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AUSvsPAK : पाकिस्तान की करारी हार, यूनुस खान 10 हजार रन से चूके, ऑस्ट्रेलिया ने सीरीज में 3-0 से किया क्लीन स्वीप

नई दिल्ली: ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में पाकिस्तान की करारी हार हुई. ऑस्ट्रेलिया ने 3-0 से क्लीन स्वीप किया. सिडनी में खेले गए तीसरे और अंतिम टेस्ट में भी ऑस्ट्रेलिया ने उसे बुरी तरह हराया. पांचवें और अंतिम दिन पाकिस्तान की टीम 465 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 244 रन पर ही सिमट गई और उसे 220 रनों से हार का सामना करना पड़ा. सरफराज अहमद 72 रन बनाकर नाबाद लौटे. ऑस्ट्रेलिया की ओर से जॉश हेजलवुड और स्टीव ओ कीफे ने तीन-तीन विकेट लिए, जबकि नैथन लियोन ने दो और मिचेल स्टार्क ने एक विकेट लिया. पाकिस्तान की ओर से पहली पारी में नाबाद 175 रन बनाने वाले यूनुस खान टेस्ट में 10000 रनों का आंकड़ा छूने से 23 रन से वंचित रह गए. यूनुस ने दूसरी पारी में 13 रन बनाए, वहीं ऑस्ट्रेलिया की ओर से डेविड वॉर्नर ने टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे तेज फिफ्टी बनाई. उन्होंने 23 गेंदों में यह कारनामा किया.
पहले टेस्ट के अलावा पाक टीम नहीं कर पाई संघर्ष
पाकिस्तान की टीम ने पहले टेस्ट में ब्रिसबेन में खेले गए पहले टेस्ट मैच में संघर्ष का जो जज्बा दिखाया था, वह बाकी के दो टेस्ट मैचों में नहीं दिखा. मेलबर्न में खेले गए दूसरे टेस्ट में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों पारी और 18 रन से हार झेलनी पड़ी, जबकि सिडनी में तीसरे टेस्ट में वह 220 रनों से हारी और सीरीज 3-0 से गंवा दी.
सिडनी टेस्ट में पाकिस्तान ने मैच के अंतिम दिन एक विकेट पर 55 रन के स्कोर से आगे खेलना शुरू किया. शुक्रवार के नाबाद बल्लेबाज अजहर अली से बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह अपने चौथे दिन के स्कोर में कोई रन जोड़े बिना ही पैवेलियन लौट गए. उनको जॉश हेजलवुड ने रिटर्न कैच लेकर चलता किया. इसके बाद स्कोर में 12 रन ही जुड़े थे कि पाकिस्तान के मोस्ट टैलेंटेड बल्लेबाज माने जाने वाले बाबर आजम ने भी निराश किया और 9 रन पर हेजलवुड की गेंद पर ही पगबाधा हो गए. इसके बाद उसके तीन विकेट जल्दी-जल्दी गिर गए. कप्तान मिस्बाह उल हक ने ब्रिसबेन टेस्ट के हीरो रहे असद शफीक के साथ 40 रनों की साझेदारी की और फिर सरफराज अहमद के साथ 52 रन जोड़े, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल पाए. शफीक ने 30 रन बनाए, तो मिस्बाह ने 38 रन जोड़े. सरफराज ने अंतिम तक मोर्चा संभाले रखा, लेकिन उनका किसी ने साथ नहीं दिया और पाक टीम 244 रन पर ऑलआउट हो गई. सरफराज 72 रन पर नाबाद लौटे. पाकिस्तान ने शुक्रवार को शुरुआत तो अच्छी की थी, लेकिन ओपनर शर्जील खान ने आक्रामक बैटिंग के चक्कर में विकेट फेंक दिया. उन्होंने 38 गेंदों में 40 रन बनाए.
