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प्रद्युम्न के दोस्तों ने बताया- टीचर ने हमसे धुलवाए खून से सने बैग-बोतल

गुड़गांव। रेयान इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या के बाद स्कूल टीचर्स की हरकतें सामने आने लगी है। दरअसल सात साल के प्रद्युम्न की हत्या के बाद दो बच्चों से जबरदस्ती उसकी खून से सनी बोतल धुलवाई गई थी। इस बात का खुलासा प्रद्युम्न के दोस्तों और उनके पैरेंट्स ने किया है। वहीं इस हत्याकांड से बच्चों और उनके पैरेंट्स के अंदर डर का माहौल बना हुआ है। बच्चे को दोस्त ने बताई ये बातें...
-प्रद्युम्न के दोस्त के मुताबिक हत्या के बाद उसका बैग, खून से सना हुआ था, जो बच्चों के बीच ही लाकर रख दिया था।
- बच्चे ने यह खुलासा भी किया कि जब मैं क्लास में आया तो उसका बैग और बॉटल खून से सना हुआ दिखा। एक लड़के से बोतल और बैग साफ कराया गया। एक लड़की से बैग से सारी बुक्स निकलवाई गई।
- प्रद्युम्न की क्लासमेट एक बच्ची के पिता के मुताबिक कि उनकी बेटी भी क्लास में बच्चे के खून से सने बैग और बोतल को देखकर सहम गई थी। स्कूल का एक भी टीचर उसका बैग छूने को तैयार नहीं थे। तभी जबरन टीचर्स ने उनकी बेटी से खून से सना बैग खोलकर उसकी बुक्स निकालने के लिए कहा था।
बच्चे के पिता ने किया जमानत का विरोध
- गुरुवार को कोर्ट ने स्कूल की के प्रिंसिपल और टीचर्स को भी पूछताछ के लिए बुलाया। इसके बाद कोर्ट ने ग्रुप के ट्रस्टीज की गिरफ्तार गुरुवार तक के लिए टाल दी थी।
- हालांकि, बच्चे के पिता ने ट्रस्टीज की इंटेरिम बेल पिटिशन का विरोध किया है। बता दें कि ग्रुप के सीईओ रेयान पिंटो, उनके माता-पिता ग्रेस पिटों और ऑगस्टाइन पिंटो ने गिरफ्तारी के डर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की पिटिशन लगाई है।
कोई सुराग नहीं छोड़ना चाहती SIT
- गुड़गांव पुलिस ने रेयान इंटरनेशनल स्कूल में बच्चे के मर्डर के मामले में मुख्य गवाह मानते हुए स्कूल के माली हरपाल सिंह को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी के सीनियर अफसरों का कहना है कि टीम छोटे से छोटा सुराग नहीं छोड़ना चाहती।
- ऑफिसर्स ने यह भी बताया कि चार्जशीट फाइल करने में 3 तीन दिन बचे हैं और इसी बीच पुलिस को स्कूल के ड्राइवर अशोक कुमार के खिलाफ अहम सबूत हाथ लगे हैं। टीम ने गुरुवार को स्कूल में सर्च भी किया।
- इसके अलावा सीबीएसई के पैनल ने भी रेयान इंटरनेशनल सेक्टर 31 एवं सेक्टर 40 ब्रांच की भी जांच किया। टीम ने सीसीटीवी कैमरे, टॉयलेट, सिक्योरिटी गार्ड, दाई और कर्मचारियों को पुलिस वेरिफिकेशन समेत अन्य की जानकारी ली है।
- इस पैनल ने सेक्शन इंचार्ज अंजु डुडेजा, सस्पेंड की जा चुकी कार्यकारी प्रिंसिपल नीरजा बत्रा, पूर्व प्रिंसिपल राखी वर्मा, बस ड्राइवर सौरभ राघव, बस के ठेकेदार हरकेश प्रधान और 8 सिक्यूरिटी गार्ड्स समेत कुल 17 लोगों से सवाल-जवाब किए।
- हालांकि मुख्य आरोपी कंडक्टर अशोक कुमार, एचआर हेड फ्रांसिस थॉमस और भोंडसी स्थित स्कूल कोऑर्डिनेटर समेत कई अौर लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामला क्या है?
- गुड़गांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में शुक्रवार को (8 सितंबर) को 7 साल के प्रद्युम्न का मर्डर कर दिया गया था। बॉडी टॉयलेट में मिली थी। इस मामले में पुलिस ने स्कूल बस के कंडक्टर अशोक कुमार को अरेस्ट किया था। आरोपी अशोक 8 महीने पहले ही स्कूल में कंडक्टर की नौकरी पर लगा था।
-अशोक ने मीडिया को बताया, ''मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। मैं बच्चों के टॉयलेट में था। वहां गलत काम कर रहा था। तभी वह बच्चा आ गया। उसने मुझे देख लिया। मैंने उसे पहले देखा धक्का दिया। फिर खींच लिया। वह शोर मचाने लगा तो मैं डर गया। फिर मैंने उसे दो बार चाकू से मारा। उसका गला रेत दिया।''

