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अमेरिकी फुटबाल टूर्नामेंट के दौरान फायरिंग, तीन मरे

डोवेर (अमेरिकी), 10 जुलाई। डेलावेयर में सप्ताहांत फुटबाल टूर्नामेंट के दौरान गोलियां चलाने वाले हमलावरों ने संभवत: टूर्नामेंट के आयोजकों को निशाना बनाया था। इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि दो लोग घायल हो गए थे। मृतकों में टूर्नामेंट का आयोजक, टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहा एक 16 वर्षीय लड़का और तीन संदिग्धों में से एक व्यक्ति शामिल है। तीन संदिग्ध लोगों ने रविवार दोपहर विलमिंगटन के समीप पार्क में इस हिंसक घटना को अंजाम दिया। अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए दो संदिग्ध में से एक के खिलाफ 2008 में भी हत्या का आरोप लगा था। पुलिस ने कल कहा कि इस घटना के दौरान दर्शकों में से भी एक या इससे अधिक लोगों ने हमलावरों पर गोलियां चलाई थी।

   

ओलंपिक के बाद पद छोड़ेंगे मुक्केबाजी कोच संधू

नई दिल्ली , 10 जुलाई। लगभग दो दशक तक राष्ट्रीय कोच रहने के बाद गुरबक्श सिंह संधू लंदन ओलंपिक खेलों के बाद पद छोड़ देंगे और वह चाहते हैं कि विदाई तोहफे के रूप में उनका शिष्य विजेंदर सिंह उन्हें चार साल पहले पेईचिंग में जीते कांस्य पदक से बेहतर पदक लाकर दे। संधू के कार्यकाल के दौरान ही भारत को विजेंदर के रूप में पहला ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज मिला था। वर्ष 1993 में सीनियर राष्ट्रीय कोच नियुक्त हुए संधू ने कहा कि इस बार ओलंपिक में हिस्सा ले रही सात मुक्केबाजों की भारतीय टीम अगर पेईचिंग के एक कांस्य पदक के अपने प्रदर्शन में सुधार करती है तो वह संतुष्ट होकर अपने पद को अलविदा कहेंगे। संधू ने कहा, ‘‘मैं वैसे भी अगले साल एनआईएस कोच के पद से सेवानिवृत्त हो जाता क्योंकि मेरी उम्र 60 बरस हो जाएगी। लेकिन वैसे भी मैं लंदन से आगे अपने पद पर नहीं बना रहना चाहता था। उम्मीद है कि इस बार प्रदर्शन पिछली बार से बेहतर रहेगा। मैंने अपने कैरियर का पूरा लुत्फ उठाया और मैं काफी संतुष्ट इंसान हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस साल भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के भी चुनाव होने हैं और यह उनका फैसला होगा कि मैं राष्ट्रीय कोच बना रहूं या नहीं लेकिन निजी तौर पर मैं लंदन खेलों के बाद अपना पद छोड़ना चाहता हूं। वर्ष 1978 में पहली बार कोचिंग की जिम्मेदारी संभालने वाले संधू ने भारतीय मुक्केबाजी में काफी उतार चढ़ाव देखे और देश में इस खेल ने जिस तरह तरक्की की उससे वह भी कभी कभी हैरान हो जाते हैं। संधू ने कहा, ‘‘एक समय ऐसा था जब लड़कों के पास साइकिल भी नहीं होती थी लेकिन आज वे विदेशी कारों में घूमते हैं। इस बदलाव को देखकर मुझे काफी खुशी होती है। ये लड़के पदक ही नहीं जीत रहे बल्कि वित्तीय तौर पर अपने भविष्य को भी सुरक्षित कर रहे हैं जिसका मतलब है कि यह खेल यहां से आगे ही बढ़ेगा।’’ संधू ने कहा कि मुक्केबाजी में हाल में मिली सफलता उनके और सहायक कोचों जयदेव बिष्ट, सी कुटप्पा और रामानंद तथा क्यूबा के कोच बीआई फर्नांडिज और सहायक स्टाफ के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है।

   

