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विलियम्स बहनों ने पांचवां विंबलडन युगल खिताब जीता

लंदन। सेरेना विलियम्स ने अपनी बहन वीनस के साथ मिलकर विंबलडन टेनिस चैम्पियनशिप का पांचवां महिला युगल खिताब जीता। सेरेना के लिए शनिवार का दिन काफी शानदार रहा और उन्होंने महिला एकल का खिताब भी अपने नाम किया। विलियम्स बहनों ने आंद्रिया हलावाचकोवा और लूसी हरादेका की चेक गणराज्य की छठी वरीय जोड़ी को 7–5, 6–4 से हराकर अपना 13वां ग्रैंडस्लैम युगल खिताब जीता। इससे पहले सेरेना ने पोलैंड की एग्निएज्का रदवांस्का को 6–1, 5–7, 6–2 से हराकर आल इंग्लैंड क्लब पर अपना पांचवां महिला एकल और कुल 14वां ग्रैंडस्लैम एकल खिताब जीता। सेरेना और वीनस की जोड़ी ने अब तक पांच विंबलडन, चार आस्ट्रेलियाई ओपन, दो अमेरिकी ओपन और दो फ्रेंच ओपन युगल खिताब जीते हैं।

   

वाह क्या बात! सचिन पहुंचे देखने मैच... एक ही दिन में हो गए दो चमत्कार

लंदन. तूफानी फॉर्म में खेल रहे रिकॉर्ड 16 बार के ग्रैंडस्लैम और छह बार के विंबलडन चैंपियन स्विट्जरलैंड के रोजर फेडरर और ब्रिटेन की उम्मीद एंडी मरे के बीच विंबलडन का खिताबी मुकाबला खेला जाएगा। फेडरर ने विश्व के नंबर एक खिलाड़ी और गत चैंपियन सर्बिया के नोवाक जोकोविक को 6-3, 3-6, 6-4, 6-3 से तथा एंडी मरे ने फ्रांस के विल्फ्रेड सोंगा को 6-3, 6-4, 3-6, 7-5 से हराकर विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप के पुरुष सिंगल्स के फाइनल में प्रवेश किया। आठवीं बार फाइनल में पहुंचे फेडरर ने दो घंटे 19 मिनट में जीत दर्ज की। अब वे अमेरिका के पीट सैंप्रास के सात विंबलडन खिताबों के रिकॉर्ड की बराबरी करने से सिर्फ एक कदम की दूरी पर खड़े हैं।

   

सचिन ने तोड़ी चुप्पी, खोला श्रीलंका नहीं जाने का 'राज'

नई दिल्ली. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के श्रीलंका दौरे से नाम वापस लिए जाने के बाद उनके इस फॉर्मेट से हटने की अटकलों पर विराम लगाते हुए इस दिग्गज बल्लेबाज ने कहा है कि जब उन्हें लगेगा तभी वह वनडे से हटेंगे। गत वर्ष विश्वकप के बाद से सचिन ने केवल दो वनडे सीरीज में ही हिस्सा लिया है। सचिन ने इस महीने के अंत में श्रीलंका दौरे पर जा रही भारतीय टीम का हिस्सा नहीं बनने का निर्णय किया है। ऐसे में उनके वनडे मैचों के प्रारूप को छोडऩे की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि 39 वर्षीय मास्टर ब्लास्टर ने इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा, मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई क्या सोचता है। मेरे लिए जरूरी है कि मैं क्या सोचता हूं। जब तक मैं इस खेल का मजा लेता रहूंगा और जब तक मुझे लगेगा कि मैं टीम का हिस्सा बना रह सकता हूं मैं इसे नहीं छोड़ूंगा। एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में सचिन ने कहा, वर्ष 2007 में मुझे लगा कि मेरे ट्वेंटी 20 का हिस्सा होने की जरूरत नहीं है। मुझे लगातार टीम में बने रहने के लिए कहा गया, लेकिन मुझे लगा कि टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही है तो मैंने खुद ही ट्वेंटी 20 टीम का हिस्सा नहीं बनने का निर्णय कर लिया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें ऐसा एहसास होगा कि अब वनडे टीम में भी उनकी जरूरत नहीं है तभी वे इस प्रारूप को छोडऩे के बारे में कोई निर्णय करेंगे। सचिन ने कहा कि वे अब कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताना चाहते हैं इसलिए उन्होंने श्रीलंका दौरे का हिस्सा नहीं बनने का निर्णय किया है। मास्टर ब्लास्टर ने कहा, मैं अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताना चाहता हूं। सिर्फ इतनी ही वजह है कि मैं श्रीलंका दौरे का हिस्सा नहीं हूं। मैंने बीसीसीआई को पत्र लिखकर इस दौरे से बाहर रखने का निवेदन किया था। मैं जब दौरे से वापस आता तो बच्चे अपने स्कूल में व्यस्त हो जाते। ऐसे में मैं अपने बच्चों के साथ कुछ समय बिताना चाहता हूं। 

