Tuesday, October 20
राष्ट्रीयसमाचार

दावा : फरवरी में काबू हो जाएगी कोरोना महामारी

नई दिल्ली। देश में रविवार को कोरोना संक्रमण के 61,871 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही भारत में कुल संक्रमितों की संख्या 75 लाख के पार हो चुकी है। मगर भारत सरकार के बनाए वैज्ञानिकों के पैनल का दावा है कि कोरोना अपने पीक से गुजर चुका है। पैनल के मुताबिक, कोरोना वायरस के फरवरी 2021 तक खत्म होने की संभावना है। पैनल के मुताबिक, भारत में कोरोना के 10.6 मिलियन यानी एक करोड़ छह लाख से ज्यादा मामले नहीं होंगे। अभी भारत में कोरोना के कुल मामले 75 लाख के करीब हैं। आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम. विद्यासागर की अध्यक्षता में बनी विशेषज्ञ समिति ने कहा कि वायरस से बचाव को लेकर किए जा रहे उपाय जारी रखे जाने चाहिए। समिति ने महामारी के रुख को मैप करने के लिए कम्प्यूटर मॉडल्स का इस्तेमाल किया है। फरवरी तक महामारी पर काबू होने की भी उम्मीद है। लेकिन यह तभी संभव होगा जब लोग कोरोना से बचाव के नियमों का पूरी तरह से पालन करना जारी रखें। समिति के मुताबिक, अगर भारत ने मार्च में लॉकडाउन न लगाया होता तो देशभर में 25 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई होती। अबतक इस महामारी से 1.14 लाख मरीजों की मौत हुई है। समिति ने कहा है कि त्योहारों और संर्दियों के चलते संक्रमण बढ़ सकता है। इसलिए वर्तमान सुरक्षात्मक उपायों को जारी रखा जाना चाहिए।
30 फीसदी संक्रमित : अध्ययन में कहा गया है कि अब तक देश में 30 फीसदी आबादी कोरोना से संक्रमित हो चुकी है। आईसीएमआर के सीरो सर्वे में यह आंकड़ा सात फीसदी था। लेकिन नये अध्ययन के अनुसार अगस्त अंत तक ही 14 फीसदी संक्रमित हो चुके थे।
प्रवासी श्रमिकों से नहीं फैला : अध्ययन के अनुसार प्रवासी श्रमिकों की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना के फैलाव की आशंकाएं निर्मूल साबित हुई। उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे लेकर विशेष रूप से अध्ययन किया गया। क्योंकि इन राज्यों में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर लौटे। इसकी वजह गांवों में पहुंचने से पूर्व उन्हें क्वारंटीन करना रहा। यदि लाकडाउन से पहले प्रवासी मजदूरों को गांव जाने दिया गया होता तब संक्रमण बढ़ सकता था।
अध्ययन में शामिल शीर्ष संस्थान : अध्ययन में आईआईटी कानुपर, हैदराबाद, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बंगलोर, आईएसआई कोलकात्ता, एनआईवी पुणे, पीएसए कार्यालय, आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज, सीएमसी वेल्लोर आदि संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल थे।

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