ऑस्ट्रेलिया ने चौथे दिन रखा था विशाल लक्ष्य
ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दूसरी पारी दो विकेट पर 241 रन बनाकर घोषित कर दी थी, जिसमें पहली पारी के शतकवीर ओपनर डेविड वॉर्नर के तूफानी 55 रन के साथ ही उस्मान ख्वाजा और स्टीव स्मिथ की फिफ्टी का भी अहम योगदान रहा. ऑस्ट्रेलिया को कुल 465 रन की बढ़त हासिल हुई. गौरतलब है कि उसे पहली पारी में 224 रनों की बढ़त मिली थी, क्योंकि पाकिस्तान की टीम पहली पारी में 315 रन पर ही सिमट गई थी. ऑस्‍ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी 8 विकेट पर 538 रन बनाने के बाद घोषित की थी.    
पाकिस्तान ने चौथे दिन अपनी पारी को 8 विकेट पर 271 रन से आगे बढ़ाया. शतकवीर यूनुस खान ने तीसरे दिन की तरह ही जमकर बल्लेबाजी की और पाक टीम को संकट से उबारने की भरपूर कोशिश की. यासिर शाह ने उनका साथ दिया और 51 रनों की साझेदारी की. यासिर ने 10 रन ही बनाए थे कि उन्हें जॉश हेजलवुड ने स्टीव स्मिथ के हाथों कैच करा दिया. पाकिस्तान का नौवां विकेट 315 रन पर गिरा. इसके बाद आए इमरान खान भी इसी स्कोर पर चलते बने और पाक टीम 315 रनों पर ही सिमट गई. यूनुस खान 175 रनों पर नाबाद लौटे. यूनुस ने 314 गेंदों का सामना किया और 17 चौके व तीन छक्के लगाए. पाकिस्तान की टीम पहली पारी के आधार पर 224 रन से पीछे रह गई.
वॉर्नर ने जड़ी दूसरी सबसे तेज फिफ्टी
इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने विशाल बढ़त के साथ आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की. उनका उद्देश्य एकदम साफ था. वह पाकिस्तान को जल्दी से जल्दी बड़ा लक्ष्य देने चाहते थे, ताकि मैच का परिणाम निकल सके. हुआ भी कुछ ऐसा ही और डेविड वॉर्नर ने महज 27 गेंदों में 55 रनों की तूफानी पारी खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया को वांछित शुरुआत दिला दी. वॉर्नर ने आठ चौके और तीन छक्के जड़े. उन्होंने 23 गेंदों में टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी फिफ्टी बनाई. उनसे पहले पाक के मिस्बाह उल हक हैं, जिन्होंने 21 गेंदों में फिफ्टी बनाई थी. वॉर्नर के साथी ओपनर उस्मान ख्वाजा भी पीछे नहीं रहे और 98 गेंदों में 79 रनों की नाबाद पारी खेली. वॉर्नर के आउट होने पर आए कप्तान स्टीव स्मिथ ने भी वनडे जैसी पारी खेली और 43 गेंदों में 59 रन (8 चौके, 1 छक्का) ठोक दिए, जबकि पीटर हैंड्सकॉम्ब ने 25 गेंदों में 40 रन जड़े. फिर दो विकेट पर 241 के स्कोर पर ऑस्ट्रेलिया ने पारी घोषित कर दी. पाकिस्तान की ओर से वहाब रियाज और यासिर शाह ने एक-एक विकेट लिया.
 जवाब में पाकिस्तान ने शुरुआत तो अच्छी की, लेकिन ओपनर शर्जील खान ने आक्रामक बैटिंग के चक्कर में विकेट फेंक दिया. उन्होंने 38 गेंदों में 40 रन बनाए. चौथे दिन का खेल खत्म होने तक पाकिस्तान ने एक विकेट पर 55 रन बना लिए. अजहर अली (11) और यासिर शाह (3) नाबाद लौटे थे.