   

20 दिन बाद राम रहीम से मिलने पहुंची मां, 50 मिनट में कई बार रोया बाबा

रोहतक.साध्वी यौन शोषण केस में 20 साल की सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम से मिलने गुरुवार को उसकी मां नसीब कौर जेल पहुंचीं। नसीब के साथ उनका ड्राइवर इकबाल सिंह भी था। सूत्रों के मुताबिक, जेल में बंद राम रहीम मां को देखते ही रोने लगा। उसने मां से नजरें भी नहीं मिलाईं। नसीब कौर कुछ पॉली बैग लेकर जेल गई थीं। इनमें खाने-पीने का सामान था। नसीब कौर जिस गाड़ी से जेल पहुंचीं उस पर राजस्थान का नंबर था। जेल में एंट्री से पहले उनकी तलाशी ली गई। मां को देख रोने लगा राम रहीम...
- गुरमीत राम रहीम अपनी मां को देखकर रोने लगा। वह नजर नहीं मिला सका।
- नसीब कौर करीब 50 मिनट तक जेल में रहीं। इस दौरान कई बार मां-बेटा दोनों की भावुक हुए।
- जेल में जाते और लौटते वक्त मीडिया ने राम रहीम की मां से बातचीत की कोशिश की। हालांकि, उन्होंने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया और चुपचाप निकल गईं।
- बता दें कि राम रहीम से कोई फैमिली मेंबर अब तक मिलने नहीं पहुंचा था। जेल के नियम के मुताबिक- राम रहीम से मुलाकाती गुरुवार को ही मिल सकते हैं।
राम रहीम ने 10 लोगों से मिलने की जताई थी इच्छा
- बता दें कि गुरमीत राम रहीम ने मां नसीब कौर, बेटे जसमीत सिंह, बेटी चरणप्रीत, अमरप्रीत और हनीप्रीत, बहू हुस्नप्रीत, दामाद शान-ए-मीत और रूह-ए-मीत, डेरा मैनेजमेंट की अफसर विपसना और दान सिंह मिलने की इच्छा जताई थी।
राम रहीम को क्यों हुई सजा? क्या है मामला?
- दो रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को CBI की स्पेशल कोर्ट ने 28 अगस्त को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने राम रहीम पर कुल 30 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इसमें 15-15 लाख रुपए का जुर्माना दो रेप केस के लिए है। 14-14 लाख रुपए दोनों रेप विक्टिम साध्वियों को हर्जाने के रूप में देने होंगे।
हिंसा के बाद 38 लोगों की हुई थी मौत
- 25 अगस्त को सीबीआई कोर्ट ने पंचकूला में डेरा चीफ को दो रेप केस में दोषी करार दिया था। जैसे ही डेरा चीफ को कोर्ट ने दोषी करार दिया तो उनके समर्थक भड़क गए थे। उन्होंने पंजाब, हरियाणा के पंचकूला, सिरसा, कैथल, फतेहाबाद और पानीपत में तोड़फोड़ व आगजनी की थी। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग किया। इस पूरे घटनाक्रम में 38 लोगों की मौत हुई थी। 264 घायल हुए थे। हिंसा के बाद पुलिस ने 926 लोगों को गिरफ्तार किया था।