   

सानिया के दर्द पर भावुक हुईं ज्वाला, जाहिर किए जज्बात

नई दिल्ली. टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन के रवैये पर नाराजगी व्यक्त किया है। सानिया के समर्थन में बैडमिंटन सुंदरी ज्वाला गुट्टा भी उतरी हैं। उन्होंने ने मिर्जा के बयान को सही ठहराते हुए कहा कि संघ हमेशा पक्षपात करते हैं।गुट्टा ने कहा, "आईटा को पहले सानिया से संपर्क करना चाहिए था। उनसे बातचीत के बाद ही ओलिंपिक में जोड़ीदार का चयन किया जाना चाहिए था। संघ ने इसके स्थान पर खुद से ही फैसला लेना उचित समझा। इससे न सिर्फ खेल की छवि खराब हुई है, बल्कि देश में खेल प्रबंधन के सिस्टम पर भी प्रश्न चिह्न लग गया है।"गुट्टा ने बताया कि उन्हें भी बैडमिंटन संघ के ऐसे पुरुषवादी फैसलों का शिकार होना पड़ा है। उन्होंने कहा, "यही कारण है कि लड़कियां खेल को अपना करियर चुनने से कतराती हैं। यहां सिर्फ पुरुषों के लिए फायदेमंद निर्णय ही लिए जाते हैं।"
ज्वाला गुट्टा साइना नेहवाल के साथ लंदन ओलिंपिक में खेलेंगी।

   

सचिन ने खेल छोड़ कर चुना यूरोप में छुट्टियां मनाने का विकल्‍प

नई दिल्ली. सचिन तेंडुलकर ने श्रीलंका में होने वाली वनडे सीरीज़ से अपना नाम क्यों वापस ले लिया? इस सवाल का जवाब सामने आ गया है। सचिन इनदिनों यूरोप में छुट्टियां मना रहे हैं। सचिन का कहना है कि श्रीलंका में क्रिकेट खेलने की बजाय उन्होंने यूरोप में परिवार के साथ वक्त गुजारने का फैसला किया है। इस बाबत एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में सचिन ने कहा, 'मैं अपने परिवार के साथ कुछ वक्त बिताना चाहता था। इसलिए मैंने बीसीसीआई से बात (न खेलने की) की। अगर मैं श्रीलंका जा रहा होता तो मैं यहां (यूरोप) में नहीं होता। मैं भारत में प्रैक्टिस कर रहा होता। लेकिन तब बच्चों के साथ वक्त बिताना मुश्किल होता।' 
सचिन हमेशा कहते रहे हैं कि क्रिकेट उनका पहला प्यार है। लेकिन सचिन के ताज़ा बयान से लगता है कि क्रिकेट धीरे-धीरे उनकी प्राथमिकता की सूची में नीचे आने लगा है। 
सचिन के इस रवैये से आप को यह लग रहा हो कि सचिन धीरे-धीरे संन्यास की तरफ बढ़ रहे हैं तो शायद आप गलत हैं। सचिन के मुताबिक उनके संन्यास का तो सवाल ही नहीं उठता है। खुद सचिन ने इस बारे में कहा, 'जब तक मैं इस खेल का आनंद ले रहा हूं, तब तक मेरा इसे छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। यह सब (संन्यास की अटकलें) 2006 से चल रही हैं। मैं क्रिकेट का आनंद ले रहा हूं और तब तक लेता रहूंगा जब तक इस खेल को लेकर मेरे अंदर जुनून बरकरार है।' सचिन ने मई में आईपीएल-5 के बाद किसी टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है। वे पिछले सवा महीने से आराम कर रहे हैं। इस बार आईपीएल में भी वे करीब आधे टूर्नामेंट ही खेल पाए थे। इसके बावजूद उन्‍होंने मैच खेलने के बजाय और आराम करने को अहमियत दी। सचिन चुनिंदा वनडे मैच खेलते हैं और इंटरनेशनल टी-20 तो वे कभी खेलते ही नहीं हैं। सचिन के कई आलोचक यह कहते रहे हैं कि उन्हें अपने क्रिकेट कॅरियर पर गंभीरता से विचार कर यह फैसला करना चाहिए कि उन्हें किस फॉर्मेट में खेलना है और किसमें नहीं। इन आलोचकों का तर्क है कि सचिन की अपनी मर्जी से क्रिकेट खेलने की नीति के चलते कई उभरते क्रिकेटरों का कॅरियर प्रभावित हो रहा है।

   

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