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बेमिसाल रहा है सिरसा जिले का 45 साल का सफर

सिरसा जिला के स्थापना दिवस पर विशेष

कमल शर्मा
पल पल न्यूज: सिरसा, 1 सितंबर। हरियाणा प्रदेश के पश्चिमी छोर पर आबाद सिरसा जिला आज 45 साल का हो गया है। एक सितंबर 1975 को सिरसा को हिसार जिले से अलग करके जिला का दर्जा दिया गया था। सिरसा को अलग जिला बनाने की घोषणा के लिए राजकीय नेशनल कॉलेज में एक समारोह का आयोजन हुआ था। उस समारोह में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. बंसीलाल ने सिरसा को अलग जिला बनाने की विधिवत घोषणा की थी। अपने उद्भव काल से लेकर अब तक सिरसा जिले ने कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे हैं। विकास की दृष्टि से जिले में एक नहीं बल्कि अनेक ऐसे काम हुए हैं जिनकी बदौलत जिला महानगर का रूप लेता जा रहा है। आज जिले में संभवत ऐसा कोई क्षेत्र अछूता नहीं है जहां विकास नहीं हुआ है। हर क्षेत्र में यहां के लोगों ने अपनी पहचान कायम की है। रोजगार की दृष्टि से जरूर सिरसा जिला पिछड़ा हुआ है। जिले में 45 साल बाद भी आज तक सरकारी क्षेत्र में एक भी कारखाना या फैक्ट्री नहीं लगी है जहां लोगों को रोजगार मिल सके। कृषि आधारित उद्योग भी कम है, लिहाजा कम ही लोगों को रोजगार मिल रहा है। रोजगार के क्षेत्र में अभी विकास की जरूरत है।
मिली सरकारी भवनों की सौगात

जिले में हुए विकास पर नजर डाली जाए तो कई भव्य सरकारी भवन बन गए हैं। जिला मुख्यालय पर लघुसचिवालय व ई-दिशा केंद्र बने हैं जहां एक ही छत के नीचे सभी विभागों से संबंधित कार्य होते हैं। लोगों को इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सामान्य अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनाया गया है। सिरसा शहर में रेलवे ओवरब्रिज बन चुका है जिससे दो भागों में बंटा सिरसा शहर एक हो गया है। अब रेलगाड़ी आने पर रेलवे फाटक पर वाहनों की लंबी कतारें नहीं लगती है। चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय भी आधुनिक रूप ले चुका है। सिरसा शहर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त महिला कॉलेज बन गया है। डबवाली, कालांवाली, ऐलनाबाद, रानियां, चौपटा, ओढ़ां खंड में भी इसी तरह के कई सरकारी भवन बन गए हैं। गांवों में ग्राम सचिवालय बन गए हैं जहां सरकारी कार्य एक ही छत के नीचे होते हैं। जिले के गांवों को जोडऩे के लिए सड़कों का जाल बिछ गया है। हाइवे पर हिसार रोड पर बाइपास बन गया है। शहरों के साथ ही गांवों में भी पक्की गलियों व नालियों का निर्माण विकास की कहानी खुद बयां कर रहा है।
शिक्षा में अलग पहचान

