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करवाचौथ पर आया शहीद पति का शव, पत्नी ने ऐसे तिलक लगा किया विदा

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झूंझुनू। अरुणाचल के तवांग के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर हादसे में झुंझुनूं जिले के कासनी गांव के शहीद हुए जवान सतीश खांडा का सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। करवाचौथ के दिन पति का शव पत्नी ने तिलक लगाकर विदा किया। शहीद की पत्नी शवयात्रा के दौरान बेटे को गोद में लिए आग-आगे चली। ढाई साल के बेटे मासूम हर्ष ने मुखाग्नि दी तो अंत्येष्टि स्थल पर मौजूद सभी की आंखें नम हो गई। कहा- बेटा अब तेरे पापा कभी नहीं आएंगे...
- एयरफोर्स में सार्जेंट सतीश अरुणाचल प्रदेश के पटोगर में तैनात थे। दो दिन पहले सेना की चौकियों पर केरोसीन की सप्लाई के दौरान उनका हेलीकॉप्टर क्रैश होने सात जवान शहीद हो गए थे। सतीश उनमें से एक था।
- सतीश की पार्थिव देह वायु सेना के फ्लाइंग ऑफिसर निखिल पंत लेकर आए। सतीश को अंतिम विदाई देने उमड़े ग्रामीणों ने सतीश अमर रहे, इंडियन एयरफोर्स जिंदाबाद, भारत माता के जयकारे लगाए। वायु सेना व पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
5 बहनों का इकलौता भाई था शहीद
- जब वायु सेना के जवान सतीश का शव लेकर उनके घर पंहुचे तो परिजनों में कोहराम मच गया। पत्नी किरण तो गुम-शुम सी हो गई। शहीद के शव को देखकर किरण ने फोटो पर तिलक लगाकर अपने बेटे से कहा, बेटा अब तेरे पापा कभी नहीं आएंगे।
- वृद्धा मां अंगूरी देवी व बहनों का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था। ग्रामीण व रिश्तेदार ढाढ़स बंधा रहे थे। ढाई साल का मासूम हर्ष कभी लोगों की ओर देखता तो कभी ताबूत की ओर निहारता जिसमें उसके पापा का शव लाया गया था। उसे तो इतनी भी समझ नहीं थी कि वह पूरा माजरा समझ पाता।
दीपावली पर आने वाला था
- रविवार को तिरंगे में लिपट कर आया सतीश दीपावली पर घर आने वाला था। उसने पांच अक्टूबर की शाम अपनी मां को फोन पर कहा था कि उसकी छुट्टी मंजूर हो गई है और वह दीपावली पर घर आएगा। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। पांच बहनों का इकलौता भाई सतीश दस साल पहले वायु सेना में भर्ती हुआ था।
पत्नी किरण हुई अंतिम यात्रा में शामिल
- जवान सतीश की अंतिम यात्रा में पत्नी किरण अपने बेटे को गोद में लेकर शामिल हुई। वायुसेना के जवान सतीश का शव लेकर घर पंहुचे तो किरण ने पति का चेहरा देखने की जिद की लेकिन हादसे में शव बुरी तरह जल जाने के कारण सेना के अधिकारियों ने ताबूत खोल कर शव दिखाना मुनासिब नहीं समझते हुए किरण व अन्य परिजनों को समझाया।
- इस पर किरण ने अंतिम यात्रा में शामिल होने का निर्णय लिया और मासूम बेटे हर्ष को गोद में लेकर अंतिम यात्रा के साथ अंत्येष्टि स्थल तक गई और जांबाज पति को अंतिम विदाई दी।

 

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