Tuesday, October 20
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हजारों किसानों ने नेशनल हाइवे पर डाला डेरा

पल पल न्यूज:सिरसा। केंद्र सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र में लाए गए तीन अध्यादेशों, पिपली लाठीचार्ज और किसानों की समस्याओं को लेकर रविवार को जिले भर के हजारों किसानों ने पंजुआना के समीप नेशनल हाइवे पर डेरा डाले रखा। प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रदेश और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में किसान संगठनों के साथ साथ 19 संगठनों के नेता और कार्यकर्ता शामिल है। किसी भी विपरीत स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल ने मौके पर डेरा डाला हुआ है। तीन डीएसपी, एक एसडीएम और तीन थाना क्षेत्रों का पुलिस बल मोर्चा संभाले हुए है। सभी प्रकार के वाहनों का रूट डायवर्ट किया गया है। समाचार लिखे जाने तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में थी, किसानों को प्रदर्शनस्थल पर पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।

गौरतलब हो कि केंद्र सरकार ने किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता, और आवश्यक वस्तु (संशोधन, अध्यादेश, 2020) तीन अध्यादेश हैं जो केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की अवधि के दौरान पारित किया गया था। हरियाणा और पंजाब में किसान केंद्र द्वारा पारित तीन अध्यादेशों का विरोध कर रहे हैं। विवाद गत गुरुवार को शुरू हुआ जब भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने एक रैली का आयोजन किया और कुरुक्षेत्र के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 44 को रोक दिया। कि सानों पर हरियाणा पुलिस द्वारा कोविड-19 प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन नहीं करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस की ओर से किसानों पर लाठीचार्ज किया गया।

इस लाठीचार्ज ने आग में घी का काम किया और प्रदेशभर का किसान सडकों पर उतर आया। कांगे्रस ने मौका चूका नहीं और किसानों की दुखती रगों पर हाथ रखकर आंदोलन को समर्थन दे डाला। किसानों ने केंद्र द्वारा इन अध्यादेशों को पारित करने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। किसान नेता प्रहलाद सिंह भारूखेडा ने कहा कि उनका मानना ??है कि अध्यादेशों से किसानों का विनाश होगा और वे बाजार की ताकतों के सामने आ जाएंगे। किसान, किसानों का उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 से अधिक चिंतित हैं। अध्यादेश विभिन्न राज्य कृषि के तहत अधिसूचित बाजारों के बाहर किसानों की उपज के अवरोध मुक्त व्यापार के लिए प्रदान करना चाहता है। किसानों को डर है कि इस अध्यादेश से कृषि उत्पादों की बिक्री की मंडी प्रणाली समाप्त हो जाएगी और उनके उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य या एमएसपी से नीचे बेच दिया जाएगा।

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