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1700 से 3200 तक पहुंचे भाव, 7 लाख किसानों को 450 करोड़ का लाभ

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कैथल.पूसा बासमती-1509। धान की वही वैरायटी, जिसने दो साल पहले सरकार की नींद हराम कर दी थी। दाम गिरने से किसान सड़कों पर थे, जाम लगाकर प्रदर्शन हो रहा था, कोई खेतों में धान जला रहा था तो कोई मंडियों में छोड़कर जा रहा था। तब सरकार झुकी और 1509 का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1550 रुपए तय किया। इस पर भी किसानों की कमाई 70 प्रतिशत तक घट गई थी। लेकिन इस बार इसी 1509 ने किसानों को दिवाली धमाका ऑफर दिया है। ईरान में डिमांड बढ़ने और एक्सपोर्टर्स के पास स्टॉक न होने के कारण 1509 की डिमांड बढ़ गई है।
तीन साल बाद 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं। पिछले साल यह धान 1800 रुपए तक में बिकी थी, उससे पहले इसकी कीमत 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक रह गई थी। इस बार औसतन 1500 रुपए प्रति क्विंटल का फायदा हो रहा है। इस हिसाब से 7 लाख किसानों को एक लाख हेक्टेयर में बोई गई इस धान से करीब 450 करोड़ रुपए का लाभ होने जा रहा है। हालांकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार रकबा कुछ कम है।
प्रदेश में इस बार 12 लाख 87 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई की हुई है। लगभग छह लाख हेक्टेयर में बासमती धान की की रोपाई की हुई है। पिछले साल साढ़े सात लाख हेक्टेरयर में बासमती की रोपाई की हुई थी, इस बार डेढ़ लाख हेक्टेयर कम एरिया में बासमती की रोपाई की हुई है। जिसमें एक लाख हेक्टेयर में 1509 है। ज्यादातर 1121 की रोपाई की हुई है। सुपर बासमती भी कम है। इसलिए इस बार एक्सपोर्टर्स ज्यादा भाव में बासमती धान की खरीद कर रहे हैं। करनाल, तरावड़ी, निसिंग, कैथल, पूंडरी मतलोडा, टोहना , रतिया व ढांड की मंडियों में अच्छा भाव मिल रहा है।
वर्ष 2015 मेंं खरीदनी पड़ी थी समर्थन मूल्य पर, इस बार भाव मिल रहा है 3200 रुपए प्रति क्विंटल
बासमती धान का एरिया पिछले साल साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, इस बार छह लाख रह गया
25 हजार टन बासमती धान का उत्पादन हर साल हरियाणा में होता है, देश-विदेश में 40 हजार करोड़ का कारोबार
दिवाली धमाका: विदेशों में बढ़ी मांग, एक्सपोर्ट्स के स्टॉक नहीं - इसलिए बढ़े भाव
वैट हटा, डिमांड बढ़ी: राइस एक्सपोर्टर्स के पास बासमती और 1509 के चावल का पुराना स्टॉक नहीं है। इसलिए वह ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। डिमांड पूरी करने के लिए एक्सपोर्टर्स किसानों को अच्छा भाव दे रहे हैं। चावल से वैट हटा दिया है।
ईरान का बाजार खुला : वर्ष 2013-14 में ईरान ने भारत से 14,40,445 टन बासमती खरीदा था। ईरान की मांग को देखते हुए एक्सपोर्टर्स ने 2014-15 में ओवर स्टॉक कर लिया था। लेकिन वहां मांग घट गई थी। अब फिर बाजार खुला है।
समझिए... 450 करोड़ की आय का गणित
बासमती धान का एरिया पिछले साल साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, इस बार छह लाख रह गया है। इसमें भी 1121 किस्म ज्यादा है। सुपर बासमती व 1509 कम है। 1509 इस बार करीब 1 लाख हेक्टेयर में बोई गई है। प्रति हेक्टेयर तीन क्विंटल का उत्पादन हो रहा है। इस हिसाब से तीन लाख क्विंटल 1509 बासमती धान का उत्पादन होगा। औसतन किसानों को 1500 रुपए प्रतिक्विंटल अतिरिक्त मिल रहे हैं। जो करीब 450 करोड़ होंगें।
वर्ष 2015 में प्रदेश के 7 लाख धान उत्पादक किसानों ने 2.5 लाख हेक्टेयर में 1509 की रोपाई की थी। मगर इस बार एक रकबा घटकर करीब एक लाख हेक्टेयर रह गया है। इसमें प्रति एकड़ लागत करीब 30 हजार रुपए आती है। पिछले दो साल से ईरान से ज्यादा डिमांड न होने के कारण मिलर्स को समय से भुगतान नहीं हो पाया। इस कारण किसानों का भी पैसा फंसा हुआ था। इस बार भुगतान हो रहा है।
ये बड़े उत्पादक जिले
करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अम्बाला, पानीपत, यमुनानगर, जींद, सोनीपत, फतेहाबाद, सिरसा और पंचकूला में धान का उत्पादन होता है। इन जिलों में 12 लाख हेक्टेयर में धान का उत्पादन किया जाता है। 7 लाख हेक्टेयर मेें बासमती का उत्पादन किया जाता है। इनमें मुच्छल, पूसा आदि शामिल हैं।
बाहर भी मिलेगा अच्छा रेट
^ इस बार डिमांड अच्छी है। बारीक धान का एरिया कम है, इसलिए एक्सपोर्टर्स किसानों को अच्छा भाव दे रहे हैं। बाहर भी बारीक धान का रेट इस बार अच्छा मिलने की उम्मीद है। किसान व एक्सपोर्टर्स के लिए अच्छी बात है।
- विजय सेतिया, ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स के पूर्व प्रधान।

 

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