   

क्या किसी दबाव में कप्तानी छोड़ने को मजबूर हुए धोनी? रिजाइन मेल में लिखा- विराट का मेंटर बनने के लिए राजी हूं

स्पोर्ट्स डेस्क. एमएस धोनी ने अचानक ही वनडे और टी20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला क्यों लिया, ये सवाल क्रिकेट एक्सपर्ट्स से लेकर उनके फैन्स तक के मन में है। 4 जनवरी की शाम धोनी ने BCCI को ई-मेल भेजकर कप्तानी से रिजाइन किया। उसमें जो लिखा था, उससे अब ये बात सामने आ रही है कि धोनी ने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि किसी के कहने पर कप्तानी से हटने का फैसला लिया।धोनी ने लिखा, ‘विराट का मेंटर बनने को राजी हूं...’
- धोनी का रिजाइन मेल कुछ इस तरह था, "मैं भारत के वनडे कप्तान के पद से अपना इस्तीफा देता हूं और विराट कोहली का मेंटर बनने के लिए राजी हूं।"
- धोनी के मेल की आखिरी लाइन इस बात की ओर इशारा करती है कि उन्होंने अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि किसी के कहने पर कप्तानी छोड़ी, क्योंकि उन्होंने मेल में लिखा कि वो विराट कोहली को मेंटर करने, उन्हें गाइड करने के लिए राजी हैं। इसका मतलब कि उन्होंने किसी की बात पर अपनी रजामंदी दी है।
क्या 2019 वर्ल्ड कप है धोनी का टारगेट?
- कहा जा रहा है कि धोनी ने 2019 में इंग्लैड में होने वाले अगले वनडे वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए ये बड़ा फैसला लिया।
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धोनी की चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद से 4 जनवरी की शाम कई बार बात हुई।
- कप्तानी छोड़ने का ई-मेल करने के बाद उन्होंने BCCI के सीईओ राहुल जौहरी से भी लंबी बातचीत की। इसी दौरान उन्होंने 2019 वर्ल्ड कप तक वनडे टीम में रहने की इच्छा जताई।
- धोनी ने उनसे कहा कि वो टीम में बदलाव के लिए तैयार हैं। साथ ही, विराट कोहली और टीम को भी इंग्लैंड में होने वाले इस बड़े टूर्नामेंट के लिए तैयार करेंगे।
- इस दौरान उन्होंने तीनों फॉर्मेट में एक ही कप्तान होने की बात की भी पैरवी की। धोनी ने माना की अब टीम इंडिया उनके नहीं, बल्कि विराट के इर्द-गिर्द घूमती है।
- बता दें कि कप्तानी के अलावा धोनी की बैटिंग भी पिछले कुछ समय में फीकी रही है। वहीं, विराट बतौर कप्तान और बैट्समैन काफी ऊपर उठ चुके हैं।
- ऐसे में, धोनी को टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए ज्यादा फोकस बैटिंग पर करना होगा और विराट के मेंटर की भूमिका निभानी होगी।
बेस्ट फिनिशर पर भी उठ रहे थे सवाल ?
- धोनी क्रिकेट वर्ल्ड के बेस्ट फिनिशर हैं और कई मौकों पर उन्होंने इसे साबित भी किया, लेकिन पिछले कुछ मैचों में वो टीम को अहम मौकों पर जीत नहीं दिला सके।
- यूएस में वेस्ट इंडीज के खिलाफ हुए टी20 मैच में ड्वेन ब्रावो ने उन्हें विनिंग रन नहीं बनाने दिया था। इसके पहले जिम्बाब्वे के खिलाफ एक टी20 मैच में भी धोनी आखिरी ओवर में 8 रन नहीं बना सके थे।
- 2015 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब अफ्रीकी बॉलर कैगिसो रबाडा ने धोनी को आखिरी ओवर में 11 रन बनाने से रोक दिया था और भारत 5 रन से मैच हार गया था।
हर क्रिकेट प्रेमी की तरफ से धोनी को शुक्रिया- BCCI
- धोनी के कप्तानी छोड़ते ही बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने कहा था, "देश के हर क्रिकेट प्रेमी और बीसीसीआई की तरफ में मैं धोनी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।"
- "उन्होंने कैप्टन के रूप में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शानदार परफॉर्मेंस दी है। उनकी लीडरशिप में टीम इंडिया ने नई ऊंचाइयों को छुआ और उनके अचीवमेंट दशकों तक इंडियन क्रिकेट में याद किए जाएंगे।"
- पूर्व क्रिकेटर दीप दासगुप्ता ने कहा था, "ये अचानक और चौंकाने वाला फैसला है। धोनी ने हमेशा टीम को अपने से पहले रखा।"

   