   

जनसभा का टेंट उखाड़ आयोजकों से मारपीट, MP सैनी को तीन घंटे पुलिस लाइन में रखा

कैथल.गांव सेरधा में भाजपा सांसद राजकुमार सैनी की जनसभा से कुछ घंटे पहले गांव के ही कुछ युवकों ने टैंट उखाड़ फेंका। इससे पैदा हुए तनाव के बाद प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी। टेंट उखाड़ने की सूचना के बाद भी सांसद जनसभा करने पर अडिग रहे और काफिले के साथ बढ़ने लगे। धारा टूटने का हवाला देकर पुलिस प्रशासन ने आयोजन स्थल से करीब 15 किलोमीटर पहले पूंडरी के पाई चौक पर सांसद व उनके समर्थकों को रोक लिया और बाद में करीब तीन घंटे तक यहां रखा। इस बीच लोकतंत्र सुरक्षा मंच के बैनर तले किया कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।
सांसद सैनी का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में रखा। हालांकि डीसी सुनीता वर्मा की ओर से स्पष्ट किया कि सांसद को हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि तनावपूर्ण स्थिति देखते हुए उनसे आयोजन स्थल पर न जाने का आग्रह किया था। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया। करीब 11 हजार की आबादी वाले गांव में 54 फीसदी जाट समुदाय के लोग हैं। जनसभा का आयोजन सांसद समर्थक राजेश कश्यप ने पिछड़ा वर्ग समाज की ओर से किया था। राजेश कश्यप के मुताबिक वह अपने साथियों के साथ जनसभा की तैयारियां कर रहे थे। गुरुवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे 50-60 युवाओं ने पहुंचकर टेंट के पर्दों काे फाड़ दिया, पाइपों को गिरा दिया और वहां रखे सामान को उठाकर ले गए। देर शाम तक इस संबंध में पुलिस को शिकायत नहीं दी गई थी। हंगामे में भाजपा राजौंद मंडल अध्यक्ष राकेश राणा को एक पत्थर भी लगा। कई और युवाओं को भी हल्की चोटें आईं। मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने सूचना कंट्रोल रूम में दी। इसके बाद डीसी सुनीता वर्मा, एसपी सुमेर प्रताप मौके पर पहुंचे। जिले के 10 थानों के प्रभारी समेत करीब 600 पुलिस जवान सेरधा पहुंचे।
सड़क किनारे डटे रहे सांसद विरोधी तो धारा 144 लगाई
भारी पुलिस बल के बाद युवक सड़क किनारे खड़े रहे। मौके से जाने की गुहार के बाद भी वहां से नहीं हटे तो करीब 12 बजे डीसी के आदेश पर गांव में धारा-144 लागू कर दी। एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह को पूंडरी रेस्ट हाउस में भेजकर सांसद को गांव में न आने की विनती की। सांसद सैनी सभा में जाने की बात पर अड़े रहे और साढ़े 12 बजे रेस्ट हाउस से सेरधा के लिए निकले। पाई रोड पर डीसीपी गुहला सुलतान सिंह ने रोक लिया और कैथल पुलिस लाइन में ले गए। उनके साथ चल रहे 200 समर्थक भी पुलिस लाइन में पहुंचे। शाम करीब चार बजे कार्यक्रम रद्द की सूचना के बाद युवकों ने अपने मोर्चे को खत्म किया। उधर, पुलिस ने सांसद सैनी को पुलिस लाइन से सिक्योरिटी के बीच रवाना किया।
सांसद और डीसी के अपने-अपने तर्क
दबंग सड़क पर डटे रहे तो हमारे लिए ही धारा 144 क्यों : सांसद
कार्यकर्ताओं ने जनसभा का कार्यक्रम लिया हुआ था। पुलिस ने मुझे रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया। गांव सेरधा में धारा-144 केवल हमारे लिए थी। दबंग सुबह से शाम तक सड़क पर डटे रहे। प्रशासन पूरी तरह से मूकदर्शक बना रहा। एक सप्ताह बाद फिर सेरधा में जनसभा करुंगा।
-राजकुमार सैनी, सांसद कुरुक्षेत्र लोकसभा।
सांसद को डिटेन नहीं किया, बल्कि प्रार्थना की थी : डीसी
सेरधा में तनाव को देखते हुए सांसद को सभा स्थल पर न आने बारे प्रार्थना की गई थी। प्रशासन द्वारा सांसद को गिरफ्तार व डिटेन करना निराधार हैं। जिला प्रशासन का उद्देश्य गांव में शांति व्यवस्था कायम रखना था।
-सुनीता वर्मा, डीसी कैथल।

