Saturday, November 28
राष्ट्रीय

ब्याज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

  • केंद्र सरकार को निर्देश, कर्ज में दी गई छूट पर अपना रुख स्पष्ट करें



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ईएमआई बाद में चुकाने की सहूलियत देकर ब्याज वसूलने की नीति पर सरकार को जमकर फटकार लगाई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि सरकार रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की आड़ लेकर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकती है।

कोर्ट ने सरकार से कहा कि आप अपना पूरा ध्यान सिर्फ कारोबार पर नहीं रख सकते, आपको लोगों के दुखों का भी ख्याल रखना होगा। अदालत ने कोरोना वायरस लॉकडाउन के कारण घोषित ऋण स्थगन को लेकर केंद्र की  कथित निष्क्रियता पर ध्यान दिया और उसे एक हफ्ते के अंदर अपने रुख को स्पष्ट करने के लिए कहा।

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सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कहा कि अर्थव्यवस्था के साथ जो दिक्कत हुई है वो केंद्र के सख्त लॉकडाउन लागू करने की वजह से हुई है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्र ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है जबकि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत पर्याप्त शक्तियां उसके साथ उपलब्ध थीं।

शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगने के बाद सरकार को समय दे दिया। मेहता ने कहा कि माय लॉर्ड आप ऐसा मत कहिए। हम आरबीआई के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं। पीठ में शामिल न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह ने भी सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे आपदा प्रबंधन अधिनियम पर रुख स्पष्ट करें और बताएं कि क्या मौजूदा ब्याज पर अतिरिक्त ब्याज लिया जा सकता है।

इस मामले की अगली सुनवाई अब एक सितंबर को होगी। अदालत ने कहा कि यह समस्या आपके (केंद्र सरकार) लॉकडाउन की वजह से पैदा हुई है। यह समय व्यवसाय करने का नहीं है, बल्कि इस वक्त तो लोगों की दुर्दशा पर विचार करना होगा।


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