राष्ट्रीयसमाचार

चीन सीमा के नजदीक राजनाथ सिंह ने की शस्त्र पूजा

कहा- एक इंच जमीन की भी रक्षा करेगी सेना दार्जिलिंग

पश्चिम बंगाल और सिक्किम के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को दार्जिलिंग में सुकना युद्ध स्मारक पर ाद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान राजनाथ ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा वैकल्पिक अलाइनमेंट गंगटोक-नाथुला रोड का उद्घाटन किया। रक्षा मंाी राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत चाहता है कि चीन और भारत के बीच सीमा पर शांति होनी चाहिए और तनाव ख म होना चाहिए, लेकिन मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि हमारी सेना किसी को भी देश की एक इंच जमीन पर भी कजा नहीं करने देगी। राजनाथ ने कहा, मैं आप सबको यह भी बताना चाहता हूं कि बीआरओ द्वारा सिक्किम के अधिकांश सीमावर्ती सड़कों का डबल लेन में अपग्रेडेशन किया जा रहा है। इसमें से ईस्ट सिक्किम में 65 किलोमीटर सड़क निर्मा ा-कार्य प्रगति पर है, तथा 55 किलोमीटर सड़क निर्मा ा योजना के तहत है। उहोंने कहा, नॉर्थ सिक्किम में भारतमाला परियोजना के अतर्गत ‘मंगन-चुगथांग-यूमेसेमडोंगÓ और ‘चुगंथांग-लाचेनजीमा-मुगुथांग-नाकुलाÓ तक 225 किलोमीटर डबल लेन सड़क का निर्मा ा कार्य नियोजित है। ये कार्य 9 पैकेजों में नियोजित किए गए हैं, जिनकी अनुमानित लागत 57 10 करोड़ रुपये है। रक्षा मंाी के साथ शस पूजन के दौरान भारतीय सेना के अधिकारी और जवान मौजूद थे। उहोंने जिस स्थान पर शस पूजन किया वहां से वास्तविक नियंा ा रेखा दो किलोमीटर से भी कम पर पड़ती है। भारत की सीमा के पास शस पूजा ऐसे समय पर की गई है जब पूर्वी लद्दाख में हमारा चीन के साथ गतिरोध जारी है। बता दें कि विजयादशमी के दिन शस पूजा करने की परंपरा है। रक्षा मंाी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के दो दिवसीय दौरे पर आए हैं। उनके साथ सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरव ो भी हैं। वे यहां सुरक्षाबलों की तैयारियों का जायजा लेंगे। शनिवार को, रक्षा मंाी और सेना प्रमुख को सिक्किम क्षेा में वास्तविक सीमा के साथ स्थिति के बारे में विस्तार से बताया गया था। इससे पहले, रक्षा मंाी शनिवार को दार्जिलिंग पहुंचे। वहां से हेलीकॉ टर के मायम से 33 कोर सेना मु यालय सुकना पहुंचे। यहां पहुंचकर उहोंने जवानों को संबोधित किया। रक्षा मंाी ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा, भारत हमेशा अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध चाहता है, हमने हमेशा उसी के लिए प्रयास किया है। लेकिन हमारे जवानों को समय-समय पर अपनी सीमाओं, अखंडता और सार्वभौमिकता की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान करनापड़ा है।

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