार को दिया।
महाधिवक्ता एनएम लोढ़ा ने कहा कि रेट का कामकाज उनका अांतरिक मामला है और न्यायिक कार्य है और राज्य सरकार उसमें दखल नहीं दे सकती। राज्य सरकार ने रेट मेें दो सदस्यों की नियुक्ति कर दी है और अब रेट में एक चेयरमैन व चार सदस्य हैं। रेट में अब दो बेंच गठित हो सकती हैं। अदालत ने पिछली सुनवाई पर सीएस को शपथ पत्र पेश कर पूछा था कि रेट के सही संचालन के लिए वे क्या कर रहे हैं।
इसके जवाब में महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार इसमें दखल नहीं दे सकती। अधिवक्ता हनुमान चौधरी ने बताया कि प्रार्थी का रिटायरमेंट 31 अगस्त को हुआ था और उसके खिलाफ रिकवरी का मामला रेट में लंबित है। लेकिन रेट मामलों की नियमित सुनवाई नहीं करता। ऐसे में रेट में मामला लंबित रहने का हवाला देकर पेंशन विभाग ने उसके सेवानिवृत परिलाभों को देने से मना कर दिया है। इसलिए रेट में लंबित उसके मामले को तय करवाया जाए।

 

aaj ki khaber

Epaper

राष्ट्रीय संस्करण

हरियाणा प्लस

सिरसा संस्करण

 


YOU ARE VISITOR NO.1785528

Site Designed by Manmohit Grover