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सानिया मिर्जा-माटेक की जोड़ी पहले दौर में हारी

कार्ल्सबेड (अमेरिका), 17 जुलाई। ओलंपिक की तैयारियों में जुटी सानिया मिर्जा को निराशा हाथ लगी जब वह और उनकी अमेरिकी जोड़ीदार बेथानी माटेक सैंड्स आज यहां डब्ल्यूटीए प्रीमियर टेनिस टूर्नामेंट के पहले दौर में ही हारकर बाहर हो गई। भारत और अमेरिका की गैरवरीय जोड़ी को 740000 डालर इनामी हार्ड कोर्ट प्रतियोगिता के कड़े मुकाबले में हाओ चिंग चैन और यंग जान चैन की जोड़ी के हाथों एक घंटे और 56 मिनट में 7– 5, 4–6, 5–10 से शिकस्त का सामना करना पड़ा। सानिया और माटेक के लिए मुकाबला काफी उतारा चढ़ाव भरा रहा। पहले सेट में 2–4 से पिछड़ने के बावजूद यह जोड़ी इस सेट को जीतने में सफल रही। चीनी ताइपे की जोड़ी ने हालांकि दूसरा सेट जीतकर मुकाबला बराबर कर दिया और फिर मैच टाईब्रेकर में बाजी मारते हुए दूसरे दौर में जगह बनाई। ओलंपिक से पहले यह सानिया का अंतिम टूर्नामेंट था क्योंकि उन्हें 23 जुलाई को लंदन पहुंचना है।

   

नरेन ने दिलाई वेस्टइंडीज को न्यूजीलैंड पर जीत

बासेटेरे, 17 जुलाई। स्पिनर सुनील नरेन की बेहतरीन गेंदबाजी के दम पर वेस्टइंडीज ने पांचवें और आखिरी एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में आज न्यूजीलैंड को 20 रन से हरा दिया। नरेन ने 28 रन देकर पांच विकेट लिये। वेस्टइंडीज के 241 रन के जवाब में न्यूजीलैंड टीम 221 रन पर आउट हो गई। वेस्टइंडीज ने यह श्रृंखला 4–1 से जीत ली। अनुभवी हरफनमौला जैकब ओरम के बगैर उतरी कीवी टीम में कई अनुभवी खिलाड़ी चोट के कारण नहीं थे। कीवी टीम के लिये सर्वाधिक 69 रन केन विलियमसन ने बनाये। नरेन की गेंद पर क्रिस गेल ने मिडविकेट में उसका दर्शनीय कैच लपका। वेस्टइंडीज के तीन विकेट 37 रन पर गिर गए थे जिसके बाद मलरेन सैमुअल्स और ड्वेन ब्रावो ने 60 रन की साझेदारी की। सैमुअल्स ने 43 और ब्रावो ने 53 रन बनाये। आंद्रे रसेल 59 रन बनाकर नाबाद रहे।

   

सिक्किम की महिला फुटबालर सैफ ट्रेनिंग शिविर में

नई दिल्ली, 17 जुलाई। सिक्किम की महिला फुटबालर निमा लहामू भूटिया को आगामी दक्षिण एशियाई फुटबाल फेडरेशन (सैफ) कप के लिये भारतीय कोचिंग शिविर में चुना गया है। सैफ कप श्रीलंका में पहली सितंबर से शुरू होगा। निमा कुछ वर्षोंं से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। पश्चिम सिक्किम के मंगलबारिया में महिला फुटबाल अकादमी की यह स्ट्राइकर पहले ही विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल टूर्नामेंट में राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह बांग्लादेश के ढाका में अंडर 19 एएफसी कप में भारत के लिये खेल चुकी हैं। उन्होंने 2011 में बाहरीन के खिलाफ प्रदर्शनी मैच में सीनियर राष्ट्रीय टीम में आगाज किया था।

   

