राष्ट्रीयसमाचार

मन की बात : कृषि बिलों पर विरोध के बावजूद डटे पीएम मोदी

फिर से किसानों को समझाया
● किसानों की मजबूती ही आत्मनिर्भर भारत का आधार

नई दिल्ली। कृषि सुधार से जुड़े तीन विधेयकों पर बवाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने स्टैंड पर कायम हैं। विपक्षी दलों से लेकर कुछ राज्यों के किसान नए प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं। पीएम मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ में फिर सुधारों पर बात की और कुछ किसानों के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि एमपीएमसी ऐक्ट से बाहर होने के बाद फल और सब्जियां उगाने वाले किसानों को खासा फायदा हुआ है। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश के किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि अपने फल-सब्जियों को, कहीं पर भी, किसी को भी, बेचने की ताकत देश के दूसरे किसानों को भी मिली है। उन्होंने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र, हमारे किसान, हमारे गांव, आत्मनिर्भर भारत का आधार हैं। ये मजबूत होंगे तो आत्मनिर्भर भारत की नीवं मजबूत होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें किसानों और किसान संगठनों से फीडबैक मिला है। उन्होंने कहा कि मुझे कई ऐसे किसानों की चि_ियां मिलती हैं, किसान संगठनों से मेरी बात होती है, जो बताते हैं कि कैसे खेती में नए-नए आयाम जुड़ रहे हैं, कैसे खेती में बदलाव आ रहा है। हरियाणा के सोनीपत जिले के हमारे एक किसान भाई कंवर चौहान जी की कहानी सुनिए। उन्होंने बताया है कि कैसे एक समय था जब उन्हें मंडी से बाहर अपने फल और सब्जियां बेचने में बहुत दिक्कत आती थी। अगर वो मंडी से बाहर, अपने फल और सब्जियां बेचते थे तो कई बार उनके फल, सब्जी और गाडिय़ां तक जब्त हो जाती थी। लेकिन, 2014 में फल और सब्जियों को एपीएमसी ऐक्ट से बाहर कर दिया गया। इसका उन्हें और आस-पास के साथी किसानों को बहुत फायदा हुआ। पीएम मोदी ने गांधी, शास्त्री और जेपी को याद किया क्योंकि आने वाले महीने में हम कई महान विभूतियों की जयंती मनाएंगे। 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री की जयंती है। बापू के आर्थिक चिंतन में भारत की नस-नस की समझ थी। उनका जीवन यही बताता है कि हमारा कार्य ऐसा हो कि गरीब से गरीब व्यक्ति का भला हो। शास्त्री जी का जीवन विनम्रता और सादगी का संदेश देता है। 11 अक्टूबर को जयप्रकाश नारायण (जेपी) और नानाजी देशमुख की जयंती है। जब जेपी भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, तब पटना में उन पर हमला हुआ, जिसे नानाजी ने अपने ऊपर ले लिया। 12 अक्टूबर को राजमाता विजयाराजे सिंधिया का जन्मदिन है। राजपरिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपना जीवन लोगों के लिए समर्पित कर दिया।
शहीदों से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक का जिक्र
1919 में जलियांवाला हत्याकांड के बाद एक बच्चा वहां गया। बच्चा स्तब्ध था कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है? उसने अंग्रेजी साम्राज्य को उखाड़ फेंकने की कसम खाई। वह बच्चा महान शहीद भगत सिंह थे। कल 28 सितंबर को उनकी जयंती है। भगत सिंह और उनके साथियों ने जिन कामों को अंजाम दिया, उनका आजादी की लड़ाई में अहम योगदान है। चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव जैसे कई क्रांतिकारियों का एक ही मकसद था, भारत को आजाद कराना। हम भले ही भगत सिंह न बन पाएं, लेकिन उनके पदचिह्नों पर चलने की कोशिश कर सकते हैं। चार साल पहले सितंबर में भारत ने पीओके में जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। हमारे जवानों ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना अदम्य साहस का परिचय दिया था।

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