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ब्लैक फंगस:सरकार समय पर दवाई की व्यवस्था कर दे तो नहीं होगी मरीज की मौत

बुखार और डाइबिटीज से पीड़ित बिना पूछे न लगवाएं बोतल:डॉ.सुदीप मुंजाल 

उपचार के लिए तीन डॉक्टरों की टीम होना बेहद जरूरी
सिरसा में 57 लोग आ चुके हैं ब्लैक फंगस की चपेट में, 11 लोगों की जा चुकी है जान
सिरसा। ब्लैक फंगस के तेजी से बढ़ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेशभर में ब्लैक फंगस के अब तक करीब 625 मामले सामने आ चुके हैं और 33 लोगों की जान जा चुकी है। सिरसा जिला में ब्लैक फंगस के रोगियों की संख्या 55 तक पहुंच गई है। यहां पर अभी तक 11 लोगों को इस बीमारी से अपनी जान गंवानी पड़ी है। कोरोना की भांति ही सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया हुआ है और बड़े सरकारी हॉस्पिटलों में उपचार की व्यवस्था की है। प्रशासन के निर्देश पर प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी रोगियों का उपचार किया जाने लगा है। शहर के मेडी सिटी हॉस्पिटल में ब्लैक फंगस के 13 रोगी उपचाराधीन हैं और 3-4 रोगी ठीक होकर यहां से घर जा चुके हैं। ब्लैक फंगस के उपचार के लिए तीन डॉक्टरों की टीम होना बेहद जरूरी है। केवल एक डॉक्टर से इस रोग का सफल उपचार संभव नहीं। इसके लिए ईएनटी, आई स्पेशलिस्ट व मेडिशियन एक साथ का इलाज किया जाता है। वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ.सुदीप मुंजाल का कहना है कि सरकार टाइम पर ब्लैक फंगस की दवाई उपलब्ध करवाए और रोगी समय पर अस्पताल पहुंच जाए तो ब्लैक फंगस से मरीज की जान नहीं जा सकती। इस बीमार के उपचार के लिए समय पर दवाई का मिलना जरूरी होता है। सरकार अगर समय पर दवा उपलब्ध करवाएगी तो रोगी पूरी तरह ठीक होकर अपने घर वापस जाएगा। अब तक जितनी भी मौतें हुई हैं, वो केवल इसलिए हुईं क्योंकि रोगी समय पर उपचार के लिए हॉस्पिटल नहीं आया और अपने स्तर पर उपचार करवाता रहा। इससे बीमारी अंतिम स्टेज पर पहुंच गई। जिससे रोगी को बचाया नहीं जा सका।

इम्यूनिटी कमजोर वाले लोगों को ज्यादा खतरा
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डॉ. सुदीप मुंजाल के मुताबिक ब्लैक फंगस एक फंगल इन्फेक्शन है और यह उन लोगों पर अटैक करता है, जिनका इम्यून सिस्टम किसी बीमारी या इसके इलाज की वजह से कमजोर हो जाता है। ये फंगस हवा में मौजूद होता है और ऐसे लोगों में पहुंचकर उनको संक्रमित कर रहा है। जिनकों बुखार, सिर दर्द, खांसी, सांस लेने में परेशानी, उल्टी में खून और मेंटल कन्फ्यूजन की शिकायत रहती है। ब्लैक फंगस के लक्षणों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। इलाज में देरी होने से मरीज की जान भी जा सकती है। उन्होंने बताया कि ब्लैक फंगस उन्हीं लोगों पर अटैक कर पाता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। क्योंकि डाइबिटीज मरीज स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए उनका इम्यूनिटी लेवल कम हो जाता है, इस कारण ब्लैक फंगस को उन्हें अपना शिकार बनाने का मौका मिल जाता है।

डाइबिटीज मरीज रहें सतर्क
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डॉ. सुदीप मुंजाल का कहना है कि जिन लोगों को डाइबिटीज है और वो कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं, उन पर ब्लैक फंगस के आक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा होता है। ब्लैक फंगस वातावरण में मौजूद है। खासकर मिट्टी में इसकी मौजूदगी ज्यादा होती है। स्वस्थ और मजबूत इम्यूनिटी वाले लोगों पर यह अटैक नहीं कर पाता है। जिन मरीजों को शुरुआत में ही स्टेरॉइड्स दिए गए, उनमें ब्लैक फंगस का संक्रमण हो सकता है। स्टेरॉइड्स की बहुत ज्यादा डोज दिए जाने पर भी मरीज को ब्लैक फंगस होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों के खून में मिठास की मात्रा बढ़ जाती है जो हाई ब्लड शुगर के रूप में सामने आता है। अगर लंबे वक्त तक स्टेरॉइड्स दिए जाएं तो भी लोग ब्लैक फंगस की चपेट में आ सकते हैं।

स्टेरॉयड दिए जाने से होती है बीमारी
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डॉ. सुदीप मुंजाल ने बताया कि कुछ दवाइयां भी बहुत सावधानी से देनी चाहिए ताकि वो भी फंगल इन्फेक्शन का कारण बन सकती हैं क्योंकि ये दवाइयां इम्यूनिटी सिस्टम को कमजोर करती हैं।  बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेरॉयड लेना खतरनाक हो सकता है। अभी ये देखने में आया है कि जिन लोगों को कोरोना हुआ और वे शुगर से ग्रस्त थे, वे गांव में ही बोतल लगवाते रहे। इन्हें स्टेरॉयड दिया जा रहा था। ऐसे में उक्त लोग ब्लॅक फंगस के शिकार हो गए।

घर बैठे उपचार संभव नहीं
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डॉ.मुंजाल ने बताया कि जिन लोगों को शुगर है और उन्हें बुखार हुआ है तो वे बिना अच्छे डॉक्टर से पूछे बिना बोतल न लगवाएं। ये बीमारी घर बैठे नहीं होती, इसका मुख्य कारण स्टेरॉयड है। बेवजह स्टेरॉयड दिए जाने के कारण लोग ब्लैक फंगस से ग्रस्त हो रहे हैं। अगर समय पर रोगी हॉस्पिटल में आ जाएगा तो मौत होने का खतरा नहीं रहेगा। घर बैठे इस बीमारी का उपचार संभव नहीं। 

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