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प्रेग्नेंट महिलाओं की 6344 फेक रजिस्ट्रेशन पर कर दी 19 लाख रुपये की पेमेंट

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जालंधर.सेहत महकमे के रिकॉर्ड से 6344 प्रेग्नेंट महिलाएं गायब हो गई हैं। रजिस्टर्ड 100 प्रेग्नेंट महिलाओं में से मात्र 52 की ही डिलिवरी हो रही है। डिपार्टमेंट के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो जालंधर में अप्रैल से जुलाई 2017 तक 13,212 प्रेग्नेंट महिलाओं ने प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में रजिस्ट्रेशन कराई, जिनकी डिलिवरी इस दौरान होनी थी। मात्र 6868 महिलाओं की ही प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों व घरों में डिलिवरी हुई। 48 प्रतिशत महिलाओं ने कहां डिलिवरी करवाई किसी को पता नहीं।
जिला सेहत एवं परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. गुरमीत कौर दुग्गल ने बताया कि ‘यह साल के मध्य का आंकड़ा है। पिछले साल भी ऐसा आंकड़ा आया था, लेकिन साल के अंत तक डिलिवरी प्रतिशत 91 तक पहुंच गया था। गैप मात्र 09 प्रतिशत का रह गया था। साल के अंत तक उन्होंेने ये नहीं बताया कि साल के मध्य में रजिस्ट्रेशन और डिलिवरीज में इतना गैप क्यों है? जबकि डायरेक्टर हेल्थ सर्विसिस डॉ. राजीव भल्ला इन आंकड़ों को ही गलत बता चुके हैं। रजिस्ट्रेशन-चेकअप के लिए आशा वर्करों को तीन सौ से चार सौ रुपए देती है सरकार
इंसेटिव के कारण बढ़ा दी जाती हैं महिलाएं
आंकड़ों में अगर गड़बड़ी सामने आ रही है तो बड़ा कारण आशा वर्करों को मिलने वाला इंसेंटिव है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत प्रेग्नेंट महिलाओं की रजिस्ट्रेशन पर सेहत विभाग 50 रुपए देता है। इसके बाद होने वाले तीन चेकअप के 50 रुपए मिलते हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रेग्नेंट महिला के चेकअप पर ग्रामीण इलाकों में 300 और शहरी इलाके में 200 रुपए मिलते हैं। जालंधर में डिलिवरी और रजिस्ट्रेशन में लगभग 44 प्रतिशत का फासला है। 6369 महिलाओं की डिलिवरी नहीं हुई है। अगर सिर्फ रजिसट्रेशन और चेकअप वाले इंसेंटिव को भी जोड़ लिया जाए तो 300 रुपए प्रति प्रेग्नेंट के हिसाब से लगभग 19 लाख रुपये बनेगा। पंजाब में डिलिवरीज और रजिस्ट्रेशन का गैप 68715 है। 300 के हिसाब से खर्च 2 करोड़ बनता है।
एक नजर इधर भी...
सभी होम डिलिवरीज रिपोर्ट नहीं होतीं मगर छह हजार की फिगर बहुत बड़ी
सेहत विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कई महिलाओं की डिलिवरी घरों में हो जाती है। इलाके की आशा वर्कर और एएनएम उन डिलिवरीज के बारे किसी को जानकारी नहीं देतीं, क्योंकि उनसे पूछताछ भी होती है कि आपके इलाके में होम डिलिवरी कैसे हो गई। अपनी परफॉर्मेंस और रिकॉर्ड खराब होने के डर से आशा वर्कर और एएनएम उन डिलिवरीज को छिपा कर रखती हैं। इसके बावजूद जिले में 6000 से ज्यादा प्रेग्नेंट महिलाओं का गायब होना सेहत विभाग में बड़े पैमाने पर फर्जी आंकड़ों की रिपोर्टिंग साबित करता है।

 

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