अपने अंतिम ओलंपिक में योगेश्वर की नजरें स्वर्ण पर

नई दिल्ली, 17 जुलाई। बीजिंग ओलंपिक में पदक से चूकने वाले भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त अपना कैरियर खत्म होने से पहले ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के अपने सपने को साकार करना चाहते हैं। योगेश्वर का मानना है कि संभवत: यह उनका अंतिम ओलंपिक होगा और वह प्रतिबद्ध हैं कि खेलों के महाकुंभ में तीसरी बार हिस्सा लेते हुए वह वांछित नतीजा हासिल करने में सफल रहेंगे। यह भारतीय पहलवान बीजिंग 2008 खेलों में भी कांस्य पदक जीतने के करीब पहुंचा था लेकिन अहम मुकाबले में अंतिम 10 सेकेंड में हार गया।
योगेश्वर ने यहां साइ केंद्र में प्रेट्र से कहा, ‘‘ओलंपिक खेल हर साल नहीं होते, यह प्रत्येक चार साल में होते हैं और मैं भाग्यशाली हूं कि भगवान ने मुझे तीसरी बार इन खेलों में हिस्सा लेने का मौका दिया। मुझे नहीं पता कि मैं अगले ओलंपिक में खेलूंगा या नहीं, मैं सिर्फ अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं और इसे अपना अंतिम मौका मान रहा हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस बार अपने देश के लिए कुछ लाना चाहता हूं। मैं अपने वर्ग को स्वर्ण पदक को लक्ष्य बनाकर चल रहा हूं। सुशील ने पिछली बार पदक जीता था, इस बार मैं पदक लाना चाहता हूं। भविष्य की पीढ़ी अच्छा प्रदर्शन कर रही है और ऐसे में यह संभवत: मेरा अंतिम ओलंपिक होगा। संन्यास लेने से पहले स्वर्ण पदक जीतने से मुझे सुंतष्टि मिलेगी।’’

   

भारत की लंदन ओलंपिक खेलों में होगी अग्निपरीक्षा

नई दिल्ली, 17 जुलाई। खेलों की महाशक्ति के रूप में उभरते भारत की असली परीक्षा लंदन में होगी जब 81 खिलाड़ी यह साबित करने उतरेंगे कि बीजिंग में मिले तीन पदक तुक्का नहीं थे बल्कि उनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतरीन प्रदर्शन की लियाकत है। ओलंपिक में खानापूर्ति के लिये भाग लेने से लेकर पदक के दावेदार के रूप में उभरे भारत ने लंबा सफर तय किया है। चार साल पहले बीजिंग में भारत ने एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक जीतकर देश में खेलों की तस्वीर बदल दी थी। पेईचिंग के तीनों महानायकों ने लंदन के लिये भी क्वालीफाई किया है। स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की नजरें फिर पीले तमगे पर होगी जबकि कांसा जीतने वाले सुशील कुमार (कुश्ती) और विजेंदर सिंह (मुक्केबाजी) पदक का रंग बदलने की फिराक में होंगे। एक अरब की आबादी वाले भारत की खेलों के क्षेत्र में क्षमता के बारे में हर ओलंपिक से पहले बात होती आई है लेकिन पहली बार चर्चा यह हो रही है कितने पदक मिलेंगे। 27 जुलाई से शुरू हो रहे 30 खेलों के इस महासमर में निशानेबाजों, मुक्केबाजों, तीरंदाजों, बैडमिंटन खिलाड़ियों और पहलवानों से पदक की उम्मीद है। टेनिस टीम भी चयन विवाद को पीछे छोड़कर पदक जीत सकती है। भारतीय खिलाड़ियों को इस बार सुविधाओं और विदेश में अभ्यास में किसी अभाव का सामना नहीं करना पड़ा। अधिकांश खिलाड़ी तो अनुकूलन के लिये काफी पहले ही लंदन जा चुके हैं।

   

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