Tuesday, October 20
राष्ट्रीयसमाचार

भारत ने ब्रह्मोस का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

अरब सागर में लक्ष्य पर साधा निशाना
नई दिल्ली। भारत ने रविवार को नौसेना के स्वदेशी स्टील्थ डिस्ट्रॉयर आईएनएस चेन्नई से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। परीक्षण के दौरान मिसाइल ने अरब सागर में एक लक्ष्य पर निशाना लगाया। मिसाइल ने उच्च-स्तरीय और अत्यंत जटिल युद्धाभ्यास करने के बाद लक्ष्य को सटीकता के साथ सफलतापूर्वक लक्षित लिया। ब्रह्मोस प्राइम स्ट्राइक हथियार के रूप में नेवल सर्फेस लक्ष्यों को लंबी दूरी तक निशाना बनाकर युद्धपोतों की अजेयता सुनिश्चित करेगा। बता दें कि, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 400 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक टारगेट को ध्वस्त कर सकती है। ब्रह्मोस एक रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमानों और जमीन से भी लॉन्च किया जा सकता है। ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत विकसित किया गया है। शुरुआत में इसकी रेंज 290 किलोमीटर थी। हालांकि इसकी क्षमता को बढ़ाकर 400 किलोमीटर से ज्यादा किया गया है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 450 किलोमीटर से अधिक दूरी तक दुश्मन के टारगेट को तबाह कर सकती है। भारत ने पहले ही लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लगने वाली सीमा पर कई रणनीतिक स्थानों पर ब्रह्मोस मिसाइलों और अन्य प्रमुख हथियारों को बड़ी संख्या में तैनात किया हुआ है। यह परीक्षण ऐसे समय पर हुआ है, जब भारत और चीन सीमा विवाद में उलझे हुए हैं। एक भारत-रूसी संयुक्त उद्यम ‘ब्रह्मोस एयरोस्पेसÓ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का उत्पादन करता है जिसे पनडुब्बियों, जहाजों, विमानों या भूमि प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है। पिछले साल मई में, भारतीय वायुसेना ने सुखोई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल के हवाई संस्करण का सफल परीक्षण किया था। ब्रह्मोस मिसाइल भारतीय वायुसेना को दिन या रात और सभी मौसम की स्थिति में समुद्र या सतह पर किसी भी लक्ष्य पर पिनपॉइंट सटीकता के साथ लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता प्रदान करती है।
न्यायाधीशों को निडरता के साथ लेने चाहिए फैसले ताकि बना रहे जनता का यकीन : जस्टिस एनवी रमण
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण ने कहा कि न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत उसमें लोगों का विश्वास है। इसे कायम रखने के लिए न्यायाधीशों को अपने सिद्धांतों के प्रति अडिग होकर निडरता के साथ फैसले करने चाहिए। सनद रहे हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने भारत के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे को पत्र लिख जस्टिस रमण पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एआर लक्ष्मणन की शोकसभा में शनिवार को जस्टिस एनवी रमण ने उक्त बातें कही। मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी के आरोपों के परिप्रेक्ष्य में जस्टिस रमण की टिप्पणियां खास मायने रखती हैं। जस्टिस एनवी रमण ने कहा कि न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत है लोगों का इसमें यकीन बरकरार रहे। इसे देखते हुए न्यायपालिका को निष्ठा, विश्वास और अपनी स्वीकार्यता बनाए रखनी पड़ती है।
ऐसा पहली बार है कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी के पत्र लिखने से शुरू हुए विवाद के बाद जस्टिस रमण ने कोई सार्वजनिक टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के लिए जरूरी है कि वह अपने सिद्धांतों पर अडिग बना रहे और निडरता के साथ फैसले करे। किसी भी न्यायाधीश की खासियत होनी चाहिए कि वह तमाम तरह की बाधाओं और दबावों, विषम परिस्थितियों के बावजूद साहस के साथ निर्णय दे।

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