   

CNG किट वाली कार में लगी आग, जिंदा जले एक ही गांव के रहने वाले 3 युवक

गुड़गांव। गुड़गांव में शुक्रवार को एक भयानक सड़क हादसे में तीन युवकों के जिंदा जल जाने की खबर है। तीनों एक ही गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। हादसा उस वक्त हुआ, जब गांव पलड़ा निवासी ये तीनों युवक एक कार में कहीं जा रहे थे। अचानक गांव उल्लावास के पास कार में लगी सीएनजी किट में आग लग गई। इसके बाद देखते ही देखते तीनों कार में ही जिंदा जल गए।

   

हरियाणा में जाट समेत 6 जातियों के आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला आज

पानीपत. हरियाणा में जाटों सहित 6 जातियों को पिछड़े वर्ग के तहत दिए गए आरक्षण के फायदे पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट शुक्रवार को अपना फैसला देगा। जस्टिस एसएस सारों जस्टिस लीजा गिल की बेंच अपना फैसला देगी। राज्य सरकार ने जाटों समेत 6 जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग की कैटेगरी में लाते हुए 10% आरक्षण दिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 6 मार्च को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा गया था। पुलिस व प्रशासन अलर्ट...
- राज्य के होम सेक्रेटरी रामनिवास ने अफसरों की मीटिंग लेकर लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति की समीक्षा की। फैसले को लेकर पुलिस और प्रशासन अलर्ट है।
- सीएम मनोहर लाल खट्टर ने रामनिवास और डीजीपी बीएस संधू से सुरक्षा बंदोबस्त की जानकारी ली।
- जस्टिस सारों 3 सितंबर को रिटायर होने जा रहे हैं। ऐसे में उनका यह फैसला रिटायरमेंट से ठीक पहले दिया जा रहा है।
पिटीशनर और सरकार ने क्या कहा?
- पिटीशनर की तरफ से हाईकोर्ट में हरियाणा शिक्षा विभाग के आंकड़े कोर्ट में पेश करते हुए कहा गया कि अलग-अलग पदों पर जाटों का रिप्रेजेंटेशन 30 से 56% है।
- हरियाणा सरकार की तरफ से कहा गया कि पिटीशनर के आंकड़े गलत हैं। जाति के आधार पर कोई आंकड़े नहीं है। ऐसे में पिटीशनर ने यह डाटा खुद ही तैयार किया है।
- बेंच ने कहा कि यह संभव नहीं है कि इतने बड़े स्तर पर आंकड़े खुद तैयार किए जाएं। सरकार के पास यह आंकड़े जरूर होंगे।
क्या है सरकार का दावा?
- हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट में दावा किया कि जाट पिछड़े हैं, इसलिए आरक्षण देने का फैसला लिया गया।
- राज्य सरकार ने पिटीशनर के उन दावों को गलत बताया जिसमें जाटों के पिछड़ा होने की बात कही गई है। दूसरी तरफ पिटीशनर की तरफ से सरकार के ही आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि जाट पिछड़ी जाति में नहीं है। वे सरकारी नौकरियों और क्लास वन पदों पर काबिज है। ऐसे में सरकार गलत जानकारी दे रही है।
- हरियाणा सरकार का कहना है कि जाट ओबीसी में आते हैं और इस संबंध में पिटीशनर के दिए गए आंकड़े गलत हैं जिनमें जाटों को पिछड़ा मानने से इनकार करते हुए सरकारी नौकरियों और क्लास वन अफसर के पदों पर उनका ज्यादा रिप्रेजेंटेशन होने की बात कही गई।

   

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