हम खाली हाथ नहीं लौटेंगे: विजेंदर सिंह

पटियाला , 10 जुलाई। पेईचिंग ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज विजेंदर सिंह ने आश्वासन दिया है कि भारतीय मुक्केबाजों की टीम आगामी लंदन ओलंपिक से खाली हाथ नहीं लौटेगी। उन्होंने कहा कि अपनी संभावनाओं को लेकर टीम काफी सकारात्मक है। विजेंदर ने कहा, ‘‘हम सकारात्मक नजरिये के साथ जा रहे हैं और मैं आपको आश्वस्त कर दूं कि हम खाली हाथ नहीं लौटेंगे।’’ यहां राष्ट्रीय खेल संस्थान द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में विजेंदर ने कहा, ‘‘ओलंपिक में प्रदर्शन को लेकर हम काफी सकारात्मक हैं और हमारी काफी उम्मीदे हैं।’’ विजेंदर ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि हम एक से अधिक पदक जीतेंगे क्योंकि हमारे देश ने हमें काफी कुछ दिया है और अब हमारा इसे वापस देने का समय है।’’ भारोत्तोलक रवि कुमार ने भी कहा कि वह इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहते। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान दे रहा हूं। भारतीय पुरुष भारोत्तोलकों को 12 बरस के बाद यह मौका मिला है और मैं इसे बर्बाद नहीं करना चाहता।’रवि ने कहा, ‘‘यह तथ्य है कि मैं अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहता हूं। मैं फिलहाल 360 किग्रा वजन उठा रहा हूं और अगर लंदन में 365 किग्रा वजन उठाने में सफल रहा तो पदक मिल सकता है। मुझे अपने प्रदर्शन में सुधार करने की उम्मीद है।’’ इस मौके पर मुक्केबाज जय भगवान, एल देवेंद्रो, मनोज कुमार, शिव थापा, सुमित सांगवान और कोच गुरबक्श सिंह संधू और बीआई फर्नांडिज मौजूद थे। रवि कुमार के साथ सोनिया चानू और कोच हंसा शर्मा और बीडी शर्मा ने समारोह में शिरकत की। मुक्केबाज विकास कृष्णन निजी कारणों से समारोह में हिस्सा नहीं ले पाए।

   

वनडे में वापसी पर विचार कर सकते हैं पीटरसन

लंदन, 10 जुलाई। स्टार बल्लेबाज केविन पीटरसन ने कहा है कि सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बावजूद वह इंग्लैंड की ओर से ‘सफेद गेंद’ का क्रिकेट खेल सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका में जन्में इस बल्लेबाज ने ‘डेली मेल’ से कहा, ‘‘मेरी पत्नी, मां, पिता, सास, भाइयों और मेरे घनिष्ठ मित्रों सभी ने मुझसे कहा कि क्या तुम नहीं चाहते कि आस्ट्रेलिया के खिलाफ :मौजूदा वनडे श्रृंखला में: मैदान पर उतरकर बल्लेबाजी करो।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और मैंने उनसे कहा कि मुझे इसकी बिलकुल भी कमी नहीं खली। लेकिन संभवत: मुझे ब्रेक की जरूरत थी। पिछले सात साल में मैंने काफी क्रिकेट खेला है।’ यह पूछने पर कि क्या वह सीमित ओवरों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के फैसले पर पुनर्विचार करेंगे, 32 वर्षीय पीटरसन ने कहा, ‘‘कभी नहीं मत बोलो। कुछ साल पहले के मुकाबले अब मैं अधिक उम्रदराज और अधिक परिपक्व हो गया हूं, इसलिए आप कुछ नहीं कह सकते कि क्या होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुछ भी हो सकता है। मैं कभी इनकार नहीं करता लेकिन मेरी वापसी के लिए जरूरी होगा कि कार्यक्रम में आमूलचूल बदलाव हो। अब इंतजार करते हैं और देखते हैं।’’

   

अमित कुमार को ओलंपिक से खासी उम्मीदें

नयी दिल्ली 
9 जुलाई 2012

भले ही उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अधिक अनुभव ना हो लेकिन भारतीय कुश्ती दल के सबसे युवा पहलवान अमित कुमार का मानना है कि नये होने का फायदा उसे लंदन ओलंपिक में मिल सकता है। अमित ने प्रेस ट्रस्ट से कहा ,‘‘ मैने सीनियर स्तर पर थोड़े समय पहले ही खेलना शुरू किया है। कई प्रतिद्वंद्वियों के लिये मैं बिल्कुल नया हूं। वे मेरे खिलाफ रणनीति नहीं बना सकेंगे क्योंकि मेरे मुकाबलों के ज्यादा वीडियो उपलब्ध नहीं है। इसका फायदा मुझे लंदन में मिल सकता है।’’55 किलोवर्ग के इस पहलवान ने अस्ताना में एशियाई क्वालीफाइंग टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीतकर सभी को चौका दिया था। उसने कहा ,‘‘ मैने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी ओलंपिक खेलने का मौका मिलेगा। मैने अपनी नजरें 2016 ओलंपिक पर लगा रखी थी लेकिन अब मैं ओलंपिक में जा रहा हूं तो इस मौके को नहीं गंवाउंगा।’’ उन्नीस बरस के अमित ने कहा ,‘‘ ओलंपिक में एक पदक किसी की भी जिंदगी बदल सकता है और मुझे पता है कि लंदन में पदक जीतने के क्या मायने हैं।’’ अमित इस समय सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, नरसिंह यादव और गीता फोगट के साथ अमेरिका के कोलोरेडो स्प्रिंग्स में अभ्यास कर रहा है।

   

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