राष्ट्रीयहरियाणा

किसानों के नाम पर कांग्रेस- भाजपा कर रहे हैं पाखंड : योगेंद्र


पल पल न्यूज: सिरसा, 10 अक्टूबर। राजनीतिक चिंतक और स्वराज इंडिया के संंयोजक योगेंद्र यादव ने कहा कि कांगे्रस तीनों कृषि बिलों को लेकर विरोध प्रदर्शन के नाम पर केवल दिखावा कर रही है जबकि हकीकत ये है कि कांगे्रस और भाजपा दोनों ही इस मुद्दे पर मिले हुए हैं। देश में विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं है अगर यह सत्ता और किसानों के बीच की लड़ाई का मामला है। साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मीडिया खबरों को दिखा कम और दबा ज्यादा रहा है। पिछले माह किए गए भारत बंद की खबरों को मीडिया ने ताक पर रख दिया पर इस देश का किसान अपने बलबूते इस जंग को जीत कर ही रहेगा। वे पल पल समाचार पत्र और यू टयूब चैनल के एडीटर इन चीफ सुरेंद्र भाटिया के साथ बातचीत कर रहे थे। किसान आंदोलन की जरूत क्यों पड़ी और आंदोलन पंजाब और हरियाणा तक क्यों सीमित रहा? के सवाल पर यादव ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है। मीडिया खासकर राष्ट्रीय मीडिया खबरों को दिखा कम और दबा ज्यादा रहा है। 25 सितंबर के भारत बंद को देश व्यापी असर रहा, कर्नाटक और तमिलनाडु में अभूतपूर्व रहा पर मीडिया दबाकर बैठ गया। ऐसे में यह कहना कि देश में बंद हुआ ही नहीं, गलत हैै। देश में 250 से अधिक किसान संगठन इन कृषि बिलों के खिलाफ आंदोलनरत है और किसान इस जंग को जीत कर ही रहेगा। सभी किसान इस आंदोलन से क्यों नहीं जुड़ पा रहे? के सवाल पर यादव ने कहा कि दिल्ली का दवाब पड़ रहा है पर रैली और धरने में अंतर होता है। छह अक्तूबर की सिरसा किसान रैली सफल रही और किसानों की भीड़ ने साबित कर दिया कि वह इन बिनों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी। कांगे्रस भी इस बिल को वापस करने के लिए केंद्र सरकार पर दवाब बना रही है के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस की इतनी औकात कहा है 58 सीटें लेकर लोकसभा में बैठकर मौन साधे हुए हैं। कांगे्रस में पंजाब की सरकार है और वहां पर किसान आंदोलन गति पकड़ रहा है के सवाल पर उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों की करीब 31 जत्थेबंदिया है और उनकी कभी कांगे्रस से नहीं बनी वहां पर जो भी आंदोलन है वह किसान जत्थेबंदियों के सहारे चल रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसानों का आंदोलन किसी भी राजनीतिक दल की ओर से प्रायोजित नहंीं है। उन्होंने कहा कि कांगे्रस और अन्य राजनीतिक दल आपस में मिलकर पाखंड कर रहे हैं। यह किसान आंदोलन कांगे्रस का मामला नहीं है, यह तो सत्ता बनाम किसान की लडाई है।
एमएसपी को कानून अमली जामा पहनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा होने से किसानों की एक बड़ी समस्या का समाधान हो जाएगा। वर्ष 2012 में जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तब एमएसपी को कानूनी रूप देने की बात आई थी तब भाजपा और मोदी ने भी इसका विरोध किया था और आज कांगे्रस मोदी का विरोध कर रही है, ये सब राजनीतिक पाखंड के सिवाय कुछ नहीं है किसानों तो अपने हकों को लेकर शुरू से आवाज उठाता आया है पर उसकी सुनता कौन है। उन्होंने कहा कि किसानों के नाम पर कांगे्रस और भाजपा आपस में नूरा कुश्ती करते रहे इसमें किसानों को क्यों घसीटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौैटाला को किसानों के मुद्दे पर अपना स्टेंड स्पष्ट करना चाहिए।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ये बिल किसानों के हितों को लेकर नहीं बनाए। इन बिलों को लागू करते समय अपनी चहेती कंपनियों का पूरा ध्यान रखा गया है। कंपनियों की शर्तों पर ही बिल पास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि के ंद्र सरकार कृषि क्षेत्र में पैसा लगाना ही नहीं चाहती है, कंपनियां पैसा लगाएंगी तो वह किसानों को लूटेंगी भी। उन्होंने कहा कि मंडी चाहे सरकारी हो या प्राइवेट दोनों के लिए समान नियम होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कांटे्रट फार्मिंग किसी भी सूरत में किसानों के हित में नहीं है इसमें किसानों को दोनों हाथों से लूटा जाएगा।

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