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हर बाधा को पारकर कैमला में पहुंच गए हजारों किसान,महापंचायत मंच पर की तोडफ़ोड, सीएम की कुर्सी को भी नहीं छोड़ा


मंत्री, विधायकों व वरिष्ठ नेताओं को पुलिस ने सुरक्षित निकाला, धरे रह गए प्रशासन के सभी सुरक्षा प्रबंध
पल पल न्यूज:घरौंडा, 10 जनवरी (प्रवीण )। पुलिस प्रशासन के पुख्ता इंतजाम भी प्रदर्शनकारी किसानों को कैमला की किसान महापंचायत में पहुंचने से नहीं रोक सके। प्रशासन के सभी इंतजामों को धत्ता साबित करते हुए किसानों का जत्था हेलीपैड को उखाड़ता हुआ कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गया और मंच को तहस-नहस कर दिया। जिस वक्त प्रदर्शनकारियों ने मंच पर हमला बोला उस समय मंच पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर, खेल मंत्री संदीप सिंह, करनाल सांसद संजय भाटिया, पानीपत ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा, विधायक रामकुमार कश्यप इंद्री, महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष निर्मला बैरागी व अन्य नेता मौजूद थे। हंगामा होता देख सुरक्षाकर्मी इन सभी को सुरक्षित स्थान से निकालकर ले गए। पुलिस प्रशासन प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हल्के बल प्रयोग के साथ खानापूर्ति करता दिखाई दिया। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करते हुए पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस बल तैनात किया गया था। बावजूद इसके पुलिस पंगु साबित हुई।
रविवार की सुबह करीब आठ बजे बसताड़ा टोल प्लाजा पर भारी संख्या में प्रदर्शनकारी किसान एकत्रित हुए। करीब सवा दस बजे प्रदर्शनकारी टोल से रवाना हुए। 10.40 बजे सर्विस रोड पर कैमला मोड पर कुछ पुलिसकर्मी तैनात किए गए। पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस वैन खड़ी कर दी थी। लेकिन प्रदर्शकारियों ने वैन को ट्रैक्टरों की मदद से एक साइड में कर दिया और आगे बढ़ गए। कैमला रोड पर नाम चर्चा घर से करीब 200 मीटर की दूरी पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बड़े-बड़े लोडिंग वाहनों को रास्ते में खड़ा किया हुआ था। यहां पर एसपी गंगाराम पुनिया ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया लेकिन प्रदर्शनकारी बेरिकेटिंग को तोडऩा शुरू कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन और टियर गैस का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी खेतों के रास्ते से आगे बढ़ते चले गए। हालांकि प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए प्रशासन ने गढ़ी मुल्तान के पास भी बेरिकेटिंग की हुई थी लेकिन किसानों का रूख खेतों की तरफ से होने के कारण इस बेरिकेटिंग का कोई फायदा नहीं हुआ।

विधायक की भी बात नहीं सुनी

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने कैमला गांव के बोरखा चौंक और पानी की टंकी के पास बेरिकेटिंग की हुई थी। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया था लेकिन खेतों के रास्ते प्रदर्शनकारी गांव में घुस गए और खेतों के रास्ते ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंच गए। जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया लेकिन प्रयास नाकाम रहे। विधायक हरविंद्र कल्याण ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ प्रदर्शनकारी किसानों को समझाने का प्रयास किया लेकिन किसी ने विधायक की भी एक न सुनी।

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस का हल्का बल प्रयोग

हेलीपेड के चारों तरफ पुलिस द्वारा बांस लगाकर बेरिकेटिंग की गई थी। कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए प्रदर्शनकारी करीब पौने एक बजे हेलीपेड की तरफ बढ़ गए। प्रदर्शनकारियों को हेलीपेड की बेरिकेटिंग से दूर रखने के लिए करीब एक घंटे तक जद्दोजहद चलती रही। पुलिस के आलाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। करीब एक घंटे तक किसानों और पुलिस के बीच एक घंटे तक घमासान होता रहा। लेकिन किसानों ने बेरिकेटिंग भी तोड़ दी। इस बीच आंदोलनकारी किसानों और ग्रामीणों के बीच भी झड़प हुई, लेकिन यह भी नाकाम रही। प्रदर्शनकारियों ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हेलीपेड को उखाडऩा शुरू कर दिया और इसके बाद किसान महापंचायत के कार्यक्रम स्थल की ओर अपना रूख कर दिया।

तित्तर बित्तर हुए मंत्री और नेता-

आंदोलनकारी किसानों ने 1.38 बजे हेलीपेड उखाडऩा शुरू कर दिया। इस समय मंच पर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर, खेल मंत्री संदीप सिंह, करनाल सांसद संजय भाटिया, पानीपत ग्रामीण विधायक महीपाल ढांडा, विधायक रामकुमार कश्यप इंद्री, महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष निर्मला बैरागी व अन्य नेता मौजूद थे। महिला नेता निर्मला बैरागी अपना भाषण दे रही थी और इसके बाद ओमप्रकाश धनखड़ का नंबर आना था। धनखड़ का नाम भाषण के लिए बोला गया लेकिन तभी हेलीपेड उखाडऩे की भनक लगते ही मंचासीन नेता मंच छोड़कर चले गए। मंच से उतरे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को उनके सुरक्षाकर्मी मंदिर के अंदर से सुरक्षित स्थान पर ले गए और उन्हें उनकी गाड़ी तक पहुंचाया। ओमप्रकाश धनखड़ ने मीडिया से बातचीत में इतना ही कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन यह तरीका सही नहीं है।

रोकने के नाम पर खानापूर्ति

आंदोलनकारियों ने किसान महापंचायत के मंच पर जमकर तोडफ़ोड़ की। प्रदर्शनकारियों ने मंच की कुर्सियों को तोड़ डाला। बैनर का लाडी डंडों से तोड़ फाड़ डाला। लेक्चर स्टैंड को मंच से नीचे गिरा दिया। लोक कलाकारों के साजो समान, प्रिंटर और अन्य उपकरणों को तोड़ डाला। कार्यक्रम में मौजूद लोगों में भी भगदड़ मच गई। ग्रामीणों का कहना है कि किसी कार्यक्रम में इस तरह से तोडफ़ोड करना गलत है। प्रदर्शनकारियों से ज्यादा सं या में पुलिस बल तैनात किया गया था लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के नाम पर खानापूर्ति की। बात कहने का एक तरीका होता है लेकिन जिस तरह से यह कार्य हुआ है वह सरासर गलत है।

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