अपने जन्म के समय सिरसा जिला शिक्षा की दृष्टि से पिछड़ा हुआ था। एक दशक पूर्व तक जिले में जरूरत के अनुसार स्कूल-कॉलेज नहीं थे, लिहाजा यहां के विद्यार्थियों को अन्य जिलों में शिक्षा प्राप्ति के लिए जाना पड़ता था। लेकिन अब शिक्षा के क्षेत्र में भी सिरसा जिला एडवांस हो गया है। जिले में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय की स्थापना शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है। विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ दर्जन विषयों में एमए करने की सुविधा है। अन्य जिलों के विद्यार्थी भी यहां से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। चौधरी देवीलाल विद्यापीठ भी शिक्षा के क्षेत्र में एक अनौखी उपलब्धि है। यहां पर रोजगारपरक शिक्षा दी जा रही है। एक ही संस्थान में आधा दर्जन कॉलेज चल रहे हैं। खुशी की बात तो यह है कि इस संस्थान में पढऩे वाले कई विद्यार्थियों को प्लेसमेंट के तहत नामी कंपनियों में रोजगार मिला है। जिले में विद्यार्थियों को शिक्षा मुहैया कराने के लिए 12वीं कक्षा तक के 113 सरकारी, दसवीं कक्षा तक के 91 सरकारी, 8वीं कक्षा तक के 118 सरकारी व 5वीं तक के 532 सरकारी स्कूल हंै। जिले में कक्षा 6 से 12वीं तक के 218 निजी स्कूल भी चल रहे हैं जहां बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा दी जा रही है। खास बात तो यह है कि इस बार बोर्ड द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में सिरसा जिला 12वीं के नतीजों में प्रदेश में 7वें तथा 10वीं कक्षा के नतीजों में 10वें स्थान पर रहा है।
इसके अलावा तकनीकी शिक्षा के लिए आईटीआई, बहुतकनीकी कॉलेज निजी व सरकारी क्षेत्र में चल रहे हैं। पिछले कुछ समय से इन संस्थानों की संख्या में इजाफा भी हुआ है। कंप्यूटर शिक्षा के लिए भी जिले भर में सैकड़ों सेंटर चल रहे हैं। यह बात अलग है कि सरकारी क्षेत्र में कॉलेज की कमी, खासकर लड़कियों के लिए अलग से कॉलेज की कमी खल रही है।
खेलों में दिखाया दमखम
खेल की दृष्टि से भी सिरसा जिला कुलांचे भर रहा है। जिले के कई खिलाडिय़ों ने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नाम कमाया है। जिले के गांव संत नगर निवासी हॉकी खिलाड़ी सरदारा सिंह व दीदार सिंह ने जिले का नाम रोशन किया है। सरदारा सिंह का नाम बड़े गर्व के साथ लिया जाता है। सरदारा सिंह को खेल का सबसे बड़ा पुरस्कार राजीव गांधी खेल पुरस्कार दिया गया है जो अपने सिरसा जिले के लिए गौरव की बात है। सिरसा के बरनाला रोड पर स्थित खेल स्टेडियम भी खेलों के क्षेत्र में एक शानदार उपलब्धि है। डेरा सच्चा सौदा व विद्यापीठ में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम बने हुए हैं जहां क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मैच होते रहते हैं। जिले में हॉकी, फुटबाल व एक सामान्य खेल अकादमी बनाने का काम चल रहा है। अब तो गांव-गांव में भी खेल स्टेडियम बन रहे हैं। सविता पूनिया महिला हॉकी टीम में अपना जलवा दिखा चुकी है।
मनोरंजन में महान

मनोरंजन की दृष्टि से भी सिरसा जिला अव्वल है। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में एफएम रेडियो की स्थापना की गई थी। हालांकि कुछ समय से एफएम रेडियो का प्रसारण बंद है। इसकी देखादेखी अब अन्य विश्वविद्यालयों में भी एफएम रेडियो की स्थापना की जा रही है। हाइवे स्थित गांव मोरीवाला के पास बना ओम सिने गार्डन भी जिले को महानगर का लुक दे रहा है जहां एक साथ तीन फिल्म दिखाई जाती हैं। इसमें जिले के अलावा फतेहाबाद व आसपास के गांवों के लोग भी फिल्म देखने आते हैं। इसके अलावा जिले में अन्य सिनेमा हॉल, क्लब व पार्क बने हुए हैं जहां लोग मनोरंजन करते हैं।
महानगरों की तर्ज पर बन रही हैं इमारतें