धोनी के कप्तानी छोड़ते ही युवी की वापसी, सोशल मीडिया पर आए ये कमेंट्स

स्पोर्ट्स डेस्क. धोनी के टीम इंडिया की कप्तानी छोड़ते ही युवराज सिंह की वनडे और टी-20 टीम में वापसी ने सोशल मीडिया में तूफान मचा दिया है। युवराज और धोनी के फैन्स के बीच अब ट्वीट वॉर छिड़ चुका है पर ज्यादातर लोग इसे इसी नजरिए से देख रहे हैं कि धोनी के टीम इंडिया की कप्तानी से हटते ही युवराज सिंह का रास्ता अब बिलकुल साफ हो गया है। सोशल मीडिया पर आए ऐसे मजेदार कमेंट्स...
- एक पेज ने लिखा, 'धोनी ने कप्तानी छोड़ी, और अब युवराज सिंह टीम में। सबकुछ आपस में जुड़ा है'। युवराज इंग्लैंड के खिलाफ वनडे और टी-20 टीम में शामिल।

   

सचिन तेंदुलकर सहित दिग्गजों ने एमएस धोनी के कप्तानी करियर की प्रशंसा की...

नई दिल्‍ली : खेल जगत ने महेंद्र सिंह धोनी को उनकी शानदार कप्तानी करियर के लिए बधाई दी और दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कहा, 'यह दिन उनके सफल करियर का जश्न मनाने और फैसले का सम्मान करने का है'.
देश के सबसे सफल कप्तान धोनी ने बुधवार को भारत के सीमित ओवरों के कप्तान का पद छोड़कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया. इस प्रकार उनका शानदार नेतृत्व का दौर समाप्त हुआ. धोनी के नेतृत्व में ही भारत ने दो विश्व कप और एक चैंपियंस ट्रॉफी जीती. तेंदुलकर ने अपने बधाई संदेश में कहा कि 'धोनी को टी-20 और वनडे विश्वकपों में सफलता हासिल कराने वाले भारत के कप्तान के रूप में शानदार करियर की बधाई. मैंने उन्‍हें आक्रामक खिलाड़ी से सटीक एवं निर्णायक कप्तान के रूप में उभरते देखा है. यह उनकी सफल कप्तानी का जश्न मनाने और उनके फैसले का सम्मान करने का दिन है'.

   

महेंद्र सिंह धोनी के भारतीय वन-डे और टी-20 टीम की कप्तानी छोड़ने के पीछे बड़ी वजह यह रही...

