Friday, December 4
हरियाणा

नई शिक्षा नीति में है प्रशिक्षण और गुणवत्ता का समावेश : प्रो. राजबीर सिंह सोलंकी

सीडीएलयू के वीसी प्रो. राजबीर सिंह सोलंकी से चर्चा करते पल-पल संपादक सुरेंद्र भाटिया

पल पल न्यूज: सिरसा, 6 सितंबर। चौ.देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति युवाओं को कामयाब बनाने की दिशा में उठाया गया सार्थक कदम है जिसमें प्रशिक्षण और गुणवत्ता का समावेश है। यह नीति देश को एक नई दिशा और दशा प्रदान करेगी और बेरोजगारी को दूर करेगी। वे पल पल यू टयूब चैनल के स्टूडियो में पल पल के प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया के साथ नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर चर्चा कर रहे थे। चौतीस साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी, के सवाल पर कुलपति ने कहा कि शिक्षा नीति में पहला बदलाव 1968 में किया गया था और इसके बाद 1986 में हुआ। पहली दो नीतियों में परिवर्तन को क्रांतिकारी बताया गया था पर ये शब्द इस तीसरे बदलाव में नहीं है। सरकार की सोच इस दिशा में पारदर्शी ही नहीं गुणवत्तापरक है। पहले मानव संशाधन मंत्रालय के अधीन शिक्षा आती थी पर अब इसके लिए शिक्षा मंत्रालय का गठन किया गया है। शिक्षा का उद्देश्य जीवन जीने के लिए सोचा गया है। जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा पर खर्च होना चाहिए पर ऐसा हुआ नहीं के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये मांग बहुत पुरानी है, शिक्षा पर खर्च बढऩा चाहिए पैसा होगा तो इंफ्र ास्ट्रेचर बढेगा और ऐसा होने पर शिक्षा में गुणवत्ता आएगी। फिलहाल खर्च कम है, इसे दो प्रतिशत किया जा सकता है। नई नीति में शिक्षा क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रेक्चर और गुणवत्ता पर फोकस किया गया है। सेमेस्टर प्रणाली से समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। साथ ही विद्यार्थी तनाव में रहता है। पाठयक्रम और बैग का बोझ कैसे कम किया जा सकता है के सवाल पर उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में इसे लेकर काफी बदलाव किया गया है जिसके सार्थक परिणाम सामने आएंगे। अब एक सप्ताह का एग्जाम होगा जिससे समय की बचत होगी। पहले मैकाले शिक्षा पद्धति केवल क्लर्क ही पैदा करती थी। नई नीति मेें क्या है, के सवाल पर उन्होंने कहा कि कक्षा छह से ही व्यवसायिक पाठयक्रम जोड़ा गया है तीन से पांच साल के बच्चे को खेल खेल में सिखाया जाएगा जिसे बच्चों की रूचि का पता चल सकेगा और शहरी व ग्रामीण के बीच का अंतर भी खत्म होगा। कक्षा आठ के बाद बच्चा अगर वोकेशनल की ओर जाना चाहता है तो चल जाएगा। मेडिकल स्ट्रीम में जाने वाला बच्चा माइनर सबजेक्ट के रूप में भूगोल, इतिहास जैसे विषय ले सकता है, पर मेजर सबजेक्ट में जीव विज्ञान जरूरी है। इससे बच्चों का करियर तो बनेगा ही साथ ही उनकी रूचि को भी बढ़ावा मिलेगा।
डिप्लोमा सिस्टम के बारे में उन्होंने कहा कि बच्चों का एडमिशन और एग्जिट आसान हो जाएगा। बच्चा जितना पढ़ा है उसे उसका सर्टिफिकेट मिल जाएगा अगर बाद में वह पढऩा चाहता है तो सर्टिफिकेट के आधार पर दाखिला ले सकता है। पढ़ाई छोडऩे के दस या पंद्रह साल बाद भी व्यक्ति पढ़ सकता है। शिक्षा में मात्र भाषा भी बाधक है बच्चा एक राज्य में हिंदी में पढ़ रहा है पिता का तबादला दक्षिण में हो गया तो उसे वहां की भाषा में पढऩा होगा के सवाल पर उन्होंने कहा कि बच्चा मां बोली भाषा में ही विकास कर सकता है। देश में तीन भाषाएं पहले भी थी। नई शिक्षा नीति में इसका भी ख्याल रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी मुख्य अध्यापक और प्राचार्य पर डाली जा सकती है अगर इंफ्स्ट्क्चर ठीक नहीं है तो शिक्षा में गुणात्मक बदलाव नहीं लाया जा सकता जिसका नुकसान तो होगा ही।

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