जिले में महानगरों की भांति चमचमाती इमारतें नजर आने लगी हैं। सिरसा जिले की सीमा प्रारंभ होने के साथ ही गांव मोरीवाला के पास ओम सिने गार्डन व आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित महक गार्डन भव्यता का दर्शन कराते हैं। महक गार्डन के ठीक सामने रॉयल हवेली भी एक शानदार इमारत है। हिसार रोड पर ही पर्ल रिजोर्ट, मंगलम रिसोर्ट, शिवा मॉटल, निशुराज आधुनिकता का परिचय देते हैं। हाइवे पर ही अन्य मैरिज पैलेस, होटल, कार्यालय, शहर के अंदर भी बहुमंजिला इमारतें बन गई हैं जो पहले नहीं थी। रेलवे ओवरब्रिज भी इसी कड़ी में एक प्रयास है जिससे शहर की सुंदरता बढ़ गई है। उपायुक्त प्रभजोत सिंह के प्रयास से सिरसा शहर में सरकारी भवनों की दीवारों पर पेंटिंग करवाई गई है।
खेती में प्रथम

हरियाणा प्रदेश की पहचान कृषि के कारण है। सिरसा जिला भी कृषि में अन्य जिलों से एडवांस है। कपास की प्रति हैक्टेयर पैदावार में जिला प्रदेश में प्रथम है। गेहूं व धान की पैदावार में भी जिला अहम स्थान रखता है। बागवानी को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों की लागत से अबूबशहर में किनू प्रोसेसिंग प्लांट बनाया गया है। इससे किसानों को किनू के अच्छे रेट मिलने लगे हैं। किसानों को अपनी उपज दूर-दराज जाकर न बेचनी पड़े, इसके लिए जिले में 17 अनाज मंडिया व खरीद सेेंटर बने हुए हैं। कपास पर रिसर्च के लिए उत्तरी भारत का पहला सेंटर बना हुआ है जहां कपास की कई नई किस्मों की खोज की जा चुकी है और कपास को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मांगेआना गांव में भी इजरायल के सहयोग से फल उत्कृष्टता केंद्र चल रहा है।
राजनीति में बजता है डंका

राजनीति में सिरसा जिले का न सिर्फ प्रदेश बल्कि देशभर में डंका बजता है। स्व. देवीलाल ने हरियाणा की बागडोर संभालने के साथ ही उपप्रधानमंत्री का पद भी सुशोभित किया है। ताऊ के नाम से मशहूर देवीलाल के पुत्र चौधरी ओमप्रकाश चौटाला भी बतौर मुख्यमंत्री अपनी अमिट छाप छोड़ चुके हैं। उनके पुत्र अजय सिंह चौटाला राज्यसभा में नाम कमा चुके हैं। दुष्यंत चौटाला वर्तमान में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री हैं। सिरसा निवासी प्रो. गणेशी लाल इस समय ओडिसा के राज्यपाल हैं। प्रदेश की राजनीति में कुमारी शैलजा, चौधरी रणजीत सिंह, लक्ष्मणदास अरोड़ा, जगदीश नेहरा, जगदीश चोपड़ा, डॉ. केवी सिंह, गोपाल कांडा सहित अन्य नेताओं का दबदबा रहा है।

  • सिरसा जिला एक नजर में
  • उपमंडल:4-सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, कालांवाली
  • तहसील:6-सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद, रानियां,नाथूसरी चोपटा, कालांवाली
  • उपतहसील:1- गोरीवाला
  • खंड:7-सिरसा, चोपटा, ओढ़ां, बड़ागुढ़ा, ऐलनाबाद, रानियां, डबवाली
  • जनसंख्या: वर्तमान में लगभग 15 लाख
  • क्षेत्रफल: 4277 वर्ग किमी
  • नगरपरिषद:2-सिरसा, डबवाली
  • नगरपालिका:3-ऐलनाबाद, कालांवाली, रानियां
  • ग्राम पंचायत:334
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