नई दिल्ली: टीम इंडिया के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टी-20 और एकदिवसीय मैचों की कप्तानी छोड़ दी है. अब इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली एकदिवसीय और टी-20 सीरीज के लिए नए कप्तान का ऐलान होगा. महेंद्र सिंह धोनी ने भारत की तरफ से 199 एकदिवसीय मैचों में कप्तानी की, जिसमें भारत को 110 मैचों में जीत मिली और भारत 74 मैच हारा.  कप्तान के रूप में धोनी का व्‍यक्तिगत प्रदर्शन भी शानदार रहा. कप्तान के रूप में 199 मैच खेलते हुए धोनी ने करीब 54 के औसत से 6,633 रन बनाए, जिसमें छह शतक और 47 अर्धशतक शामिल हैं.
वर्ल्ड कप के बाद एकदिवसीय मैचों में धोनी की कप्तानी में भारत का खराब प्रदर्शन : अगर टी-20 मैचों की बात जाए तो धोनी दुनिया के सबसे सफल टी-20 कप्तान हैं. धोनी की कप्तानी में भारत ने 72 टी-20 मैच खेले और 41 मैचों में जीत मिली, जबकि भारत 28 मैच हारा. कप्तान के रूप में धोनी ने 73 मैचों में करीब 36 के औसत से 1112 रन बनाए.  2015 में खेले गए आईसीसी वर्ल्ड कप में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत अच्छा प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल तक पहुंचा था, लेकिन वर्ल्ड कप के बाद धोनी की कप्तानी में भारत का प्रदर्शन एकदिवसीय मैचों में कुछ खास नहीं रहा. 2015 में बांग्लादेश में बांग्लादेश के खिलाफ हुई तीन मैचों की एकदिवसीय सीरीज को भारत 2-1 से हार गया था. साउथ अफ्रीका के खिलाफ हुई 5 मैचों की एकदिवसीय सीरीज को भारत 3-2 से हार गया था. सबसे बड़ी बात थी कि भारत के घरेलू मैदान पर साउथ अफ्रीका ने उसे हराया था. जनवरी 2016 में धोनी की कप्तानी में भारत ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था और वह 5 मैचों की एकदिवसीय सीरीज को 4-1 से हार गया था.
धोनी के मुकाबले विराट कोहली का शानदार प्रदर्शन : एक तरफ धोनी कप्तान के रूप में फ्लॉप हो रहे थे तो दूसरे तरफ विराट कोहली के शानदार प्रदर्शन के वजह से धोनी के ऊपर कहीं न कहीं दवाब था. विराट कोहली की कप्तानी में भारत टेस्ट मैचों में शानदार प्रदर्शन कर रहा है. खिलाड़ी के रूप में कोहली टेस्ट, एकदिवसीय और टी-20 मैचों में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. ऐसे में सिर्फ धोनी ही नहीं, बीसीसीआई पर भी दवाब था.
फिनिशर के रूप में धोनी पिछले कुछ मैचों में फ़ेल हो रहे थे : महेंद्र सिंह धोनी ने एक फिनिशर के रूप में नाम कमाया. कई मैचों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को जीत दिलवाई, जिनमें वर्ल्ड कप के फाइनल में शानदार प्रदर्शन शामिल है, लेकिन पिछले कुछ मैचों में धोनी का प्रदर्शन इतना अच्छा नहीं था. एक फिनिशर के रूप में भी धोनी फ्लॉप हो रहे थे.
न्यूजीलैंड के खिलाफ दिल्ली में खेले गए दूसरे वन-डे मैच के दौरान टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी जब बल्लेबाजी कर रहे थे, तब मैच भारत के हाथ में था. यह उम्मीद की जा रही थी कि धोनी अपने दम पर मैच जीता लेंगे, लेकिन धोनी ने 65 गेंदों का सामना करते हुए सिर्फ 39 रन बनाए और आखिरकार भारत यह मैच 6 रन से हार गया. सबसे बड़ी बात यह थी कि धोनी का हल्‍के तरीके से आउट होना. सिर्फ यह मैच नहीं, कई ऐसे मैच हैं, जिनमें धोनी की ख़राब बल्लेबाजी की वजह से भारत मैच हारा है. 11 अक्टूबर 2015 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ हुए पहले वन-डे मैच में धोनी का प्रदर्शन कुछ ख़ास नहीं था. धोनी जब बल्लेबाजी करने आए तब भारत को आखिरी 60 गेंदों में 90 रन की जरूरत थी, सो यह उम्मीद की जा रही थी कि धोनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए भारत को जीत दिलाएंगे. लेकिन धोनी काफी स्लो खेले. पहले दस रन बनाने के लिए धोनी ने 17 गेंदों का सहारा लिया था. धोनी ने इस मैच में 30 गेंदों का सामना करते हुए 31 बनाए थे और भारत पांच रन से मैच हार गया था.
सिर्फ इतना नहीं 18 अक्टूबर 2015 को राजकोट के मैदान पर भारत और साउथ अफ्रीका के बीच हुए वनडे मैच में धोनी का प्रदर्शन काफी खराब था. दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 270 रन बनाए थे. चौथे स्थान पर बल्लेबाजी करने आए धोनी ने काफी धीमी पारी खेली. धोनी ने 61 गेंदों सामना करते हुए सिर्फ 47 रन बनाए और भारत इस मैच को 23 रन से हार गया.
इससे पहले भी कुछ मैचों में फिनिशर के रूप में धोनी का प्रदर्शन खराब रहा है. टी-20 में भी फिनिशर के रूप में धोनी विफल हो रहे हैं. 18 जून 2016 को ज़िम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी-20 मैच में धोनी ने 17 गेंदों का सामना करते हुए 19 रन बनाए थे और भारत इस मैच को सिर्फ दो रन से हार गया था. आईपीएल मैच के दौरान भी धोनी ने कुछ धीमी पारियां खेली थीं, जिसकी वजह से उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा था.
हर मैच में शानदार खेलते हुए टीम को जीत दिलाना किसी भी खिलाड़ी के लिए संभव नहीं है, लेकिन धोनी के अंदर आत्मविश्वास की कमी दिखाई देने लगी है. अब जब धोनी बल्लेबाजी करते हैं तो ऐसा लगता है कि वह काफी दवाब में खेल रहे हैं. हो सकता है कि इस दवाब की वजह धोनी विफल हो रहे हैं.

   

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